हथियार
नताशा गिरी ‘शिखा’ मुंबई(महाराष्ट्र)************************************ हथियार,हाँ,जरूरी नहींदो धारी तलवार ही हो,बाणों की बौछार ही होधनुष की टंकार ही हो,ग्रेनाइट बिछी सड़कें होमंदिर-मस्जिद का वार हो,कटाक्ष में बड़ी धार ही हो। हथियार…उठता है जुर्म के खिलाफ,होता है जुर्म का पलड़ा भारीउठ जाती है अनेक आवाज,लगाए जाते हैं नारेगूँज जाती है दिशाएं,भयभीत हो जाती है सरकारें। हथियार…उठता है अपने … Read more