एक मुसाफिर लिए तिरंगा

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************* एक हाथ में लिए तिरंगा दूजा वेद कुरान लिए,एक मुसाफिर घूम रहा है दिल में हिंदुस्तान लिए। जन हित निज सर्वस्व छोड़ जो देश-देश में भटक रहा,जाता उसी देश में जिसमें काम हमारा अटक रहाबना रहा है दोस्त सभी को भारत भू के उपवन का,सब पर रंग चढ़ा देता है तीन … Read more

आशियाँ

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** जब सुवर्णी भोर आती है,बादल झुंड कहीं छुप जाता हैजब भी नीरव पवन गाती है,और जब बारिश नहीं भाती हैतब भी अच्छे लगते हैं मुझे,मेरे घर अब गौरैया चहचहाती है।छज्जे,रोशनदान,खिड़की,कभी ग्रिल और जाली बीचकुछ सूखे पत्ते-कचरा लिए,कचरा नहीं,थोड़ा-सा ईंट-गारा टीन-टप्परइक आशियाँ तैयार करती है।क्या कमाती कैसे खाती…मालूम नहीं,कहां जाती है पता नहीं परजाते-जाते … Read more

मरे चूहे को घसीटता पाक

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद और ‘इस्लामी सहयोग संगठन’ (आईआईसी) में कश्मीर का मुद्दा फिर से उठा दिया है। पाक प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि कश्मीर में मानव अधिकारों का उल्लंघन कहाँ-कहाँ और कैसे-कैसे हो रहा है ? इस समय कश्मीर के लगभग सभी नजरबंद नेताओं को मुक्त कर … Read more

फिर आओ मोहन…

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** पाप कर्म हर ओर है फैला,झूठ अधर्म से हृदय है मैलाबिछे राह में कितने कंटक,चहुँओर विश्वास का संकटमन में अज्ञानता का अंधेरा,लालच ने किया तेरा-मेराअहंकार रावण-सा खड़ा है,स्वार्थ त्याग से हुआ बड़ा है।घायल हुए सबके तन-मन,एक बार फिर आओ मोहन…॥ मुरली की वो तान कहाँ है,वृंदावन का ध्यान कहाँ हैगोधूलि … Read more

नयना तुम्हारे बोल पड़ते हैं

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) ***************************************** अँधेरे मुस्कुराते हैं उजाले बोल पड़ते हैं।वो जब तशरीफ़ लाते हैं तो रस्ते बोल पड़ते हैं। सितम ‘की इन्तिहा होने पे गूँगे बोल पड़ते हैं।परिन्दे ‘फड़फड़ाते हैं तो पिंजरे बोल पड़ते हैं। तुम्हारे ह़ुस्ने ज़ेबा की झलक पाते ही ऐ दिलबर,निगाहें ‘रक़्स करती हैं नज़ारे बोल पड़ते हैं। हम अपनी हार … Read more

गहरे घाव

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* रोदन करती आज दिशाएं,मौसम पर पहरे हैं।अपनों ने जो सौंपे हैं वो,घाव बहुत गहरे हैं॥ बढ़ता जाता दर्द नित्य ही,संतापों का मेलाकहने को है भीड़,हक़ीक़त,में हर एक अकेला।रौनक तो अब शेष रही ना,बादल भी ठहरे हैं,अपनों ने जो सौंपे वो,घाव बहुत गहरे हैं…॥ मायूसी है,बढ़ी हताशा,शुष्क हुआ हर मुखड़ाजिसका भी … Read more

गुजरात:आईना ही बदल डाला…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** गुजरात में भाजपा ने पूरा मं‍त्रिमंडल तो क्या आईना ही बदल डाला है। इस महाबदलाव में कई खतरे निहित हैं। बड़ी कामयाबी और उससे भी बड़ी नाकामयाबी के भी। भाजपा का गढ़ बन चुके गुजरात में नए और पहली बार मुख्‍यमंत्री बने भूपेन्द्र पटेल के मंत्रिमंडल में ‘पूरे घर के बदल डालूंगा’ … Read more

पुरानी किताब की खुशबू

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** आज किताब के पन्नेउलट कर देख रहा हूँ,जो पीले पड़ गए हैं,कहीं-कहीं परनीली स्याही सेफैल गए हैं।सुंदर अक्षरजो कभी हुआ करते थे मोती,किताब के शुरू में हीजो लिखा हुआ था मेरा नामअब हल्का पड़ चुका है।कोने से जो कुतरी हैचूहों ने किताब,उसकी कतरनबिखरी हुई है फ़र्श पर,सम्भाल कर उठानी पड़ रही … Read more

‘आप अनपढ़ हो…?’

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** आज तक मैंने जिस कार्यालय में भी काम किया है,वहाँ यह कोशिश की कि लोग अंग्रेजी का मोह त्याग सकें और हिंदी को प्रोत्साहन मिले। एक कार्यालय में जनसंपर्क बहुत ज्यादा होता था। आजकल लोगों को अंग्रेजी बोलने का कुछ ज्यादा ही शौक चर्राया हुआ है। जो आता…चटर-पटर अंग्रेजी में बोलता। मैं … Read more

दुष्कर्म:जागरूकता के साथ पारिवारिक सहयोग आवश्यक

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** जितने हम सभ्य बनते जा रहे हैं,उतने अधिक हम असभ्य हो गए हैं। विरुद्ध लिंग के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक है,पर आजकल इसने रोग का रूप ले लिया है़। इसने इतनी विद्रूपता का रूप धारण कर लिया है़ कि,नारी अब घर में भी सुरक्षित नहीं है। यौनाचार के प्रकरण घर में और निजीयों … Read more