चाँद तुम महफ़ूज़ हो…
ऋचा सिन्हानवी मुंबई(महाराष्ट्र)************************************* चाँद तुम महफ़ूज़ हो,बादलों की गोद में,करवा चौथ,ईद का चाँद औ अपनी मोद में। ना तुम्हारे कोई घूँघट,ना कोई चिलमन,चाँदनी संग रास रचाते,छुपते ग्रहण बन। ना तुम्हारा धर्म है,और न कोई मज़हब,ख़ुशबू बन बिखरे हुए,मोहब्बतों में ग़ज़ब। गीत-ग़ज़लों में खिले,और कवियों की शान,तुमको अपनी सूरत पर,इतना क्यूँ गुमान। अच्छा है जो यहाँ … Read more