बचाई तितलियाँ हमने

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* सदा नफरत की लहरों पर उतारी कश्तियाँ हमने।ठिकाना जल गया बेशक बचाई बस्तियाँ हमने। जहाँ बेहाल जीना हो गया था सख्त कलियों का,जले थे हाथ बेशक पर बचाई तितलियाँ हमने। हवा बेदर्द होकर कर के अगर दीपक बुझाती थी,रखी थी बादलों से कुछ चुराकर बिजलियाँ हमने। जमी थी धूल रिश्तों पर … Read more

राजनीति महज ‘भविष्य’ या वैचारिक संघर्ष का मंच ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और दल में ब्राह्मण चेहरा रहे जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर कांगेस नेता शशि थरूर ने एक सवाल उठाया था कि क्या राजनीति विचारविहीन भविष्य (कॅरियर) हो सकती है ? क्या सियासी दल बदलने से व्यक्ति की वैचारिक प्रतिबद्धता भी आईपीएल में दल … Read more

बादल

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ काले बादल छा गये,नभ में चारों ओर।घूम रहे पक्षी सभी,बच्चें करते शोर॥ शीतल चलती है हवा,तन-मन भी मुस्काय।बूँद-बूँद बरसे जमीं,मन हर्षित हो जाय॥ सुंदर दिखते बाग हैं,लहराते हैं फूल।बारिश बूँदें देख कर,पत्ते जाते झूल॥ छायी सावन की घटा,आयी है बरसात।सोचे मानव देख कर,कैसे बीते रात॥ सूखे सूखे वृक्ष के,मन … Read more

मुझे पत्थर ही रहने दो

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* मत छुओ मुझेमुझे पारस नहीं बनना,मैं पत्थर ही सही हूँ। पारस बनकर,मैं अहंकार में भर जाऊंतिजोरी या संदूक में बंद,अस्तित्वहीन मैं हो जाऊंमन ही मन में इतराऊं।इससे अच्छा,मुझ पत्थर को पत्थर ही रहने दोमैं पत्थर ही सही हूँ। किसी कामिनी,मानिनीया वैरागिनी के पैरों तले,आह या वाह कीसार्थकता बनूं।नदी के किनारे,नाव से उतरते-चढ़ते,किसी … Read more

घर-आँगन प्रेम बरखा

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** रचना शिल्प:मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२,पदांत-रहे;सामंत-आते छाए मेघा प्रेम की विश्वास गहराते रहे,पात चमकीली बहारा बूंद ठहराते रहे। क्यारियों दिल बीच एहसास के पौधे लगा,सींच शीतल बोलियाँ फौहार बिखराते रहे। नयन नौका पाल खोलो आंधियां अनुराग की,ज्वार आये प्यार सागर और लहराते रहे। पिंजरे पर नेह दाने हो भरे इतने सदा,छोड़ उड़ने मन … Read more

मेरी दृष्टि में कबीर:सीधे चोट की भ्रांतियों पर

नमिता घोषबिलासपुर (छत्तीसगढ़)**************************************** ‘कबीर मन निर्मल भया,ज्यो गंगा की नीर।पीछे पीछे हरि फिरै,कहत कबीर कबीर।”कबीर दास जी ने अपने दोहों के माध्यम से समाज में व्याप्त भ्रान्तियों,अंध विश्वासों,कुरीतियों पर सीधे चोट की। उन्होंने ब्राह्मणवाद पाखंडी एवं कर्मकांड की आलोचना की,वहीं मूर्ति पूजा पर भी उन्होंने कटाक्ष किया,जिसे उक्त दोहे के माध्यम से लिखा गया-‘पत्थर पूजे … Read more

सिपहसालार बनना है

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचनाशिल्प:क़ाफ़िया-आर,रदीफ़-बनना है;बहर-१२२२,१२२२,१२२२,१२२२ हमें अपने वतन का सच्चा पहरेदार बनना है।कटा दे एक पल में सर वही किरदार बनना है। सँभाले वार सीने पर अडिग चट्टान जैसे हो,हिमालय की तरह हमको वही गिरिनार बनना है। नहीं पाये कोई छूने ये माटी भारती माँ की,उड़ा दे शीश दुश्मन का वही तलवार बनना है। … Read more

माँ पर दी सुंदर रचनाओं की प्रस्तुति

काव्य गोष्ठी…. मंडला(मप्र)। अखिल भारतीय साहित्य सदन की ऑनलाइन मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी अखिल भारतीय साहित्य सदन के राष्ट्रीय अध्यक्ष-संस्थापक डॉ. रामनिवास तिवारी ‘इंडिया’ की दिवंगत माता श्रीमती जगतारिणी देवी की स्मृति में आयोजित की गई।इस गोष्ठी की अध्यक्षता शेखर रामकृष्ण तिवारी (अबूधाबी) ने की। शुभारंभ डॉ. तिवारी के स्वागत उद्बोधन … Read more

योग भगाए रोग

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* योग से बनता है मानव शरीर स्वस्थ आकार,योग एक है जीवन की पद्धति स्वास्थ्य का आधार।योग से निर्मित होता तन-मन और मस्तिष्क भी सुदृढ़-तभी तो हम कर सकते हैं हर जीवन स्वप्न साकार॥ भोग नहीं योग आज की बन गया एक जरूरत है,रोग प्रतिरोधक क्षमता से ही जीवन बचने की सूरत है।छह … Read more

नशे से जन-धन की घोर हानि

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस-२६ जून विशेष…. नशा एक ऐसी बुराई है,जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देती है। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित है। सरकार इन पीड़ितों को नशे के चुंगल से छुड़ाने … Read more