रिमझिम बरसात
श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* आई सावन की रिमझिम बरसात,कभी रिमझिम बारिश होतीकभी कभी ओले पड़ते,कभी बुलबुले बनते। देखके बबलू-डबलू हर्षित होते,कभी ओला उठाने जातेकभी बुलबुला पकड़ते,ना पकड़ाया तो रोते। बहुत नटखट हैं वह दोनों भाई,मन ही मन करते हैं चतुराईचुपके से दादी को बोला,ला के दो मुझे बुलबुला। सुनकर के बबलू-डबलू की बातें,दादा बैठे-बैठे मन … Read more