सावन है मनभावन
जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** सावन मन भावन है,खुशियों की हवाएं चले,गीतों की धूम मची,दिलों में कुछ प्यार पले। घटा छा गई नभ में,बिजलियाँ कड़के-दमके,झिरमिर गिरती बूंदें,रिमझिम पायल घमके। चहुँओर सुंदर दृश्य,यकायक ही मन मोहे,शांत मनोरम प्रकृति,बेहद अनुपम सोहे। नद नाले निर्झर बहे,धरा तो हो गई गीली,कुदरत जंचे हरियल सारी,बूटी रंग-रंगीली। वातावरण सुहाना,सावन ऐसा सुखदाई।शिवालयों में … Read more