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फैल रही दूधिया चाँदनी
ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** फैल रही दूधिया चाँदनी,पूर्ण चन्द्र सुहावनी,पँख लगा मन उड़ पहुँचा,गगन पार उड़ावनी।देख रही धरती आनंदित,शीश तारे छाँव में-तारा मंडल बन सरिता सर,दीपदान मन भावनी॥ जनम-जनम साध हुई पूरी,मैं बनू मधु मानिनी,कभी-कभी रथ शशि की बैठूँ,बनती दिव्य दामिनी।निहारिका तक लम्बी पींगें,पुलकित है वसुंधरा-पांव फैला पवन हिंडोले,छेड़ूँ प्रेम रागिनी॥ सर-सर करते पवन झकोरे,संग देती ताल … Read more
साँसों की डोर
रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ये साँसों की है डोरें न पकड़ी गई।किसी से भी मोहरें न जकड़ी गई। अता न हो सकेगी नेमतें ख़ुदा की,आँखों की ये कोरें न सूखी गई। किसको सुनाऊँ मैं हाले दिल सभी,बात दिल की किसी से न बोली गई। अश्क़ आँखों से भी छुपाते रहे हम तो,दास्तानें ग़मों की न खोली गई। … Read more
याद उन्हें तुम हर पल करना
आचार्य गोपाल जी ‘आजाद अकेला बरबीघा वाले’शेखपुरा(बिहार)********************************************* याद उन्हें तुम हर पल करना जो मौत से भी लड़ रहे हैं,निज सुखों को कर न्योछावर प्राण मनुज का गढ़ रहे हैं। जब कभी भी आई आफत हमने स्वयं को लिया छुपा,वो अस्पतालों में कभी तो कभी सीमा पर लड़ रहे हैं। नित प्रात: संध्या सह सदा … Read more
पहले साफ करो मन
डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** मुझसे भी न जाने बड़े-बड़े,हैं कितने सारे रावण खड़े। अतिअत्याचारी व्यभिचारी,बलात्कारी अतिभ्रष्टाचारी। वो क्यूँ पूजे जाते हैं फिर,क्यूँ मेरे काटे जाते हैं सिर। उनको भी फिर मारो तीर,वो भी जानें होती क्या पीर। लाख थी मुझमें खूब बुराई,पर नहीं कभी रोटी चुराई। न ही किसी का पेट काटा,न पशुओं का … Read more
प्रकृति का प्रहार
डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** उत्तराखंड हों या पहाड़ी प्रदेश,जगह-जगह है विनाश का सन्देश। कारण तो जानना है जरूरी यहां,क्यों है यह वक्त की मजबूरी ? क्यों पहाड़ों पर है गर्जन,क्यों ग्लेशियर में हैं कम्पन ? यह तो यहां उठता है एक यक्ष प्रश्न,जिसे समझना है खुद से जैसे अन्तर्मन। आखिर है इसमें किसका कमाल,प्रकृति बन रही है क्यों … Read more
काव्य कुसुम बिखराएंगे
डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** रचनाशिल्प:ताटंक छंद- ३० मात्रा,१६-१४ पर यति,पदांत २२२ सदा दूसरों के हित अपनी,कौशलता दिखलाएंगे।दया प्रेम सौहार्द्र शांति के,काव्य कुसुम बिखराएंगे॥ काव्य सरस मधुमय शब्दों की,मधुर लयबद्धता होगी।रस छंद व भाव सुरों की,सजी क्रमबद्धता होगी॥परदुख करुणा भाव रश्मि से,रसिक काव्यगुण गाएंगे।दया प्रेम सौहार्द्र शांति के,काव्य कुसुम बिखराएंगे॥ निकले कोई भाव न ऐसा,हृदय ठेस … Read more
वो हमें याद है…
संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** मन आज बहुत उदास है,दिल में आज भी प्यास हैकैसे कहें हम उनको,कि हमें तुमसे प्यार हैमिले हुए वर्षों बीत गए,पर बात दिल की कह न सकेउम्र के इस पड़ाव पर भी,वो हमें याद हैकहाँ है और कैसे होंगे,कुछ भी नहीं है पता। जब भी तन्हा होता हूँ,उनके बारे में सोचता हूँक्योंकि,बोली … Read more
उन्मुक्त हँसी…
एम.एल. नत्थानीरायपुर(छत्तीसगढ़)*************************************** आज हँसना भी कठिनकाम में शुमार हो गया है,झूठ के संसार में सच्चाईबचाना गुबार हो गया है। उन्मुक्त हँसी के ठहाकेअतीत की बातें हो गई है,मुस्कुराता चेहरा देखकरयह पुरानी यादें हो गई है। जीवन के भ्रम में जीनेको यह सारा संसार है,हँसी-खुशी से रहना भीआज फिर से दुश्वार है। सच्चाई के धरातल पररहना … Read more