प्यारा बेटा

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ हम ३ बहनें और १ भाई थे। माँ-बाप ने हमें बड़े प्यार और दुलार से पाला-पोसा और बड़ा किया। ये १९८० के दशक की बातें हैं। मुझे इतनी समझ तो ,(जब मैं छठी कक्षा में थी) आ चुकी थी कि माँ मेरे भाई को हम सब बहनों से ज़्यादा प्यार करती है।हम सरकारी … Read more

सपने यूँ बिखरे…

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** आज है अंतिम गीत समर्पित,हृदय की चीत्कार सुनो‘सपना’ के सपने यूँ बिखरे,पुष्प पौधे से ज्यूँ टूटे हो। मैंने किया था नेह समर्पित,तुमने भी स्नेह दिया थासपने खिले थे मन के अंदर,जिसे हृदय में जोड़ लिया था। कभी थे जीवन में सपने,और बन गये थे जो अपनेकब बने मन मीत यहाँ … Read more

नहीं खड़ा कोई भी रक्षक

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** बाँट रहा था मैं ज्ञान,सप्ताह के छह दिनहर दिन के छह घंटे,बच्चों पर रहा ध्यान। जीवन में था मेरा सम्मान,चल रहा था हर्षित जहानचलते-चलते लगा है ग्रहण,अब होता नहीं मुझे सहन। देखते-देखते शाम हो गई,सबेरा बीता मध्यान्ह खो गयादिन ढल गया व रात हो गई,अंधेरा छाया-प्रकाश खो गया। बच्चों का … Read more

संघर्ष का पर्याय जीवन

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचना शिल्प:कुल मात्रा भार -२५/यति-१६-९; पदांत २१२ क्षणभंगुर जीवन सकल यह,कर लोे कर्म को।गीता का भी सार यही है,जानो मर्म को॥इस जीवन का कर्त्तव्य सदा,बस पुरुषार्थ है।सबको जाना इस दुनिया से,अटल यथार्थ है॥ संघर्ष का पर्याय जीवन,हार न मान लो।जीत जाओगे हर हाल तुम,बल पहचान लो॥हमें शिक्षा देते हैं सदा,ये संघर्ष … Read more

खुद को समझाऊँ कैसे ?

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)************************************ दर्द दिल का बताऊँ कैसे,रूठे यार को मनाऊँ कैसे। मोहब्बत हो गई है उनसे,एहसास ये दिलाऊँ कैसे। बिखर गए रिश्ते मोती से,माला एक बनाऊँ कैसे। तोड़ दिया दिल उसने जो,खुद को समझाऊँ कैसे। पेड़,सभी तुम काट रहे हो,मेघ कहे जल बरसाऊँ कैसे। झूठ से भरी इस दुनिया को,सच की राह दिखाऊँ कैसे। … Read more

अमर जवान

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************** भारत माँ का रक्षक हूँ और आग से आग बुझाता हूँ,अपने शोणित की बूंदों से माँ की तस्वीर सजाता हूँ। मैं चट्टानों से लड़ता हूँ और रेगिस्तान पठारों से,बर्फीले तूफानों से भी नदिया की उठती धारों से।सर्द गर्म मौसम से लड़ता बेरहम ठंड की रातों में,मैं भी दूल्हा बन जाता हूँ … Read more

प्रेम का पथ

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* प्रकृति ने सिखाया प्रेम,समर्पित भाव से बंधनमानव से मानव करे प्रेमहृदय देखो बने चंदन। नेह से बने रिश्तों का,महकता है सदा प्रकाशप्रेम जोत जगे हृदय में,हो जाता मन वृंदावन। ममता के पलने में झूले,प्रेम आनंदित हो संतानमात-पिता,गुरू-सखा,प्रेम ही है सबका वंदन। सत प्रेम का पथ कठिन है,जाने स्वयं प्रभु ही … Read more

हिय की हर पीर हरूँ मैं

सुदामा दुबे सीहोर(मध्यप्रदेश) ******************************************* नित नूतन नव शब्दों का श्रृंगार करूँ मैं,स्वर के सुरीले रागों का आधार धरूँ मैं।विधि की बनी हुई सृष्टि की छवियों में,भाँति-भाँति के सुंदर से नित रंग भरूँ मैं॥ रंक भूप में भेद नहीं कोई करता हूँ,समदर्शी-सा एक नजर से देखे रहूँ मैं।दीन-हीन की सदियों से मैं आवाज रहा,लिख कर उनके हिय … Read more

जीत की आदत

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** मुझे जो उठने की लत लगी,वो गिरा-गिरा कर चूर हुए,मुझे जो जीतने की आदत पड़ी,वह फिर तो फुर्र हुएहार ना मानने का जज्बा,जीतने की आदत बना मेरा,फिर तो मुझे शिकस्त देने की सोच वाले,मजबूर हुए। तुम विजेता बन जाओगे,जीतने की आदत बनानी होगी,जो कुछ भी है तुम्हारे पास,उसको ताकत बनानी होगीकोई … Read more

मन से रखा है

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** मेरी हथेली में ला कर रख दिए थे तुमने,फागुन में दोने भर सिंदूरी लाल टेसूमैंने उसे सहेज कर रख दिया है वहीं,सावन में तुम्हारे लाए हुएमोगरे के गजरे के साथ,जतन से रखा हैमन से रखा है। क्वांर में नदी किनारे मेरे कपाल फिराई,काश के फुरफुरे फूलों वाली डंडियामुंडेर से उतरती एक मुट्ठी धूप,और … Read more