अपना-पराया

श्रीमती चांदनी अग्रवालदिल्ली***************************** हम सबने परिवारों की बातचीत में अक्सर सुना है कि अपना तो अपना ही होता है। पराया अपना नहीं हो सकता। मुझे तो ऐसा लगता है कि जिस व्यक्ति से हमारा मन मिल जाता है,वह अपना-सा लगने लगता है। दूसरी ओर कोई अपना निकट का होकर भी पराया लगता है।अभी पिछले महीने … Read more

जब से बदरा जल बरसाये

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************** चैतन्य तरुण हो गयी धरा,जब से मेघा जल बरसाये।कोयल ने राग विरह छोड़ा,मल्हार राग फिर दुहराये॥ धरती मल मैल क्षरण करके,देखो नव यौवन पाया है,नदियों ने पानी ढो-ढो कर,सागर का मन दहलाया है।हरियाली है सब हरा-भरा,ऊपर से मेघ दूत छाये,अवनी की कोख हरी करने,मेघा आये मेघा आये॥ बंजर का मंजर टूट … Read more

कल्याणी का दर्द

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* सच कहती हूँ मैं,आत्मा काँप जाती है,आँखें भर जाती है,जब उनके विषय में चर्चा सुनती हूँ। क्या विचार,व्यवहार है उस कल्याणी (विधवा) नारी के प्रति। मित्रों छोटी-सी बिटिया,नहीं जानती है कल उसके संग क्या होने वाला है,क्या सुनने वाली है। बिटिया बड़ी हो गई,धूमधाम से ब्याह  रचाया गया और दिल खोलकर … Read more

हम गलत नहीं थे

अभिजीत आनंद ‘काविश’बक्सर(बिहार)******************************************* बुरे वक़्त के सितम से सहमे मेरे दिन-रात थे,हम गलत नहीं थे,बुरे मेरे हालात थे…। सिसकियों संग सिमटी जीने की अभिलाषा,बेरंग हुई जिंदगी बनकर रह गई तमाशा…संकटों के मेघ घुमड़-घुमड़ कर बरस रहे थे,जीवन की मझधार में हम खुशियों की फुहार को तरस रहे थे…। रिश्तों के फलक पर अपने भी ग़ैरों … Read more

संघर्षों से ही सफलता

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** खिले कमल कीचड़ में कैसे,गहन अंधेरा दीप जले।उल्टे बांस बरेली जैसे,मछली उल्टी धार चले। तूफान भरे सागर में वो ही,जीवन नइया चलाता है।कर जिगरा फौलाद का अपना,चिड़िया बाज लड़ाता है। नहीं आसां है संघर्षों के,तूफां में नइया खेना।काजल की कोठर में रहकर ,निष्कलंक जीवन जीना। सत्य मार्ग पर चलना … Read more

पति-पत्नी का रिश्ता

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** रिश्ता पति-पत्नी का जाना। जन्म-जन्म का साथ निभाना।है अटूट यह मन का बंधन। साथ निभायें अपना जीवन॥ सदा रहें सुख-दुख में साथी।बन कर दोनों दीया-बाती॥नियम समाज धर्म का रिश्ता।नवजीवन मिलन देख हँसता॥ यह होता किस्मत का लेखा।जन्म नये रिश्तों का देखा॥दोनों मिल कर्तव्य निभाते।बच्चों को खुद सफल बनाते॥ दोहा- सिया राम … Read more

मानसून शुभ आगमन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************** छाया नभ घनघोर घन,दग्ध धरा बिन आप।मानसून आग़ाज़ लखि,मिटे कृषक अभिशाप॥ मानसून की ताक में,आशान्वित निशि रैन।उमड़ रही काली घटा,कृषक चमकते नैन॥ आया सावन मास फिर,बिजुली गरजे व्योम।बूंद-बूंद बरसे घटा,भींगे तन-मन रोम॥ सूर्यातप तनु स्वेद जल,बहता बीच पनार।मानसून शुभ आगमन,जन-मन खुशी बहार॥ सूखे तरु वन खेत सब,पोखर नदियाँ कूप।मानसून … Read more

अफगानिस्तान:भारत व पाक की चुप्पी!

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* ऐसा लग रहा था कि अफगानिस्तान में हमारे राजदूतावास और वाणिज्य दूतावासों को कोई खतरा नहीं है,लेकिन हमारा कंधार का दूतावास खाली हो गया। ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान के उत्तरी और पश्चिमी जिलों में तालिबान का कब्जा बढ़ता जा रहा है। तालिबानी हमले का मुकाबला करने की बजाय लगभग १ हजार … Read more

स्वर्णिम भविष्य के लिए आबादी नियमन बेहद जरुरी

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)************************************** सम-सामायिक चिंतन…. भारत एक लोकतान्त्रिक देश है, जहाँ समस्यायों का भण्डार है। कोई भी नियम- कानून बनाने में सरकारों को पसीना आ जाता है,कारण ‘पिंडे पिंडे मतिर भिन्ना’ क्योंकि यहाँ जनतंत्र है और सबको बोलने की स्वतंत्रता के साथ स्वच्छंदता है और उसके बाद न्यायालीन सुव्यवस्था का होना। अभी कुछ दिनों में बाल … Read more

सावन आया अब आओ

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* रिमझिम बदरा बरस रहे हैं,सावन आया अब आओ,आकुल है मन तुमसे मिलने,मधुर सलिल रस बरसाओ। छम-छम करती बूंदे बरसे,नृत्य धरा पर दिखलाए,गर्जन करते मेघ साथ में,जैसे पावक दहकायेआ जाओ अब प्रियतम प्यारे,प्रीत व रीत सिखा जाओ,रिमझिम बदरा बरस रहे हैं,सावन आया अब आओ। झूला झूले आमा डाली,कोयल गीत सुनाती है,रंग-बिरंगी तितली आकर,मेरा … Read more