कोमल मन नारी

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* (रचना शिल्प:७ भगण (ऽ।।) + गुरु से यह छन्द बनता है,१०,१२ वर्णों पर यति होती है। इसमें वाचिक भार लेने की छूट नहीं है। मापनी- २११ २११ २११ २,११ २११ २११ २११ २) कोमल है मन नारि सदादृढ़ता पर अद्भुत है इसकी।संकट से घबराय नहीं,रहती यह नार प्रिया सबकी॥शक्ति यही कहलाय … Read more

प्यार के किस्से

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) ***************************************** प्यार के क़िस्से हमारे जिन ख़तों में क़ैद हैं।ख़त वो सारे अब हमारी फ़ाइलों में क़ैद हैं। बोलबाला जुर्म का है मुजरिमों की ‘भीड़ है,कौन कहता है के हम अपनी ह़दों में क़ैद हैं। भूख तारी,प्यास ग़ालिब,बेसरो सामां हैं हम।कितनी दुश्वारी से हम अपने दरों में क़ैद हैं। एक ख़ालिक़ ‘एक … Read more

सुध खो देती हूँ

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* जब-जब बजाते कृष्ण बाँसुरी,गृहकार्य नहीं कर पाती हूँ,जब सुनती हूँ बाँसुरी की मधुर धुन,मंत्रमुग्ध हो जाती हूँ। ओ मनमोहना श्री कृष्णा काहे को बाँसुरीया बजाते हो,घर में मन नहीं लगता है,पिया से तुम कलह करवाते हो। क्यों बाँसुरी की धुन सुना के मुझे जमुना तट बुलाते हो,मन बावरी हो जाता है,जब … Read more

मेरी संवेदनाएं

असित वरण दासबिलासपुर(छत्तीसगढ़)*********************************************** मेरी संवेदनाएं गहरी झील में तैरतेउस कमल की तरह विकसित नहीं हो पाती,जिसने देखा हो रातभरखामोश कुहरों का जुल्म,और देखा हैओस की बूंदों का सामूहिक जन्म।फिर भी,रात की परतों में से उभरतेऊष्माहीन सूरज की प्रभा लिए,मेरा अंतर्मन ढूंढता फिरता हैप्रेम की हर परछाईं को,ढूंढता है ठहरावपाना चाहता है एक नमी,सूखी रेत की … Read more

बढ़ता प्रदूषण,बढ़ता संकट

रोहित मिश्रप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** आज के आधुनिक युग में जैसे-जैसे लोगों की जरुरत बढ़ती जा रही है,वैसे-वैसे ही पर्यावरण पर लोगों की आकांक्षाओं का भार भी बढ़ता जा रहा है। नित नई सुख-सुविधाओं की चाहत में लोग उत्पादन साम्रग्री के दुष्प्रभाव से अनजान होकर उभोक्ता की भूमिका में पर्यावरण को संकट ग्रस्त कर रहे हैं।आज ऐशो-आराम के … Read more

सुखद अनुभव

उमेशचन्द यादवबलिया (उत्तरप्रदेश) ***************************************** ‘कोरोना’ महामारी की वजह से पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है। अधिकांश लोग बेरोजगार हो गए हैं,मैं भी इसी श्रेणी में हूँ। मैं अपने गाँव में परिवार और मित्रों के साथ जीवन व्यतीत कर रहा हूँ। एक दिन की बात है। घर बैठे-बैठे ऊब रहा था तो सोचा कि चलो खेतों … Read more

मुश्किल हुई

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** हमसफर यूँ अब मेरी मुश्किल हुई।राह जब आसां हुई,मुश्किल हुई। हम तो मुश्किल में सुकूं से जी लिए,मुश्किलों को पर बड़ी मुश्किल हुयी। ख्वाब भी आसान कब थे देखने,आँख पर जब भी खुली,मुश्किल हुई। फिर अड़ा है शाम से जिद पे दीया,फिर हवाओं को बड़ी मुश्किल हुई। वो बसा है जिस्म … Read more

चलो हम भरें उड़ान

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)************************************* दूर बहुत,दूर खड़ी है वह-बर्फ से आच्छादित पहाड़,बुला रहा है हमेंदोनों बाहु फैलाकर।चलो हम उड़ान भरें-उमंग के रंग मन के पंख मेंयहाँ नहीं होगा शोर सागर का-नहीं होगी तरंगों की चंचलता।नहीं होगी विपुलता रेत की-जहाँ रहेंगे तरुण प्राण हरियाली केरंग-बिरंगे फूलों की झाड़ियों होंगी-होगी रंगीन तितलियों की चंचलता।हमारे मन में भी … Read more

‘सौहार्द’ के नए रंग दिखाकर दीपाली गुंड व ज्ञानवती सक्सेना प्रथम विजेता घोषित

मासिक प्रतियोगिता…. इंदौर। देश की संस्कृति को सहेजने,लेखकों को प्रोत्साहन और मातृभाषा हिंदी के सम्मान की दिशा में हिन्दीभाषा डॉट कॉम परिवार के प्रयास सतत जारी हैं। इसी निमित्त ‘सौहार्द’ विषय पर स्पर्धा कराई गई,जिसमें क्रमशःदीपाली अरुण गुंड(गद्य) व ज्ञानवती सक्सेना ‘ज्ञान’ प्रथम (पद्य)विजेता घोषित किए गए हैं। ऐसे ही द्वितीय विजेता का सौभाग्य अल्पा … Read more

कश्मीर पर सार्थक संवाद हुआ

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* जम्मू-कश्मीर के नेताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवाद काफी सार्थक रहा। इसे हम एक अच्छी शुरुआत भी कह सकते हैं। २२ माह पहले जब सरकार ने धारा ३७० हटाई थी और इन नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था,तब और अब के माहौल में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। जब इस … Read more