फिरता मैं मारा-मारा
जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** पैसे की खातिर मंचों पर,क्यों फिरता मैं मारा-मारा।सब नोट धरे रह जाएंगे,जिस दिन फूटेगा घट प्यारा॥ मैं शहर-शहर में घूम रहा,फिर भी मेरा मन खाली है,ये भूख लगी जो पैसे की,दुर्बल मन की कंगाली है।बाहर से उजियारा दिखता,अंदर से काला धन रिसता,इक रोज साँस की डोरी से,छूटेगा तन का इकतारा,सब नोट … Read more