सावन है मनभावन

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** सावन मन भावन है,खुशियों की हवाएं चले,गीतों की धूम मची,दिलों में कुछ प्यार पले। घटा छा गई नभ में,बिजलियाँ कड़के-दमके,झिरमिर गिरती बूंदें,रिमझिम पायल घमके। चहुँओर सुंदर दृश्य,यकायक ही मन मोहे,शांत मनोरम प्रकृति,बेहद अनुपम सोहे। नद नाले निर्झर बहे,धरा तो हो गई गीली,कुदरत जंचे हरियल सारी,बूटी रंग-रंगीली। वातावरण सुहाना,सावन ऐसा सुखदाई।शिवालयों में … Read more

मिल गया धोखा प्यार में

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)************************************ वो ढूंढता रहा दरों-बाज़ार में,मैं खड़ा रहा उसके दरबार में। मन्नत ख़ुशी की गए थे मांगने,मिल गया धोखा हमें प्यार में। बरसती रही बरखा रात भर,हम बह गए आँसू की धार में। वो लूटते रहे हमदर्द बन कर,हम बंधे रहे रिश्तों के तार में। जो बात करते रहे उजालों की,वो ही छोड़ … Read more

हालात वक्त से ही

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** मिले हालात बन के वक्त से ही,दिए सुख-दुख सभी को वक्त ने ही।यही आगाज ये अन्जाम सबका,कदर मिलती नहीं पर वक्त को ही।मिले हालात बन के… सुखों में लोग इसको भूल जाते,बने दुख तो बुरा इसको बताते।गिला-शिकवा भला किसको लुभाता,मिले रुसवाई तो ये रूठ जाता।बुराई का सिला क्यों वक्त … Read more

मानव संवेदना पाते-खोलते प्रेमचंद

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* कथा सम्राट मुँशी प्रेमचंद जी विशेष…… अमर सदा है लौ आपकी,कथा के सम्राट,मुंशी प्रेमचंद कलम सिपाही हो नमन स्वीकार। हर कृति आपकी मानव संवेदना की आधार,कलम की पैनी धार से कागज रंगा बार-बार। देश समाज की मिट्टी से जुडे़ आप हैं दिनमान,रची सैकडो़ं कहानियाँ दिखाते क्या हो मान। रिश्तों की … Read more

मैं रहूँ न रहूँ

उमा विश्वकर्माकानपुर (उत्तर प्रदेश) **************************************** मैं रहूँ न रहूँ,देश प्यारा रहे,आँसमा में तिरंगा,हमारा रहेआन-बान-शान,ऐसे ही बढ़ती रहे,विश्व में मुल्क अपना दुलारा रहे। तन समर्पित तुम्हें,मन समर्पित तुम्हें,जिंदगी के सभी,पल हैं अर्पित तुम्हेंजब तलक जिस्म में श्वांस है आख़िरी,कतरा-कतरा लहू,इस धरा में बहे। देश के दुश्मनों,ध्यान से तुम सुनो,जाल षड्यंत्र के,तुम जरा मत बुनोअब न पाओगे … Read more

राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी ३१ जुलाई को

दिल्ली। दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा शनिवार ३१ जुलाई की शाम ४ बजे राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन गूगल मीट पर किया जा रहा है। इसका विषय ‘हिंदी के विकास में सरकारी संस्थानों का योगदान’ है। सम्मेलन के उपाध्यक्ष डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप’ नें बताया कि,अध्यक्षता डॉ राम शरण गौड़, (अध्यक्ष, दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी बोर्ड)करेंगे। मुख्य … Read more

सावन तड़पा गया…

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** सावन सावन है दिखा गया,सावन सभी राज बता गया।वो सावन इक गीत लिखे थे,ये सावन उसे बहा गया। वो सावन अश्क पी गया था,ये सावन फिर रूला गया।वो सावन जूही महके थे,ये सावन बू फैला गया। सावन बूंदों की बज़्म सजी,ये सावन सब बिखरा गयावो सावन डूबे थे सर तक,ये सावन क्यों तड़पा … Read more

सावन में तड़प

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** बचपन खोकर आई जवानी,साथ में लाई रंग अनेकदिलको दिलसे मिलाने को,देखो आ गई अब ये जवानीअंग-अंग अब मेरा फाड़कता,आता जब सावन का महीनानए-नए जोड़ों को देखकर,मेरा भी दिल खिल उठता। अंदर की इंद्रियों पर अब,नहीं चल रहा मेरा बसनया-नया यौवन जो अब,अंदर ही अंदर खिल रहातभी तो ये दिल की पीड़ा,अब और … Read more

आन बसे क्यों नदी किनारे ?

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************** मिट्टी का घर कांप रहा है,पानी ढो-ढो थके पनारे।तीखी वर्षा के हमलों से,रोते पाये छान उसारे॥ दुश्मन दिखती तेज हवाएं,बरखा अब दहशत फैलाये,धरती पर पानी ही पानी,डूबे गाँव गली चौबारे॥ नदी क्षेत्र में गाँव हमारा,नीची बस्ती तरफ किनारा,रूह कांपती देख देख कर ,नदिया खड़े हिलोरे मारे। आले-खिड़की सब गीले हैं,गद्दे बिस्तर … Read more

माँ ही चारों धाम

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** रचना शिल्प:१६-११ पर यति, पदांत २,१….. माँ से कोई बड़ा न जग में,चरणन करूँ प्रनाम।माता जग में सुंदर मूरत,माँ ही चारों धाम॥ माँ ही सबसे पहली गुरु है,ममता देती प्यार।दया प्रेम ममता है माता,माँ ही शिशु संसार॥माता ही दौड़े आती है,दु:ख में छोड़े काम।माता जग में सुंदर मूरत,माँ ही चारों धाम॥ … Read more