जिंदगी की कश्मकश…

विद्या होवालनवी मुंबई(महाराष्ट्र )****************************** जिंदगी की कश्मकश में,हौंसले बुलंद करआगे बढ़ना है,कभी प्यार तोकभी गम बाँटना है। कभी खुशी की आँधी से तो,कभी मुसीबतों केतूफानों से जूझना है,कभी फर्ज के लिए तोकभी धर्म के लिए,कुर्बानियों की चट्टानों को लाँघना है। कभी उम्मीदों की नाव पर तो,कभी नादानी की कश्ती मेंसफर तय करना है,कभी धैर्यता की … Read more

वह परिवार बुरा लगता है़

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ दिन सीमित है निशि सीमित है,सीमित है जीवन धन अपनालेकिन जो बढ़ रहा निरन्तर,वह परिवार बुरा लगता है।मांग बढ़ गई पूर्ति घट गई,कोटि-कोटि जन व्यर्थ हो गएऐसी भीड़ बढ़ी कि हम सब,एकाकी असमर्थ हो गए।भाव न जिसके रहें संतुलित,वह बाजार बुरा लगता है। आमद कम है खर्च अधिक है,चिंता घर-घर बस्ती-बस्तीचीजें कर दीं … Read more

मैकाले की आत्मा

डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप’रानी बाग(दिल्ली)****************************** ‘मैकाले’ तो आम आदमी की तरह वक्त आने पर नश्वर देह को त्यागकर इस संसार से कूच कर गए, परंतु आत्मा तो अजर-अमर है। शरीर से निकलने के बाद वह यमदूतों के साथ चल देती है। ऐसा प्रायः सामान्य आत्माएँ करती हैं। कुछ आत्माएँ असामान्य-असाधारण होती हैं। वे बँधे-बँधाए कायदे … Read more

‘असंसदीय शब्द आचार संहिता’ के सदके..!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** क्या असंसदीय शब्दकोश जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी सौहार्द और शालीनता की इबारत को कायम रख सकेगा ? खास कर तब कि जब आज के जमाने में ‘भाषाई अभद्रता’ को भी ‘बिकाऊ सामग्री’ के तौर पर देखा जाने लगा है। और यह भी कि जब सार्वजनिक आचरण में भी कई बार भद्रता-अभद्रता की … Read more

माँ शीतला कृपा करो

सुजीत जायसवाल ‘जीत’कौशाम्बी-प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)******************************************* कड़ा धाम शीतला माँ दर्शन को,गृह से मैं निकला आज,शक्तिपीठ है यह अद्भुत,जहाँ बनते-बिगड़े हर काजमाँ गंगा तट हैं शोभित,यहां नर-नारी वांछित फल पाते,रोग,दोष,दुःख,दरिद्र हरो माँ,मिटा दो खुजली खाज। हे ममतामयी माँ कृपा करो,है आपकी महिमा न्यारी,शक्ति अंश हो आप ही मइया,चरण जल है हितकारीजब-जब विपदा भक्त पे आये,आपने कष्ट को … Read more

हर बच्चे नित सभ्य सफल जीवन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ****************************************** नवांकुरित नवकिसलय भारत निकुंज,हर बच्चे कलियाँ कुसमित सुरभित हों।चहुँमुखी तरक्की हो जीवन मधुवन,अलिगुंज मुदित रमणीक चमन हों। बच्चे होते निर्माणक नव भविष्य,उन्मुक्त विहंगम विहगवृन्द हों।विद्वेष विरत निश्चल विमल गंगाजल,नव लतिका मृदुला बालक मन हो। नित आगाज़ नया नूतन परिवर्तन,अभिनंदनीय स्वागत हर बच्चे हों।हों कर्मवीर पौरुष बल लक्ष्य पथिक,संयमित धीर … Read more

लौट आओ मुसाफिर

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* उल्टी फेरी मत कीजिए रहोगे हरदम बन के दिन,दु:ख से तपोगे ऐसे,जैसे तड़पती जल बिन मीन। साधु-संत चलते हैं सदा,वह हरदम धर्म की चाल,किसी को कभी कहीं दु:ख ना हो,रखते हैं ख्याल। मित्र मांसाहारी ना बनना,संकट घेरेगा चारों ओर,डूबोगे भवसागर में,तब नहीं मिलेगा अन्तिम छोर। अब भी समझ मानव तू,कहना मेरा … Read more

माँ भारती…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** धन्य-धन्य माँ भारती,कैसे करूँ बखान।जगती को बाँटी सदा,उपकारों की खान॥ जन-जन जीवन एक है,ऐक लहू का रंग।धरती ही परिवार है,सदा बताती गंग॥ माँ सबका पोषण करे,सदा दिखाती राह।खोजे से मिलती नहीं,उपकारों की थाह॥ गंधसार,रज भूमि की,मलयज की है वात।निर्जर भी आकर यहाँ,धारें मनु की गात॥ सुधामई माँ भारती,जीवन का है सार।उपकारों का … Read more

उलझनें सुलझा दे

अभिजीत आनंद ‘काविश’बक्सर(बिहार)******************************************* ए साकी इस मर्ज की कोई दवा दिला दे,मिट जाएं सारे दर्द आज ऐसा कोई पैमाना पिला दे। ग़म भुलाने खातिर पीने तो शहर आता है यहां,पीकर दर्द उभर आए आज ऐसा कोई मयखाना बता दे…। लेखनी की स्याही सूखी पड़ी आज मेरी,दवात की जगह आज फकत जाम पिला दे। तेरे जुल्फों … Read more

कठिनाई

डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’रायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************* कठिनाई के बाद भी,जो रण लेते जीत।सर्व खुशी उनको मिले,सबके बनते मीत॥ आती-जाती मुश्किलें,करे तुम्हें तैयार।घबराना मत तू कभी,जीत मिले या हार॥ कठिन परिश्रम कर चलें,आए जीवन काम।ध्येय लक्ष्यता को धरें,संचित कर्म तमाम॥ कठिन परीक्षा की घड़ी,देखो आई आज।लड़ने को तैयार हूँ,मुझे स्वयं पर नाज॥ जो करता है सामना,कठिन समय के … Read more