विश्व में हिंदी का परचम लहराएँ
डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* भारत की आत्मा ‘हिंदी’ व हमारी दिनचर्या…. अनुपम है,देवनागरी भाषा-हिंद की आशा। हिंदी से हम,हिंदी ही स्वाभिमान-हिंदी में प्राण। नस-नस में,प्यारी हिंदी समाई-गर्व बढ़ाईI हिंदी की बिंदी,माँ का श्रंगार बिंदी-प्यारी-सी बिंदी। आज़ादी के बाद जब संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में बाँध कर रखने की आवश्यकता महसूस हुई तो ये … Read more