मन करता है

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** मन करता है हर दिन…एक नई कल्पना लेकर,हृदय में एक नई भावना लेकरहर दिन एक नई कविता लिखूँ। मन करता है हर दिन…नई-नई सी चित्रपट पर,नई तूलिका नये रंग लेकरहर दिन एक नई-सी छवि बनाऊँ। मन करता है हर दिन…प्रीत की भावना मन में लेकर,नयनों में नूतन स्वप्न संजोकरहर दिन नये-नये … Read more

फिरता मैं मारा-मारा

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** पैसे की खातिर मंचों पर,क्यों फिरता मैं मारा-मारा।सब नोट धरे रह जाएंगे,जिस दिन फूटेगा घट प्यारा॥ मैं शहर-शहर में घूम रहा,फिर भी मेरा मन खाली है,ये भूख लगी जो पैसे की,दुर्बल मन की कंगाली है।बाहर से उजियारा दिखता,अंदर से काला धन रिसता,इक रोज साँस की डोरी से,छूटेगा तन का इकतारा,सब नोट … Read more

ऐसे बाँटें उजाला हम…

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** यह दीप ज्योति का त्योहार है,जगमग जगमग दिखता संसार है। नदियों में नहरों में,प्यारी-प्यारी लहरों मेंतैरते दीए देते सुख,लगता बहुत मनोहार है।यह उजाला बाँट कर,जगमगाने और अभिनन्दनकरने का त्योहार है। हम-सब मिलकर एक,पराक्रम दिखाएंराजा हो या कऺगले का घर,ख़ुशी के हम दीप जलाएं। यह दीप पर्व है सुंदर,देता उल्लास-सुख-समृद्धिहमें हर डगर पर,संयुक्त परिवार कीपरम्परा … Read more

पांत-पांत दीप जले

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ पांत-पांत दीप जले,लजा गई रात,श्याम रंग दुलहिन के स्वर्ण सजे गात। दीप-दीप नेह बहे,गेह-गेह स्नेहमहक उठी रजनी की,केसरिया देह।ऐसे में तारों की लेकर बारात,लेने को चाँद बढ़ा अपनी सौगात। ज्योति-ज्योति विहँस-विहँस,लरज झूम-झूमदिखा रही अम्बर को,अम्बर की धूम।जलन लिये अन्तर में खाया-सा मात,झांक-झांक देख रहा घूर कर प्रभात। ऐसी दीवाली की,शोभा अनमोलतेजस्वी दिनकर का,हृदय … Read more

यादों का झ़रोखा

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** ख़्वाबों में थिरकते ये साये मजबूर करें जीने के लिये।ज़िन्दा हूँ फ़कत तेरी खातिर फिर से न तुम्हें खोने के लिये॥ कैसे मैं भुला सकता हूँ तेरी उन प्यारी-प्यारी बातों को,डूबी जो नशे में मदमाती तारों से दमकती रातों को।अब तक मैं तड़पता हूँ हमदम आगोश तेरा पाने के लिये,ख़्वाबों में … Read more

खुशियों की महफ़िल

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* सजी थी चहुँ ओर खुशियों की महफ़िल,उस शहर में कोई भी तन्हा न था। मिल रहे थे अपरिचित भी कुछ इस तरह,अजनबी हैं हम ऐसा आभास न था। बेफिक्री थी गुलाबी चेहरों पे सभी के,ईर्ष्या-द्वेष का कहीं कोई भाव न था। भीगे-भीगे मौसम का लुत्फ़ उठा रहे थे,उदासीनता का नामो-निशां … Read more

है पर्व पुरुषार्थ का

आचार्य गोपाल जी ‘आजाद अकेला बरबीघा वाले’शेखपुरा(बिहार)********************************************* है पर्व पावन पुरुषार्थ का ये,जीत के नव‌ उल्लास काहै दीप देहरी पर सजे,है जीत तम पर प्रकाश की।है अनुपम त्यौहार ये,कार्तिक कृष्णपक्ष के अवसान कायम के पूजन विधान का ये,धनवंतरी के अवतरण का।देव पूजन हेतु दीपदान,है पर्व ये दिव्यार्थ काघोर-कालिमा की अंधियारी रात,पर्व अमावस में जगमग प्रकाश … Read more

अभी रुक जाओ यमराज

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* करती हूँ मैं तुमसे निवेदन,सुन लो आप मेरा क्रंदन,कहना मान जाओ मेरा,पकड़े हूँ मैं आपके चरण। अभी घूम रही हूॅ॑ हे यमराज,मैं माया के बाजार में,ख्वाब टूटे नहीं अभी,खोई हूँ सपनों के बाजार में। लौट के तुम जाओ यम,अभी मिलन की बेला है,अभी बाली उमर है मेरी,प्रेम प्रसंग की ये बेला … Read more

बदले रंग ज़माने के

मधु मिश्रानुआपाड़ा(ओडिशा)******************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… “अरे पप्पू यहाँ गाँव में कुम्हार तो है,शायद हरी नाम था उसका..! उससे ही तो दीदी,दीवाली के लिए दीए और कलश वगैरह लेतीं थीं…फ़िर शहर से ये सब क्यों ख़रीद कर ले आए..?” बरसों बाद उत्तर प्रदेश से आई मौसी ने कार से उतरते हुए पप्पू के थैले … Read more

बड़ी लगन से अन्नकूट पर्व मनाती थीं माँ

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… मेरी माँ श्री श्री नाथजी की पूजा करती थी,इसलिए वे जन्माष्टमी के अलावा दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट पर्व पर बालकृष्ण प्रभु को अर्पित किए जाने वाले छप्पन भोग वाला कार्यक्रम अवश्य करती थीं। वे अन्नकूट पर्व की तैयारी दशहरे के बाद से ही पूरे घर … Read more