दहलीज का दीया

नमिता घोषबिलासपुर (छत्तीसगढ़)**************************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… एक दीया उस दहलीज पर भी रख कर आनाजहां बरसों से घुप अंधेरा है,एक दीया इतनी रोशनी देगा-कि अंधेरा अपने-आप ही चकने लगेगा!कुछ फुलझड़ियां उन नन्हें हाथों में भी दे देना-जो बड़े मकानों के पिछवाड़े में,जले पटाखों के बीच कुछ खोज से नजर आतेमैं उन नन्हें हाथों … Read more

ढांक लो जरा मुझे

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)****************************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… टिमटिमाते दीए से पूछेमहंगाई का हाल,मुस्कुराके वो हौले से बोल उठा-मेरी तरह हर इन्सान त्रस्त है,मैं तो ईश्वर का माध्यम हूँमेरी बदौलत ही इन्सान,ईश्वर से जीवन में कठिनाइयों कोदूर करने की चाह रखता है,तो क्यों न मांग लूँ ईश्वर सेमहंगाई दूर करने का वरदान।मैं तो एक छोटा-सा … Read more

आ रहे हैं अवध बिहारी

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… मात-पिता की आज्ञा पूरी कर,वन से लखन सिया संग,आ रहे हैं जन्म स्थान,मन में छलकती है अजब उमंग। दीप प्रज्वलित की घर-घर में,सभी मित्रों करो तैयारी,आ रहे हैं राजा दशरथ जी के पुत्र,राम अवध बिहारी। हर एक गली चौराहे पे फूल मालाओं से सजाओ,घर में सभी … Read more

आ गई दिवाली

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… मिट्टी के दीपों में,सूर्य का प्रकाश ले,आँचल में भरे-भरे,आ गई दिवाली। गली-गली बिखराये,दीप पुंज छुट-पुटछोड़े न कूल कुंज,झाड़ी न झुरमुटज्योति की रंगोली से,भूमि को सजाती,धरती से अम्बर तक,छा गई दिवाली। रजनी को फुसलाये,किरण-किरण खिल-खिलअपना विस्तार करे,बाती से हिल-मिल,रात को प्रभात बना,चाँद को लजाती,जन-जन के मानस को भा गई … Read more

बनना है तो दीपक बन

तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** तम अज्ञान का दूर करे,विकारों से हम रहें परेपाक-पवित्र हो जाये मन,आलोकित पथ हो जीवनबनना है तो दीपक बन। सच की राह पे चलना है,परवाना बन कर जलना हैतन-मन-धन कर अर्पण,आलोकित पथ हो जीवनबनना है तो दीपक बन। प्यार से तुम झोली भर दो,अपनी कृपा सब पे कर दोमिले सभी को अपनापन,आलोकित … Read more

बुद्ध की खोज ही विश्व शान्ति का एकमात्र समाधान

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** आपको लगता है कि बुद्ध को राजनीति की समझ नहीं थी ? पिता शुद्धोधन के इतने प्रयास के बाद भी उनका मोह सत्ता और राजपाट से ऐसे ही छूट गया ? आपको लगता है कि बुद्ध को इतनी समझ नहीं थी जितनी मार्क्स,लेनिन,मोदी और ट्रम्प को है इस दुनिया की … Read more

भारत को दबने की जरुरत नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* इस बार ग्लासगो में होने वाला जलवायु-परिवर्तन सम्मेलन शायद क्योतो और पेरिस सम्मेलनों से ज्यादा सार्थक होगा। उन सम्मेलनों में उन राष्ट्रों ने सबसे ज्यादा डींगें हांकी थीं,जो दुनिया में सबसे ज्यादा गर्मी और प्रदूषण फैलाते हैं। उन्होंने न तो अपना प्रदूषण दूर करने में कोई मिसाल स्थापित की और न ही … Read more

अच्छा लगता है…

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* आँखों में सुनहरे सपनों का तैरना,तेरी यादों को देर रात खंगालनाख़्वाबों में तेरा ही दीदार होना,अच्छा लगता है…। लबों पर तेरे नाम का आना,खामोश रहकर सब कुछ कह जानारिश्तों की आबरू बनाए रखना,अच्छा लगता है….। तेरे अल्फाज़ों की तपिश से,दिल का पिघल जाना।मन के दरीचों से तेरा झांकना,अच्छा लगता है…॥ … Read more

दुनिया रंग-बिरंगी

वाणी वर्मा कर्णमोरंग(बिराट नगर)****************************** एक दिन की बात है,चुन्नू पूछ बैठा दादाजी सेकहो तो दादा जी ऐसा क्यों होता है,कोई काला कोई गोरा क्यों होता हैकोई पेड़ छोटा तो कोई लम्बा तार क्यों होता है,कहो तो दादा जी ऐसा क्यों होता हैसब क्यों अलग-थलग से होते हैं। चुन्नू की बात सुनकर,दादाजी सोच में आएक्या जबाब … Read more

मत की राजनीति

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** मत की राजनीति,इन्सानियत की बगिया में,वोट का प्रहार है।सुंदर-सुंदर फूलों की जगह,नागफनी की पैदावार है।कमाल है लोकतंत्र,कहीं भीड़-कहीं कोहराम है।राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में,बढ़ रही तकरार है।सड़क पर कानून की,धज्जियां उड़ाई जा रही है।कानून व्यवस्था भी खूब,शर्मशार होकर मुरझा रही है।निशाना यहां मत का,दूसरे की परवाह नहीं।कुचक्र की योजना यहां,बनती-बिखरती यहीं।थोड़ी-सी मछलियाँ,सरोवर गंदा कर रही यहां।कानून … Read more