हे सूरज
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)***************************************** सुबह के सूरज सेआँख मिला कर की बातें,दोपहर के सूरज सेनहीं कर सकते बातें,सबने उसे सर चढ़ा रखा। अभिमानी इंसानदीया भी दिखा नहीं सकते,क्योंकि सूरज नेउनकी परछाई का कद,कर रखा है छोटा। हर रोज की तरहहोती विदाई सूरज की,सूर्यास्त होता ये भ्रमपाले हुए है वर्षों से। पृथ्वी के झूले मेंऋतु चक्र का … Read more