तुमसे गले मिल जाऊँ…

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. बहार बन के आओ मैं फूल-सी खिल जाऊँ।झूमूँ मैं डाली बनकर तुमसे गले मिल जाऊँ॥ तुम देखो मुस्कुरा कर अपना मुझे बना कर,चेहरे से उम्र भर मैं कभी नजरें नहीं हटाऊँ। क्यूँ मुझको ताकते हो आँखों में झाँकते हो,कोई बात भी नहीं फिर भी मैं … Read more

सौहार्द जीवन का सार

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. सौहार्द स्नेह भाव रहे सदा ही जीवन देखिए,माँ की ममता का आँचल पिता का प्रेम देखिएबहना-भाई स्नेह शक्ति है गुरु स्नेह शिक्षा ज्ञान,प्रेम स्नेह सिंचित हृदय जीवन का सार देखिए। सौहार्द संग विश्वास दिलासा मन में देखिए,संकट की घड़ी में स्नेह ही है प्रकाश देखिएरोड़ों … Read more

प्यार का एहसास

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)************************************* विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. जोड़ी,प्यार और सम्पर्क को-आसान नहीं है समझ पाना,सिर्फ माया के साथ माया-जैसे धूप और छायाधूप है तो छाया भी-धूप नहीं तो छाया कहीं भी नहीं!बारिश की फुहार,हवा के साथ-जैसे साथी पकड़े हुए हाथ।दोस्ती हो तो हो ऐसा ही-जो जीवन मे लाएंगे खुशियों की लहरें,देखो न दोनों … Read more

प्रेम की भाषा

डॉ.पूर्णिमा मंडलोईइंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. कई सालों से माता-पिता चारु से शादी करने को कह रहे थे,परंतु चारु शादी करने के लिए तैयार नहीं हो रही थी। चारु ३२ वर्ष हो चुकी थी। उम्र बढ़ने के साथ-साथ माता-पिता की चिंता भी बढ़ती जा रही थी।अचानक एक दिन चारु के ऑफिस में उसके … Read more

माटी का पुतला

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* आओ मिल के करें विचार हम माटी का हैं पुतला,प्रभु बनाए हैं,जीवों में,जीवन मानव का पहला। काहे का गुमान,भाई काहे करते हम सब अभिमान,भगवान बनाए हैं हम सभी को,माटी का सामान। माटी का पुतला नदी किनारे का,कहाता है मेहमान,फिर काहे करता है सब,माटी के पुतले पर गुमान। चार दिन की जिंदगी … Read more

जिंदगी किराए का घर

आदर्श पाण्डेयमुम्बई (महाराष्ट्र)******************************** जिंदगी के गीत को हम गुनगुनाते हैं,मुश्किल छोटी हो या बड़ी,हम गुजारते हैं। जिंदगी मेरा सिर्फ किराए का घर है,यकीन मानो ईश्वर के हम किरायेदार हैं। ब्रह्मा जी लेकर बैठे हैं जो पोथी और पत्रा,किरायेदारों का उसी में होता है लेखा-जोखा। मुश्किल भरी जिंदगी को आसान करो अब,खाली हाथ आए हैं हम,खाली … Read more

वो कहीं रूठ न जायें..

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** इस बात का डर है,वो कहीं रूठ न जायेंIनाजुक से हैं अरमान मेरे,कहीं टूट न जायें। फूलों से भी नाजुक है,उनके होंठों की नरमी,सूरज झुलस जाये,ऐसी साँसों की गरमी।इस हुस्न की मस्ती को,कोई लूट न जाये,इस बात का डर है,वो कहीं रूठ न जायें…॥ चलते हैं तो नदियों की, अदा साथ ले … Read more

भोलापन

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ भोलापन का लिये चेहरा,घूम रहे सब लोग।गलती सभी छुपाकर बैठे,बढ़ जाते फिर रोग॥ समझ न पाये कोई जग में,चलते अपने चाल।पीछे पीठ चलाते गोली,फिर पूछे क्या हाल॥ भोले-भाले बनते सारे,कोई समझ न पाय।अपने ही जब दुश्मन निकले,देख सभी डर जाय॥ विडम्बना ये कैसी आयी,मानव बदले रंग।खुशियाँ सारी लुट गयी … Read more

कभी सोचा न था…

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* तुम्हारी राह देखते-देखते,पथरा जाती थीं जो आँखेंउन्हीं में अश़्क भर दोगे,कभी सोचा न था…। ख़्याल भी न आया कभी,होनी है जुदाई इक दिनतुम यूँ दूरियाँ बना लोगे,कभी सोचा न था…। पहले तुम्हें पाने की खुशी,अब अजनबी होने का गमबेरूखी का ऐसा आलम,कभी सोचा न था…। चले थे जो कदम हम-साथ,दस्तक … Read more

सच्चाई जान कर के चलो

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ वक़्त को स्वीकार कर के चलो।जीत नहीं,हार मानकर के चलो। गरज ख़त्म हुई अपने बेगाने हुए,तक़ाज़ा उम्र का काम कर के चलो। तुमने भी ख़ुशहाली देखी थी कभी,बेटे के सामने सर झुकाकर के चलो। जवानी में सब राज चलाते रहते हैं,चुप रहो ख़ुदा को ताक कर के चलो। सबका वक़्त आता और चला … Read more