सिपहसालार बनना है
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचनाशिल्प:क़ाफ़िया-आर,रदीफ़-बनना है;बहर-१२२२,१२२२,१२२२,१२२२ हमें अपने वतन का सच्चा पहरेदार बनना है।कटा दे एक पल में सर वही किरदार बनना है। सँभाले वार सीने पर अडिग चट्टान जैसे हो,हिमालय की तरह हमको वही गिरिनार बनना है। नहीं पाये कोई छूने ये माटी भारती माँ की,उड़ा दे शीश दुश्मन का वही तलवार बनना है। … Read more