अफगानिस्तान:भारत व पाक की चुप्पी!

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* ऐसा लग रहा था कि अफगानिस्तान में हमारे राजदूतावास और वाणिज्य दूतावासों को कोई खतरा नहीं है,लेकिन हमारा कंधार का दूतावास खाली हो गया। ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान के उत्तरी और पश्चिमी जिलों में तालिबान का कब्जा बढ़ता जा रहा है। तालिबानी हमले का मुकाबला करने की बजाय लगभग १ हजार … Read more

स्वर्णिम भविष्य के लिए आबादी नियमन बेहद जरुरी

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)************************************** सम-सामायिक चिंतन…. भारत एक लोकतान्त्रिक देश है, जहाँ समस्यायों का भण्डार है। कोई भी नियम- कानून बनाने में सरकारों को पसीना आ जाता है,कारण ‘पिंडे पिंडे मतिर भिन्ना’ क्योंकि यहाँ जनतंत्र है और सबको बोलने की स्वतंत्रता के साथ स्वच्छंदता है और उसके बाद न्यायालीन सुव्यवस्था का होना। अभी कुछ दिनों में बाल … Read more

सावन आया अब आओ

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* रिमझिम बदरा बरस रहे हैं,सावन आया अब आओ,आकुल है मन तुमसे मिलने,मधुर सलिल रस बरसाओ। छम-छम करती बूंदे बरसे,नृत्य धरा पर दिखलाए,गर्जन करते मेघ साथ में,जैसे पावक दहकायेआ जाओ अब प्रियतम प्यारे,प्रीत व रीत सिखा जाओ,रिमझिम बदरा बरस रहे हैं,सावन आया अब आओ। झूला झूले आमा डाली,कोयल गीत सुनाती है,रंग-बिरंगी तितली आकर,मेरा … Read more

मुझे मत यूँ सताओ तुम

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचनाशिल्प:क़ाफ़िया-आओ,रदीफ-तुम, बहर १२२२,१२२२,१२२२,१२२२ मिरे जज़्बात को समझो मुझे मत यूँ सताओ तुम,रहो मुझसे ख़फ़ा लेकिन न मुझसे दूर जाओ तुम। गुज़ारी साथ हमने ज़िन्दगी वादे किये कितने,तुम्हारा फर्ज़ है अपने किये वादे निभाओ तुम। नहीं कोई गिला-शिकवा ज़ुबां पर अब तलक आया,हुई हो ग़र ख़ता कोई उसे अब भूल जाओ तुम। … Read more

सूरज आग उगलता है

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** सूरज आग उगलता है,वह सिर पर ईंटें ढोती है,अपने दुधमुँहे शिशु को वो,बजरी के ढ़ेर पे रखती है।माथे से पसीना बहता है,परवाह न उसकी करती है,बच्चों को पालने की खातिर,वह कितनी मेहनत करती है। मजदूर उसे कहते हो तुम,मजदूर नहीं-एक माँ है वो,बच्चों को पालने की खातिर श्रम साध्य कार्य करती है … Read more

आओ खुशियाँ बांटें

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** खुला दिल रखो जग में,तनिक रखो न गांठें,बार-बार ना मानव जीवन,आओ खुशियाँ बांटें। खेल-खेल में कटे जिंदगी,समझो अच्छी बात,क्या लाए ले जाएंगे,कछु चलेगा नहीं साथ। आते खाली हाथ सभी,जाते खाली हाथ है,चार दिन ये चाँदनी,फिर वही अंधेरी रात है। प्रेम पसारो प्रेम पाओ,अपनापन पनपाओ,हिलमिल हेत-प्रेम से रहो,सबका साथ निभाओ। प्रेम-सौहार्द कायम … Read more

गीत खुशी के गाएंगे

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** रचनाशिल्प:मात्रा भार-३०- यति-१६,१४-पदांत-२२२…. गीत खुशी के गाएंगे हम,मिलकर साथ निभाएंगे।जन-मन को अभिनंदन करके,सबको साथ मिलाएंगे॥ आज खुशी के अवसर पर सब,मिलजुल कर के गाएंगे।एक-दूसरे का सुख-दु:ख हम,आपस कहते जाएंगे॥बाँटेंगे यह प्रेम परस्पर,खुशी के फूल खिलाएंगे।जन-मन को अभिनंदन करके,सबको साथ मिलाएंगे॥ गीत खुशी के गाएंगे हम,मिलकर साथ निभाएंगे।जन-मन को अभिनंदन करके,सबको साथ … Read more

‘जीवनदात्री’ कहलाती है सिर्फ़ स्त्री…

डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* स्त्री तुम महान हो,सब गुणों की खान होमाँ की ममता हो,बेटी की निश्छलता होपत्नी का प्यार हो,बहन का दुलार होमुसीबत में बलवान हो,होंठों की मुस्कान होईश्वर का वरदान हो,स्त्री तुम महान हो। जीवन का आधार हो,देती नया मुक़ाम होघर का अभिमान हो,सुख की ठंडी छाँव होअन्नपूर्णा का रूप हो,दुर्गा-काली का … Read more

मीरा की भक्ति

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************** थी दीवानी श्याम की,मीरा जिसका नाम।जो युग-युग को बन गई,हियकर अरु अभिराम॥ पिया हलाहल,पर अमर,पाया इक वरदान।श्रद्धा से तो मिल गई,जीवन को नव आन॥ लोक लाज को तज हुई,मीरा भक्तिन रूप।खिली हृदय पावन-मधुर,मीठी-मोहक धूप॥ मीरा खोई श्याम में,श्याम बने मनमीत।नहीं हरा पाया उसे,मीरा पाई जीत॥ इकतारा लेकर सजी,मीरा मंदिर ख़ूब।नाची,गाई,मस्त … Read more

कुछ टूट रहा है परिवारों में

तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** बंट रहे हैं आजकल रिश्तेस्वार्थ की दीवारों में,ऐसा लगता है जैसे कि-शायदकुछ टूट रहा है परिवारों में। नहीं रहा वो अपनापनरिश्तों में रहती अनबन,झांक रही हैं संवेदनहीनताघर में आई दरारों में,लगता है ऐसा जैसे कि-शायदकुछ टूट रहा है परिवारों में। कड़ी मेहनत से घर बनायाप्यार से फिर इसे सजाया,ईंट-ईंट बंट गईबच्चों के … Read more