सिपहसालार बनना है

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचनाशिल्प:क़ाफ़िया-आर,रदीफ़-बनना है;बहर-१२२२,१२२२,१२२२,१२२२ हमें अपने वतन का सच्चा पहरेदार बनना है।कटा दे एक पल में सर वही किरदार बनना है। सँभाले वार सीने पर अडिग चट्टान जैसे हो,हिमालय की तरह हमको वही गिरिनार बनना है। नहीं पाये कोई छूने ये माटी भारती माँ की,उड़ा दे शीश दुश्मन का वही तलवार बनना है। … Read more

माँ पर दी सुंदर रचनाओं की प्रस्तुति

काव्य गोष्ठी…. मंडला(मप्र)। अखिल भारतीय साहित्य सदन की ऑनलाइन मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी अखिल भारतीय साहित्य सदन के राष्ट्रीय अध्यक्ष-संस्थापक डॉ. रामनिवास तिवारी ‘इंडिया’ की दिवंगत माता श्रीमती जगतारिणी देवी की स्मृति में आयोजित की गई।इस गोष्ठी की अध्यक्षता शेखर रामकृष्ण तिवारी (अबूधाबी) ने की। शुभारंभ डॉ. तिवारी के स्वागत उद्बोधन … Read more

योग भगाए रोग

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* योग से बनता है मानव शरीर स्वस्थ आकार,योग एक है जीवन की पद्धति स्वास्थ्य का आधार।योग से निर्मित होता तन-मन और मस्तिष्क भी सुदृढ़-तभी तो हम कर सकते हैं हर जीवन स्वप्न साकार॥ भोग नहीं योग आज की बन गया एक जरूरत है,रोग प्रतिरोधक क्षमता से ही जीवन बचने की सूरत है।छह … Read more

नशे से जन-धन की घोर हानि

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस-२६ जून विशेष…. नशा एक ऐसी बुराई है,जो हमारे समूल जीवन को नष्ट कर देती है। नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति परिवार के साथ समाज पर बोझ बन जाता है। युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा नशे की लत से पीड़ित है। सरकार इन पीड़ितों को नशे के चुंगल से छुड़ाने … Read more

आत्म मनुज सौन्दर्य ही जीवन उपहार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *************************************** बने सेतु ख़ुशियाँ मनुज,करें प्रकृति सुखसार।खिले सुमन सुरभित वतन,रोपण तरु उपहार॥ आत्म मनुज सौन्दर्य ही,जीवन का उपहार।सुरभि हीन किंशूक कुसुम,बाह्य रूप सुखसार॥ दो दिल का अनुपम मिलन,रचना नव संसार।सुख-दु:ख गम खुशियाँ सकल,है विवाह उपहार॥ सुन्दर तन-बन गुलवदन,सज षोडश श्रंगार।चपला नटखट चातुरी,प्रिय पायल उपहार॥ छह ऋतुओं में प्रकृति सज,विविध रूप … Read more

दिल कहीं लगता नहीं

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** सीने से लगाकर तुमसे बस इतना ही कहना है,कि मुझे जिंदगीभर तुम अपनी बाँहों में रखना। मेरी साँसों में तुम बसे हो,दिल पे तुम्हारा नाम लिखा है,मैं अगर खुश हूँ मेरी जान,तो ये एहसान तुम्हारा है। मुझे आँखों में हरपल तेरी ही,एक तस्वीर दिखती रहती है,दिल दिमाग पर तू ही तू,हर पल … Read more

डोलियाँ बरसात की आने लगी

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* धूप के डेरे उठे अब गाँव से,डोलियाँ बरसात की आने लगी। चल पड़ी देखो हवायें सिंधु से,शुष्क मौसम अब रसीला हो गया।मेघ नगपति शीश टकराने लगे,चोटियों का गात गीला हो गया।रंग धरती का हरा होने लगा,आसमां में नित घटा छाने लगी।धूप के डेरे उठे अब गाँव से,डोलियाँ बरसात की आने लगी…॥ … Read more

प्रो.शरद खरे को ‘योग साहित्य शिरोमणि’ सम्मान

मंडला(मप्र)। अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ‘योग और जीवन पुस्तक’ का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें प्रो.(डॉ.) शरद नारायण खरे को ‘योग साहित्य शिरोमणि सम्मान-२०२१’ से अलंकृत किया गया।इस पुस्तक में योग पर केन्द्रित श्रेष्ठ ५० आलेख प्रकाशित हैं,जिनमें इतिहासकार-प्राध्यापक डॉ. खरे का शोध आलेख(अनेक … Read more

गृहलक्ष्मी के चरण

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** वंदन होता जहां ज्योति का,रहता अमर प्रकाश वहीं।जहां नारियों का पूजन है,देवों का आवास वहीं॥ गृह लक्ष्मी के चरण जहां हैं,ममता का मधुमास वहीं।करुणा,समता,शुचिता,मृदुता,प्रभुता का आभास वहीं॥ घर-घर मिलती दिव्य-भावना,क्षमा,शांति नारी से ही।सुख के सुमन और फल मिलते,केवल इस क्यारी से ही॥ पत्नी है वह स्रोत,जहां से,स्रवित सदा समरसता है।पत्नी है वह … Read more

बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद…!

रोहित मिश्रप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** बात लगभग २०१० की है,जब मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में परास्नातक करने के लिए प्रवेश लिया। उस समय मैं बकायदा ढीली शर्ट और सामान्य पेंट पहनता था। ढीली-ढाली शर्ट पैंट पहनकर बकायदा गले में सफेद अंगौछा डालकर महाविद्यालय जाया करता था। मैंने शहर के ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबंधित महावीर प्रसाद … Read more