भ्रष्टाचार मिटाएं

आशा आजाद`कृति`कोरबा (छत्तीसगढ़) ******************************************* बिगड़ रही है आज दशाएँ,बढ़ता भ्रष्टाचार है।मानवता को कलुषित करता,बाधित पथ उद्धार है॥ लोभ मोह के वश में मानुष,रिश्वत लेता शान से,तनिक नहीं वह क्षोभ करे है,हक छीने अभिमान से।शिक्षित दीनों के जीवन में,अध्ययन ही बेकार है,बिगड़ रही है आज दशाएँ,बढ़ता भ्रष्टाचार है…॥ नेता छलते आम मनुज को,रिश्वतखोरी ध्येय से,दीनों का … Read more

मोल कभी जान पाए नहीं

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************* मोल सैनिक कभी जान पाये नहीं,फौज के नाम पर लग रहा है दड़ा।जीतकर युद्ध भी हम झुके हैं सदा,प्रश्न है ये बड़ा,प्रश्न है ये बड़ा ??? कारगिल युद्ध में जीत कैसी हुई,कौन कहता है कि युद्ध जीते हैं हम।पांच सौ से अधिक वीर खो के वहां,जीत के नाम पर खून पीते … Read more

किसी के प्यार ने…

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** किसी के प्यार ने इस जिन्दगी का रुख ऐसे बदला।अगर वो आप हैं तो फिर मिले बिन ही कैसे बदला॥किसी के प्यार ने… खुशी होती बहुत मुझको,मिटी वर्षों की तन्हाई,कभी दु:ख भी हुआ करता,न किस्मत मिलने की पाई।मुझे भाता नहीं शिकवा,शिकायत हो तो किससे हो,करूँ भी क्या,भला अब मैं,बदलना … Read more

बरगद की छाॅ॑व जैसा आशीष

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* पितृ पक्ष विशेष….. बरगद के पेड़ पर देखो बैठा है काग,कहता है-धन्य है मनुज धन्य तेरा भाग। बरगद की छाॅ॑व जैसा पितरों का आशीष है,वंश तेरा बढ़ रहा है पितरों का आशीष है। समय है श्राद्ध पितृ पक्ष का,करिए पिंड दान,पितृ राह देख रहे हैं करिए उनका सम्मान। स्वादिष्ट भोजन बनाकर … Read more

दादा-दादी की याद में…

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** दादा-दादी तुम्हें स्मरन करते हैं हम।श्राद्ध पक्ष में आज नमन करते हैं हम॥ खेद मुझे है देख न पाया तुम्हें कभी,आप तो थे पर मैं न कहीं था यहाँ तभी।तुम से ही जीवन पाया है दादी माँ,आज फला-फूला घर तुमसे दादी माँ॥ दादा-दादी तुम्हीं मूल इस तरुवर की,तुमसे ही हम फूल-पत्तियाँ … Read more

नारी का समाज में स्थान-दशा व दिशा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) **************************************** नारी का हमारे समाज में सबसे महत्वपूर्ण स्थान है,क्योंकि उसके बिना कोई भी पुरुष पूर्ण नहीं है। पुरुष का जन्म भी नारी से ही संभव है। भारतीय संस्कृति के परिपेक्ष्य में नारियों की स्थिति को समझते हुए समस्त मातृशक्ति का नमन-वंदन करने का हमारा नैतिक दायित्व कहीं और प्रगाढ़ हो … Read more

औलादों पर कितना गुमान!

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** हम जितने विकसित हुए,उतने हृदयहीन भी गए। पति-पत्नी,माँ-बाप बनने के पहले और शादी के बाद यदि संतान नहीं होती तब पारिवारिक सामाजिक उलाहना झेलते हैं। उसके बाद चिकित्सक,यहाँ-वहाँ देवी-देवताओं के चक्कर और फिर पूजा-पाठ करते हैं। उस समय यह महत्वपूर्ण नहीं होता कि लड़की हुई या लड़का। उनके लालन- पालन में वे अपना … Read more

मन्नतों के धागे

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* मन्नतों के अनगिनत धागे मैंने बांध दिए…।रात के बाद प्रातः सूरज ने फिर सवाल किए॥ बादलों पर चित्र उकेरे और दिया संदेशा,आयेगा जवाब कोई मन में था अंदेशा।उम्मीद नाकाम हो रही उदास जिंदगी जिये।रात के बाद…॥ कितनी कही-अनकही बातों की साथ थी सरगम,यादों की अनगिनत लड़ियां भी साथ थी हरदम।खोज में ही … Read more

पितृ देव की कृपा..

उमेशचन्द यादवबलिया (उत्तरप्रदेश) *************************************************** पितृ पक्ष विशेष….. मैं तो करुँ ना कुछ भी,सब काम हो रहा है,होती सुबह है हँसकर खेलते ही शाम हो रही हैपितृ देव की कृपा से सब काम हो रहा है,करते हो तुम जनक जी,मेरा नाम हो रहा है। पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है,हैरान है ज़माना मंजिल भी … Read more

नवरात्र शक्ति आराधना

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** सर्व अमंगल,मंगलकारी,दुःख-पीड़ा से तारण हारी।जग-तम में तू ही उजियारी,जीव कंटकों में फुलवारी।अब तो आजा,हे जग माँ तू,यह दुनिया तुझ ही को पुकारी…॥ स्मरण तेरा शुरू करें हम,घट को स्थापित करके।घट-घट में है तू ही बसती,शक्ति जागृत करके।अखण्ड जोत तेरी नव दिन बालूं,मन से ज्ञापित करके।धूप,अगर और करूँ क्या अर्पण,तू … Read more