उनकी बात करो…

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* अपनी ग़ज़ल में कभी रोटी से मुलाकात करो,पेट जिनके सिले हुए हैं उनकी बात करो। हसीन जुल्फ़ों का हर रोज जिक्र होता है,धूल से उलझी लटें जिनकी उनकी बात करो। संगमरमर से तराशे जिस्म की चर्चा है बहुत,जो मुफ़लिसी में हुए जर्जर उनकी बात करो। सभी करते हैं आलीशान ताजमहल … Read more

कथा-मणि साहित्य-शिरोमणि

विजय मेहंदीजौनपुर(उत्तरप्रदेश)**************************************** जननी माँ आनन्दी जी,जनक अजायब के घर-परिवार। ईस्वी अठारह सौ अस्सी में,इक्कतीस जुलाई रहा तिथि वार। जिला बनारस शिव की नगरी,लमही गाँव के एक वृहद परिवार। युग प्रसिद्ध अद्वितीय कलमकार,मुंशी प्रेमचंद लिए थे अवतार। धनपत राय नाम था पहला उनका,मुंशी प्रेमचंद हुआ दूसरी बार। मैट्रिक पास हुए ही थे वे,तब तक मिला शिक्षक … Read more

स्वीकार करो

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************* हार को भी अपनी स्वीकार करो,जीत के लिए खुद को तैयार करो। खुशियां जो बांटते हैं सारे जग को,ऐसे लोगों का सदा ही सत्कार करो। वाणी से प्रभावित हो सब जनमानस,बातों को अपनी ऐसी असरदार करो। संवेदनाएं समझो सब दीन-हीन की,मन के घावों का फिर उपचार करो। मिले जहां पर भी … Read more

पानी -पानी

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** मर जाता कई आँख का पानी,कोई शर्म से पानी-पानीपानी कहानी कितनी पनीली,लिखते कोई पानी में पानी। मुस्कान कभी है आँसू पानी,जीवन और मृत्यु है पानीपानी बिना मूल्यहीन आदमी,अनमोल है बेमोल ये पानी। बहता कहीं-कहीं जमता पानी,कितना सरल-तरल कठोर पानीइसका मन बढ़ने का जब आगे,रोक नहीं सकता कोई पानी। आसमान ठहरा पानी-पानी,सागर गागर पर … Read more

माँ तू है अनमोल

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** संसार में लाई मुझे तू,बेपनाह मुझे प्यार दियादिन-रात कष्ट सही तू,मेरा जीवन संवार दिया। माँ,माँ कहते हुए मैंआँचल में पड़ा रहातेरी ही महिमा से मैं,आज तो बड़ा हुआ। कहते लोग तुम हो अनपढ़,दुनियादारी में है तू जड़पर तूने ही प्रथम ज्ञान दिया,बातों-बातों में कर्म महान दिया। याद है मुझे तेरा … Read more

क्रांतिकारी उपन्यासकार रहे मुंशी प्रेमचंद जी

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)****************************************** स्वत्रंत्रता के सेनानी व उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी के जयंती दिवस पर सुमन श्रद्धांजलि अर्पण।भारत की स्वतंत्रता केवल बन्दूक की नाल या अग्निगोला या अनशन से नहीं आई थी। इसके पीछे लेखकों की तीक्ष्ण कलम की धार भी थी। इसके जलन्त उदाहरण मुंशी प्रेमचंद जी हैं। उनकी जीवनी का अध्ययन करने … Read more

घड़ियाली आँसुओं की वर्षा…

डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप’रानी बाग(दिल्ली)****************************** वर्षा फिर आ गई। हर साल आती है। हज़ारों सालों से आती है। कुछ को हँसाती है,तो कुछ को रुलाती है। वक्त-वक्त की बात है। २ साल पहले तक देश कृषि प्रधान था। वर्षा आती थी,साथ में खुशी लाती थी। खेत सोना उगलते थे। बारिश के ४ महीने यानी चौमासा। … Read more

महक हूँ गीली माटी की

अमृता सिंहइंदौर (मध्यप्रदेश)************************************************ हूँ महक गीली मिट्टी की…कभी तेज़ तपिश भी सूरज-सी…भादो की हूँ रिमझिम फुहार भी मैं….तेज़ चमक भी बिजली-सी।शीतल सलोनी छाया भी मैं…हूँ सात सुरों का साथ कभी,कभी पूर्वइया सावन की तो….मीठी-सी धुन गीतों की कभी।हूँ आहट कभी कंपन की…तो कभी हूँ काली छाया भी…नहीं क्या हक़ जीने का मुझे…!या पीछे छोड़ आई … Read more

अब वो बातें नहीं रही

उमेशचन्द यादवबलिया (उत्तरप्रदेश) *************************************************** पहले होती थीं मन की बातें,कट जाती थीं दु:ख की रातें।आया समय,अब लोग स्वार्थी हो गए,मैं ही जग कर क्या करुँ,सब मुँह फिराए सो गए।आओ दिल की बात बताऊँ,बुजुर्ग जो हमसे कह गए,बढ़ गए सबसे आगे जग में वे,जो सत्य राह पर रह गए।मन में घमंड तुम कभी न करना,घमंडी की दुनिया … Read more

मन

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* मन है चंचल अरु आवारा।मन ही होता सबसे न्यारा॥मन पर रखो सदैव नियंत्रण।जीवन में कर लो सब यह प्रण॥ मन होता है इन्द्रिय स्वामी।कहलाता है अन्तर्यामी॥तीव्र चाल मन की ही होती।मिले नहीं अब मन का मोती॥ मन के हारे हार सभी है।जीते मन से नहीं कभी है॥मन को जीत लिया है … Read more