प्रेम की भावना

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. प्रेम की भावना दिल की जागीर है।प्रेम दिल से मिटाता सभी पीर है। जिन्दगी में रहे प्रेम दिल का अगर,फिर तो हर जिन्दगी सुख की तासीर है।प्रेम की भावना… जिन्दगी इक सफर है सभी के लिए,जिसका आगाज होता यहां प्रेम से।एक मन्जिल के सब … Read more

सावन

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** कारज में निज खोय रहे सुध सावन की रहते न पिया में।झूम रहे कुसुमों नव पल्लव बेल हुलास उठाय जिया में।साध रही सुर कोयलिया कजरी धुन आग लगाय हिया में।मेघ सुनो कह दो पिय से तजि कारज आन मिलो बगिया में। सावन में सजनी सजती सज बारिस बूंदन मेघ सखी।नीक लगे धरती सजती … Read more

जलवा दिखा दे ज़रा सोणिए

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) ***************************************** शामे ग़म जगमगा दे ज़रा सोणिए।अपना जलवा दिखा दे ज़रा सोणिए। ह़सरत’-ए-दीद पागल न कर दे कहीं,रुख़ ‘से पर्दा ‘हटा दे ज़रा सोणिए। भूल’ जाएँ ‘सदा के लिए मयकदा,जाम ऐसा पिला दे ज़रा सोणिए। एक ‘मुद्दत से वीरानियाँ हैं यहाँ,बज़्मे दिल को सजा दे ज़रा ‘सोणिए। तीरगी जिससे मिट जाए घर … Read more

नियमित योग से काया निरोग

आचार्य गोपाल जी ‘आजाद अकेला बरबीघा वाले’शेखपुरा(बिहार)********************************************* मानव मन-से भज रहा,आज योग का नाम,प्रात:-काल करना रहा,योग सभी का काम। सुंदर सुकोमल शरीर हो,मन निर्मल गंग समान,सदा योग का काम करें,इसके लाभ को जान। नियमित योग से करो सदा,काया को निरोग,लेना योग गुरु का तुम,उचित सदा सहयोग। स्वस्थ तन-मन से सदा,होता सभी का काम,तन-मन सारा शुद्ध … Read more

दुनिया रंगरेज यहाँ

संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** कोई साथ खड़ा हैकोई छोड़ रहा है,कोई हाथ पकड़ के भी-मुँह अपना मोड़ रहा है। दुनिया रंगरेज यहांचाह सतरंगी रंगों की,पक्के रंग चाहने वाला ही-अपने रंग छोड़ रहा है। हर तरफ़ दोमुँही दुनियाचाहत हाथ दोनों लड्डू,एक का खा कर,दूजे से-पहला कड़वा बोल रहा है। त्रस्त,ग्रस्त सभी यहां हैउर भाव सभी के यहीं … Read more

‘भाषा’ का दिवस..अंधी दौड़

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** अपनी संस्कृति और संस्कारों को जब हम स्वयं अपने जीवन और लोक व्यवहार में नहीं ला पा रहे हों और उस पर भी पश्चिमी खुलेपन के लिए लाल कालीन बिछाने के बाद यह अपेक्षा करना कि हमारी नई पीढ़ी उस आकर्षण से बिल्कुल अछूती रहकर हमारी अपनी पारंपरिक नैतिक मान्यताओं से चिपकी … Read more

महारानी लक्ष्मीबाई एवं छत्रसाल पर हुआ कवि सम्मेलन

टीकमगढ़(मप्र)। म.प्र. लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ एवं जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़ के बैनर तले महारानी लक्ष्मीबाई एवं महाराजा छत्रसाल पर केन्द्रित आनलाइन आडियो कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। अध्यक्षता डाॅ. प्रो.शरद नारायण खरे (मंडला़) ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि कल्याण दास साहू ‘पोषक’ जबकि विशिष्ट अतिथि परमलाल तिवारी रहे। इस गोष्ठी का … Read more

क्या गारंटी कि,अनाज-वितरण में धांधली नहीं होगी !

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* केंद्र सरकार और दिल्ली की सरकार के बीच आजकल अजीब-सा विवाद चला हुआ है। दिल्ली की केजरीवाल-सरकार दिल्ली के लगभग ७२ लाख लोगों को अनाज उनके घरों पर पहुंचाना चाहती है लेकिन मोदी सरकार ने उस पर रोक लगा दी है। इन गरीबी की रेखा के नीचे वाले लोगों को ‘प्रधानमंत्री गरीब … Read more

सम्बन्ध अस्तित्व का अनस्तित्व से

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* अल्हड़ता थी उन्मुक्तता थी,भोलापन और स्वच्छन्दता थीमन था!! अतल गहराईयां नहीं,बचपन था गम्भीरता नहींछोटे-छोटे से ख्वाब थेखेल और खिलौनों के।बचपन बीता,वक्त बदला-प्रारम्भ हुआ जन्म इच्छा का,आँखों में उतरा इक सुन्दर-सा ख्वाबउसे पाने को हुआ मन बेकरार,तस्वीर स्पष्ट नहीं थी-थी शून्यता और आकारहीनता।इच्छाओं से जन्मा बीज-बीज से अंकुर,मन ने पहचान लिया … Read more

अंहकार नहीं,सौहार्द्र ही जीवन

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. अहंकार का नशा बहुत मतवाला होता है,मनुष्य नहीं,स्वयं का ही रखवाला होता है।सौहार्द,स्नेह,प्रेम,सहयोग ही है सफल मन्त्र-अहम क्रोध,केवल बुद्धि का दिवाला होता है॥ वो कहलाता सभ्य सुशील,जो सरल होता है,वो कहलाता विनम्र शालीन,जो तरल होता है।इसी में है बुद्धिमानी कि,व्यक्ति प्रेम से रहे-वही बनता सर्वप्रिय,जो नहीं गरल … Read more