रिमझिम बरसात

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* आई सावन की रिमझिम बरसात,कभी रिमझिम बारिश होतीकभी कभी ओले पड़ते,कभी बुलबुले बनते। देखके बबलू-डबलू हर्षित होते,कभी ओला उठाने जातेकभी बुलबुला पकड़ते,ना पकड़ाया तो रोते। बहुत नटखट हैं वह दोनों भाई,मन ही मन करते हैं चतुराईचुपके से दादी को बोला,ला के दो मुझे बुलबुला। सुनकर के बबलू-डबलू की बातें,दादा बैठे-बैठे मन … Read more

दिया नहीं…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** देश से लिया बहुत,देश को दिया नहीं।देश राग का अमिय,नेह से पिया नहीं॥देश से लिया बहुत…. भू से अन्न था लिया,श्वाँस ली समीर से।जिंदगी बची रही,शुभ्र मधुर नीर से॥ है ये पावनी धरा,गान तो किया नहीं।देश से लिया बहुत,देश को दिया नहीं॥ देश राग का अमिय,नेह से पिया नहीं।देश से लिया बहुत,देश … Read more

भारतीयता के डी.एन.ए. पर राष्ट्रवादी चिंतन

डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदीइंदौर (मध्यप्रदेश)********************************** भारतीय डी.एन.ए. आज चर्चा का विषय बना हुआ है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के अनुसार सभी भारतीयों का डी.एन.ए. एक है,चाहें वो किसी मत के मानने वाले हों। स्वयं के भीतर बाबर का डी.एन.ए. मानने वालों को यह बात कितनी पचेगी यह तो समय ही बतायेगा। भारत ने सदा … Read more

अधिक सोचना ‘पुण्य कर्म’

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ********************************************** इसमें कोई दो राय नहीं है कि,अधिक सोचना निस्संदेह हानिकारक होता है,परंतु जब टक्कर असंख्य बलशालियों व प्रभावशालियों से हो रही हो और जेब में फूटी कौड़ी न हो तो उन परिस्थितियों में मात्र अधिक सोचना और उस पर साहसपूर्ण कार्रवाई करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना … Read more

दर्द का एहसास नहीं

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ जिस दिल में दर्द का एहसास नहीं।उसे अपने-पराये का आभास नहीं। न समाज न परिवार उसका होता,वो तन्हा है बज़्म उसके पास नहीं। जवानी में तन्हा मज़े कर लो तुम,जानो समय रहता हमेशा ख़ास नहीं। जो बिगड़ चुका बुरी लतों में फंसा हुआ,उसे तो सुख हमेशा के लिये रास नहीं। जो माँ-बाप की … Read more

बदरा घिर आए

मनोरमा जोशी ‘मनु’ इंदौर(मध्यप्रदेश)  ***************************************** गगन घन घिरे,पवन फिर उड़ेघटा बन छायो रे,सावन आयो रे। उगेगीं अब नई कोपलें,लहराएगी बेलेंअठखेली कर रही रश्मियाँ,हरियाली खेलेघरती ने श्रृंगार किया है,रुप अनोखा पायो रे।सावन आयो रे… गुन-गुन कर रहीं चिरैया,नया संदेशा लाएभंवरे की गुंजन सुन के,कलियाँ भी मुस्काएफूलों से सज गया बगीचा,राग मल्हार सुनाए रे।सावन आयो रे… चैत की … Read more

डॉ. पुष्करणा के सृजनात्मक सामर्थ्य व समर्पण को नमन करता हूँ-प्रो.खरे

मंडला(मप्र)। सतीशराज पुष्करणा लघुकथा के मसीहा थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लघुकथा को मान्यता दिलाने व प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उनकी सृजनात्मक क्षमता को मैं नमन करता हूँ। नए लघुकथाकारों को भी उन्होंने प्रोत्साहित किया।यह बात मुख्य अतिथि लेखक प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे (म.प्र.)ने कही। अवसर था भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के … Read more

गाँव की याद

आदर्श पाण्डेयमुम्बई (महाराष्ट्र)******************************** हवाएं रुख बदलती है अब गाँव जाने को,घटाएं रुख़ बदलती हैं अब गाँव जाने को। घर-गाँव की वो पावन धरती,खेतों खलिहानों की मिट्टी। हमें बुलाती आज वही,जहां बचपन बीता खेल-कूद। जहां दादा-दादी का शासन,जहां प्यारी माता का आँचल। जहां पिता का मिलता प्यार-दुलार,जहां भाई-बहन का प्रेम अपार। जहां खुशबू बसती फूलों में,जहां … Read more

बेटियों की बात ही निराली

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)**************************************** बेटियों की बात ही निराली है,ये तो लगती ही बहुत प्यारी हैंजब हँसती हैं तो चहचहाता सारा उपवन,जीवन की हर कठिनाई कोहम हँसते-हँसते सह जाती हैं।फिर भी लोग हमें ‘अबला’ नारी कहते,पिता के घर की रौनक हैं हमतो पति के घर का सम्मान हैं,दो-दो घरों को सजाती हैंबंश बेल को बढ़ाती हैं।हम … Read more

बूढ़ी दादी

ऋचा सिन्हानवी मुंबई(महाराष्ट्र)************************************* ये बुज़ुर्गीयत भी एक अभिशाप है,रूह को तार-तार करती ये कथा हैएक बूढ़ी दादी रहती थी तनहा,दो बेटे थे-दोनों परदेसदादी ने पढ़ाया-लिखाया,लायक़ बनायापर क्या पता था कि बेटे,नहीं रहेंगे देसवो तो छेद भागेंगे परदेस।बूढ़ी दादी टकटकी लगाए,सुबह से रात बैठी रहती अपने द्वारपर पैसे आते-बेटे ना आते,और चिट्ठी में प्यारहर चिट्ठी को … Read more