राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** जन्म दिवस (२ अक्टूबर) विशेष… लाल बहादुर शास्त्री हिन्दुस्तान के स्वर्णिम इतिहास में…एक ऐसा नाम…एक ऐसा किरदार…एक ऐसा व्यक्तित्व और एक ऐसा राजनेता थे,जिन्हें आज किसी पद,प्रतिष्ठा से नहीं,बल्कि सादगी,ईमानदारी व निर्णय क्षमता के आधार स्तम्भ के रूप में जाना जाता है। शास्त्री जी २१वीं सदी की युवा पीढ़ी के दिलों … Read more

वे भी क्या दिन थे…

प्रत्यूषा जैनइन्दौर (मध्यप्रदेश)*********************************** वे दिन भी क्या दिन थे,जब हम स्कूल जाते थेसाथ पढ़ते-साथ खेलते,साथ में खाना खाते थे। याद आते अब वह दिन,जो स्कूल में बिताएदोस्तों के संग खूब खेले,और झूमे,नाचे गाए। पहले तो हम स्कूल को,बोझ समझते थेपर अब पता चला,वह स्कूल नहीं,घर था। अब दिल में फिर से,एक उम्मीद जागी हैजो बंजर … Read more

शास्त्री जी के हर वाकये में सीख

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** जन्म दिवस (२ अक्टूबर) विशेष….. सभी जानते हैं कि,२ अक्टूबर को सादगी की प्रतिमूर्ति लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्मदिन है।यह भी जानते होंगे कि यह गाँधी जी को अपना गुरु मानते थे और उन्हीं से उन्होंने सादगी और देश के प्रति प्रतिबद्धता सीखी। एक बार उन्होंने गाँधीजी के लहजे में … Read more

मान रखना

रीता अरोड़ा ‘जय हिन्द हाथरसी’दिल्ली(भारत)************************************************ पितृ पक्ष विशेष…… पितृदेव आए तेरे द्वारे दे रहे हैं दस्तक,माथ‌ झुका ले उनके चरणों में होकर तू नत मस्तक। जीते जी सेवा कर न सके तुम अब बनते हो श्रद्धालु,वो क्षमा दान तुझे‌ दे देंगे पितृदेव बहुत ही दयालु। खुशियों से भर देंगे पितृदेव खाली‌ तेरा‌ दामन,रौनक से भर … Read more

लावारिस

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************* मैं हूँ लावारिस क्या मेरा,पैदा होना या मर जाना।सड़कों पर जीवन बीतेगा,ना मुझे किसी के घर जाना॥ नहीं कोई ऋतु वसंत यहाँ,सर पर है नभ की छत नीली।अंतड़िया भूखी सिकुड़ गयी,आँखों की पुतली है पीली॥ना जानू मैं क्यों आया हूँ,है कौन मुझे लाने वाला।आँधी से लोरी सुनता हूँ,लगती सूखी-सी या गीली॥कूड़े-करकट … Read more

लहरें

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* दूर तलक हैं चलती जातीं,यादों संग लौट कर आतीं।दिन-रात कभी न सो कर,तन-मन मेरा भिगो जातीं।रंग-बिरंगी मृदु रेत देकर,स्वच्छ जल से पग हैं धोती।स्फटिक उज्ज्वल गौरवर्णी,दौड़-दौड़ कर मिलने आतीं।लहरें हैं या ये सखी-सहेली,सीपियाँ तोहफे में दे जातीं॥

अद्भुत समर्पण

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ धरती के भीतर से देख लिया प्रस्तर ने,छिप कर झरोखे से मेरा मृदु आननरंग को निखार वह,रूप को सँवार सखी,आया द्रुत सम्मुख बन मेरा लघु दर्पण। मैंने तो सोचा था मेरी छवि लखने को,मेरी ही अँखियाँ नित रहती अभिलाषी हैंलेकिन जब देखा छू शीशे के अन्तर को,समझी तब मेरे ही दर्पण प्रत्यासी हैं।दर्पण … Read more

चंचल हिरणी

वाणी वर्मा कर्णमोरंग(बिराट नगर)****************************** कुलांचे भरती हिरणी,चली वन की सैर कोमतवाली मदमाती,नवयौवना गुनगुनातीकस्तूरी चाहती।बेखबर आस-पास से,कोई शिकारी था वहांघात लगाए बैठा,अपनी चतुर निगाहों से,सब-कुछ भाँपता।हिरणी की कुलांचें,रास न आई उसेउसकी उन्मुक्त चाल,भायी न उसे।तीर छोड़ा उसने,प्रेम का विश्वास कातीर लगा सीधे हृदय में,हिरणी छटपटा उठीहाय निष्कपट चंचला,बिंध गई तीर से।शिकारी की धूर्तता रंग लाई,था उसने … Read more

चलो बचाऍं नदी हम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************** जल जीवन अनमोल है,गिरि पयोद नद बन्धु।तरसे नदियाँ जल बिना,जो जीवन रस सिन्धु॥ नदियों का पानी विमल,है जीवन वरदान।पूज्य सदा होतीं जगत,सिंचन खेत ज़हान॥ आकूल जग पानी बिना,नदी तडाग व कूप।जीव जन्तु निष्प्राण अब,भूख प्यास अरु धूप॥ नीर विषैला न बहे,सरिता निर्झर ताल।रहे स्वच्छ भू-जल नदी,वरना हो बदहाल॥ नदियाँ … Read more

‘युवा’ उम्र नहीं-अवस्था

संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** युवा उम्र नहीं अवस्था हैयुवा दो धुरी की व्यवस्था है,भविष्य और अतीत के मध्य-वर्तमान-सी एक मध्यस्था है। शोभित,शोषित मध्य हैवृद्ध,बाल पोषित सानिध्य है,है गर्भ युवा गृहस्थी का-युवा उम्र नहीं अवस्था है। स्तम्भ,स्तब्ध-सा बिंदु हैबहता अविरल-सा सिंधु है,किनारों पर बैठे प्यासों की-ठहरे पोखर-सी अभ्यस्ता है। युवा ताना-बाना दो धुरी काहाट बिके,कभी घाट बिके,करे … Read more