वन से रिश्ता जोड़

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)*************************************** छाया तरुवर से मिले,वन से रिश्ता जोड़।स्वच्छ रहे पर्यावरण,इससे मुँह मत मोड़॥इससे मुँह मत मोड़,साथियों वचन निभाना।छाया हो भरपूर,आज से पेड़ लगाना॥कहे ‘विनायक राज’,बदलती इससे काया।सुख मिलता है बैठ,मिले जब तरुवर छाया॥

पुरस्कार जरूरी

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************* शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी,ज्ञान के लिए पुरस्कार जरूरी।करते हैं जो सदा ही काम बुरा,दूर से उनको नमस्कार जरूरी। जग में भली ईमानदारी सबसे,बेईमानों का बहिष्कार जरूरी।शोभा बढ़ती काव्य की जिससे,शब्दों के साथ अलंकार जरूरी। चुनाव करना हो जब सर्वश्रेष्ठ का,प्रत्यक्ष सबका साक्षात्कार जरूरी।अच्छाई को ही अंगीकार करना,बुराई को सदा इनकार … Read more

ढूंढूं तुझको मैं कहाँ-कहाँ…??

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** ईश्वर और मेरी आस्था स्पर्धा विशेष….. हे,मेरे ईश्वर…!ओ,माय गॉड…।ऐ,मेरे मालिक…!या,खुदा …..!हाथ उठाऊं,अरज करूँ मैंढूंढूं तुझको मैं कहाँ-कहाँ…??मन्दिर में ढूंढा तो मिली,बस तेरी मूरत थी प्यारी।गिरजे का घण्टा बजा,मैं झांका,तेरी शान थी,अजब-सी न्यारी।मज्जिद से ही,नमाज भी अता की,झलक कहीं नहीं थी,वो प्यारी-प्यारी।पत्थर को पूजा,ग्रन्थ में खोजा।मिला नहीं तू,महिमा थी सारी।हे,मेरे … Read more

आराध्य ने ही बचाया

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** ईश्वर और मेरी आस्था स्पर्धा विशेष….. जब मैं छोटा ही था,तब मेरी माताश्री ने सबसे पहले प्रभु श्री गणेशजी का पूजन करा ईश्वर के प्रति आस्था के बारे में समझाया ही नहीं,बल्कि ‘जय गणेश जय गणेश…’ वाली पंक्तियां याद करवा दीं। उसके बाद उन्होंने मुझे हनुमान चालीसा याद करवाया। इस प्रकार … Read more

जीवन का सत्य

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** जब मैं दुनिया में आया,हुआ हताश खूब रोयाफिर किया मैंने सवाल,कहाँ-कहाँ आया कहाँ। सवालों की चिंता छोड़,सभी मना रहे थे खुशीसब ही कर रहे थे दौड़,मुख में लिए हुए हँसी। सबको देख मैं भी भूला,संसारिक रंग मुझमें घुलाकहाँ से मैं क्यों कर आया,उद्देश्य पीछे छूटता गया। पुनः कुछ दिन के … Read more

जगत की रीत

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** देख जगत की रीत मेरे मन मीत,मेरा मन रो उठता हैकैसी करे अनीति करे जो प्रीति,देख मन रो उठता है।जीते करे न प्रीति मेरे मन मीत,बाद में क्यों रोता है ?सब दौलत के मीत न कोई मीत,पड़े दुख सब दिखता है।प्रभु से करता प्रीत,न सांचा प्रीत,सौ का लाख मांगता हैजग की कैसी नीति … Read more

उच्च तकनीक के युग में भी दशहरे का महत्व कायम

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ************************************** दशहरे के साथ अनेक परंपरागत विश्वास भी जुड़े हुए हैं। इस दिन राजा का दर्शन शुभ माना जाता है। इस दिन लोग ‘नीलकंठ’ के दर्शन करते हैं। गाँवों में इस दिन लोग जौ के अंकुर तोड़कर अपनी पगड़ी में खोंसते हैं। उत्तर भारत में दस दिन तक श्रीराम की लीलाओं … Read more

करो नाश खल ख़ुशियाँ भर दे

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ***************************************** नवरात्र विशेष…. महागौरी दुर्गतिनाशिनीनवदुर्गे जय कालविनाशिनि।सकल पाप जग हर अवलम्बे,हर मानस कल्मष जगदम्बे। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दात्री,सती रुद्राणी शिवा भवानी।महातिमिर हर मातु शारदे,भवसागर से हमें तार दे। देवासुर मानव नित पूज्या,हिमकन्या जगजननी रम्या।रोग शोक जग मोह मिटा दे,भक्ति प्रेम स्वराष्ट्र जगा दे। जगतारिणि अम्बे माँ गौरी,ममता समता … Read more

अमृत वर्षा…

एम.एल. नत्थानीरायपुर(छत्तीसगढ़)*************************************** नवरात्रि विशेष…. नवरात्रि के इन दिनों में शक्ति से उर्जित है,पवित्रतम वातावरण में भक्ति से हर्षित है। मनुष्य के सद्गुणों से ये अमृत वर्षा होती है,पूजन व उपासना से सृजित वर्षा होती है। जगतमाता जगदंबा ये सिद्ध शक्तिपीठ है,अर्पण और समर्पण से युक्त भक्तिपीठ है। करुणामयी वात्सल्य भक्तों पर बरसाती है,मनवांछित फल देती … Read more

सोच का फर्क

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** जहाँ से तुम चले थे,वहीं से मैं भी चला थाफर्क सिर्फ इतना है कि,तुम अपने लिए चले थेऔर हम सबके लिए,वहीं से आगे चला था,नतीजा तुम्हें और हमेंआज साफ दिख रहा है। बदल जाती है किस्मत,अगर नीयत साफ होसभी के प्रति दिल में,अगर प्यार तुम्हारे होतो सुख शांति और,आत्म सम्मान पाओगेऔर जमाने … Read more