चाँद तुम महफ़ूज़ हो…

ऋचा सिन्हानवी मुंबई(महाराष्ट्र)************************************* चाँद तुम महफ़ूज़ हो,बादलों की गोद में,करवा चौथ,ईद का चाँद औ अपनी मोद में। ना तुम्हारे कोई घूँघट,ना कोई चिलमन,चाँदनी संग रास रचाते,छुपते ग्रहण बन। ना तुम्हारा धर्म है,और न कोई मज़हब,ख़ुशबू बन बिखरे हुए,मोहब्बतों में ग़ज़ब। गीत-ग़ज़लों में खिले,और कवियों की शान,तुमको अपनी सूरत पर,इतना क्यूँ गुमान। अच्छा है जो यहाँ … Read more

पहेली समझ नहीं आती

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ जीवन पहेली समझ में नहीं आती।कैसी है अलबेली समझ में नहीं आती। कितनी ख़्वाहिशें दफ़न हो गई दिल में,इच्छाएँ ज़हरीली समझ में नहीं आती। दिन-रात आते औऱ चले जाते हैं,किरणें रंग रँगीली समझ में नहीं आती। दुनिया के ख़ेमे में है साँसों की सरगम,कब तक सहेली समझ नहीं आती। ‘रेणू’ कहे ग़म के … Read more

राधा का पत्र

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** सर्व हारूँ मैं केशव तेरे लिए,जीत भी न चाहूँ माधव तेरे लिएबसी है राधा तेरी बाँसुरी में,हर लय में बह जाऊँ तेरी प्रीत के लिए। सूखी पड़ी है आस जिया की,बून्द-बून्द तरसूं प्रीत पिया कीविरह है कैसी दरस न होए,तुझको अंखियन देखे बरसों-बरस होए। जानूं मैं कि मुझमें ही तू,मानूं … Read more

विदेश नीतिः हमारी २ नई पहल

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* ढाई महीने से गिरती-लुढ़कती हमारी विदेश नीति अपने पाँवों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है, यह बात विशेष खुशी की है। भारत सरकार को तालिबान से सीधे बात करनी चाहिए,लेकिन नौकरशाहों के लिए कोई भी पहल करना इतना आसान नहीं होता,जितना किसी साहसी और अनुभवी नेता के लिए होता है। … Read more

१४ साल बाद बढ़े मुई ‘माचिस’ के भाव..!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** हैरानी की बात है कि जो माचिस अंधेरे में उजाला करने के लिए जरूरी है और जो आग भी जलाती है,दुनिया में उसके ‘भाव’ मुश्किल से बढ़ते हैं। यूँ इंसान ने चकमक पत्थर से लेकर चुटकी में सुलगने वाली दियासलाई तक का सफर हजारों बरसों में तय किया है,लेकिन ऐसी बहुमूल्य माचिस … Read more

कलम को ऐसी धार मिले,जो सही बात को सही व्यक्ति तक पहुंचा सके

लोकार्पण…. इंदौर। इस आपदा के दौर से यही बात निकलकर आई है कि हमारे हाथ में तलवार न रहे और हमारी कलम को ऐसी धार मिले,जो सही बात को सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचा सके। यह पुस्तक निश्चित ही समाज को प्रेरणा देगी।इंदौर में पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय) में कोरोना … Read more

शिक्षा हो सब जन सुलभ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************ संविधान शिक्षा प्रजा,मिला मूल अधिकार।आलोकित शिक्षा मनुज,न्याय त्याग आचार॥ शिक्षा मिले समाज में,संस्कार परिवार।छल कपटी सत्तापरक,राजनीति गद्दार॥ धर्म जाति शिक्षा निहित,लोकतंत्र है आज।रोजगार भी जातिगत,बस नफ़रत आगाज़॥ दर-दर ठोकर खा रहे,शिक्षित उच्च सुपात्र।आरक्षण की मार से,तरुणाहत है गात्र॥ लोकतंत्र हो तब सफल,मिटे जाति अरु धर्म।सम्मानित शिक्षित गुणी,अभिनंदित हो कर्म॥ … Read more

कर्म महान

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* कर्ममहान है,भूलता इंसान हैफल देताकर्म। कर्ममहान है,फिर इन्सान हैअनजान,कर्म। कर्मकरते चलो,जो फल मिला हैसमझो है,कर्म। कर्ममहान है,गुमान नहीं करधन पर,हैकर्म। कर्ममहान है,जो भाग्य लिखा हैमिला वो हैकर्म। कर्ममहान है,भाग्य से ज्यादानहीं देता है,कर्म। कर्ममहान है,धर्म पथ चल राहीकहता हैकर्म। कर्ममहान है,माता सेवा करनाफल दे देगाकर्म॥ परिचय–श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान … Read more

होना भावुक नहीं

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)*************************************** होना तुम भावुक नहीं,पा कर मेरा प्यार।रहना खुश संसार में,हरदम मेरे यार॥हरदम मेरे यार,नहीं दु:ख का हो साया।मन में रख विश्वास,मिलेगी सुख की छाया॥कहे विनायक राज,आसरा तुम मत खोना।सुखमय हो संसार,कभी भावुक मत होना॥

थम यायावर मन

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** आज फिर मन छोड़ द्रुतगामी घोड़ा पास पैदल निकल गया,आज फिर जमे तहेदिल खुशियों का धधकता लावा पिघल गया। आज फिर सुबह की किरण मुझसे लिपट-लिपट कुछ कहने लगी,आज फिर एक चँचल-सी गिलहरी मेरे बगीचे में आकर रहने लगी। आज फिर बरसाती से धुले नर्म कोमल पत्ते हरे-हरे डोल रहे हैं,आज फिर स्वच्छ … Read more