कुछ प्रेम जैसा मामला
संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** कुछ प्रेम जैसा मामला हैतर्कों से कहां कोई सामना है,मस्तिष्क लाख संतुष्ट करोजब छिपी उर कोई कामना है। लाख तर्क दो समझाने कोपृथ्वी,सूर्य चक्कर लगाती है,मैं स्थिर तो पृथ्वी भी स्थिरमेरे दिल का तो यही मानना है। तुम दोगे दण्ड अगर मूर्खता पेमूर्खता तो तर्क का मामला है,पड़ जाऊंगा कदमों में तुम्हारेकौन … Read more