हरीतिमा हर दिशा

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ********************************** रचनाशिल्प:मात्राभार -२८(१६/१२),यति-२२ वर्षा आई रिमझिम-रिमझिम,ले आई हरियाली।सावन के स्वागत में देखो,झुकी फलों से डाली॥ घटा घनन-घन घिर-घिर आए,चम-चम चपला चमके।झम-झम झरती झर-झर वर्षा,दामिनी दम-दम दमके।हरीतिमा हर दिशा सुहाई,बहता जल नद-नाली।सावन के स्वागत में देखो,झुकी फलों से डाली॥ शैल सुहाने सुंदर शिखरों,से झर-झरने झरते।मधुर मनोहर मोहक मंगल,मधुबन मधुरस भरते।बनी वाटिका विमल बिरंगी,मधु … Read more

तुम प्रतिध्वनि उठाते हो

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. अगर मैं गीत गाती हूँ,तो तुम प्रतिध्वनि उठाते होतुम्हारी याद के गायन,तुम्हीं मुझको सुनाते हो। मुझे लगता कि तुमको भी,मेरी यादें सताती हैंइसी से गीत की कड़ियाँ,लौट हर बार आती हैं।सदा तुम गीत को मेरे,गीत अपना बनाते हो। मैं गा-गाकर बुलाती हूँ,नहीं तुम पास में आतेतुम्हारे ये अपरिचित … Read more

पल्लवित रिश्ते

सुखमिला अग्रवाल ‘भूमिजा’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************* विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. हो अपनेपन की मिठास,पल्लवित होते हैं रिश्ते,मधुर सौम्य वातावरण में ही,खिलते हैं प्यारे रिश्ते। जहां मधुर हो संबंधों का ताना-बाना,उन परिवारों में रहता है समय सदा सुहाना। आपस में सौहार्द पूर्ण रहते हैं जहां हिल-मिलकर,वो बगिया खिली-खिली,खुशियां रहती है मण-मण भर। खुशी का टॉनिक पाकर रिश्ते भी … Read more

चलो प्रेम-सौहार्द बढ़ाएं

मनोरमा जोशी ‘मनु’ इंदौर(मध्यप्रदेश)  ***************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. चलो प्रेम सौहार्द बढ़ाएं,सबको अपना बनाकरनए जगत में नई कल्पना,आओ हम साकार बनाएं।हृदय-हृदय प्रेम दीप जलें,अंतर का अज्ञान मिटा देंनयन-नयन में प्रेम-सौहार्द,की जोत जला दें।सबको दें विश्वास लक्ष्य का,और सतत चलने का साहसज्योति ऐसी भरें जीवन में,कभी न आए गहन अमावस।जड़ चेतन करें मूक में,वाणी भर … Read more

अंतर मन से श्रेष्ठ बनें

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. अंतर मन से श्रेष्ठ बनें तब,होगा जग कल्याण।सत्य पथिक नित बनना होगा,तब संभव है त्राण। हृदय बसाएँ प्रेम भाव को,नित आएँ यह काम,मानवता की राह चले सब,कर लें जग में नाम।द्वेष कपट का भाव त्याग दो,कहते वेद पुराण,अंतर मन से श्रेष्ठ बनें तब,होगा जग कल्याण…॥ दीन-दुखी … Read more

कितना अच्छा होता…

असित वरण दासबिलासपुर(छत्तीसगढ़)*********************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. कितना अच्छा होता…प्रकाश और अंधकार की तरह,एक-दूजे को जाने बिनाएक-दूजे के पास-पास होना। हर मौसम के हैं अलग रंग,हर बादल का है अलग मन..अच्छा होता कितना,बारिश के रंगों कावसंत के रंगों में घुलते जाना,और हेमंत का रंगयूँ ही अनायास पा जाना। जब हम मौन होते हैंएक-दूजे के … Read more

ओ प्यारी सखी

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. चल सखी,कुछ अधूरी बातें करते हैं,हृदय के इस खालीपन कोयादों से लबरेज करते हैं।चल कुछ अधूरी बाते करते हैं… इतने सालों की खमोशी कोकुछ पलों में भरते हैं,चल अपने बचपन को जीते हैंफेंकी हुई नावों को फिर से,समेट करबरसात के पानी पर फिर,चलाते हैं।चल कुछ अधूरी … Read more

अब के बरस…

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. बादल सौहार्द छाये,प्रेम वर्षा बरसाये।घृणा द्वेष धूल जाए,बरखा वो चाहिये।छतरी नेह ओढ़ के,भरोसे फूल तोड़ के।ईष्या कीच छोड़ के,भीगते भिगाईये। दया की छप-छपाक,बढ़े जल दान बाढ़।हिंसा-अन्याय की गाज दुनिया बचाईये।बिजली अत्याचार की,त्रास न फटे बदली।हरी घास उल्लास की,मन में उगाईये। पपीहा सद्भाव की,चातक लगाव की।पौधे प्यार छाँव वाली … Read more

सम्बन्ध-बंधनों से परे

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. सम्बन्ध शब्द का क्या अर्थ होता है ?… ‘सम्यक्’ का अर्थ पूरी तरह से,चारों ओर से अथवा परिपूर्ण। अर्थात सम्बन्ध शब्द का अर्थ होता है, ‘चारों ओर से बंधन’,’सब प्रकार से बंधन’ अथवा ‘परिपूर्ण बंधन।’संसार में माता-पिता,भाई-बहन,जीजा,दामाद,बाप-बेटी,माँ-बेटी आदि) को हम लोग सम्बन्धी (रिश्तेदार,नातेदार) कहते हैं।हर … Read more

चेतना को विकसित करने की प्रक्रिया ‘योग’

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)********************************************* २१ जून विश्व योग दिवस विशेष…. जिस भी जीव को शरीर मिला है,उसको स्वस्थ्य बनाने के लिए कुछ न कुछ शारीरिक मानसिक क्रियाएं करना पड़ती हैं और क्रियाहीन जीवन मृत हो जाता है। सब जानवर,पशु-पक्षी अपनी विशेष क्रियाएं करते हैं,यह उनमें नैसर्गिक गुण होता है। मानव में मन विशेष होने और बहुत चंचल … Read more