शीत में इस अगन बन के
ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** रचना शिल्प:२१२२ २१२२….. तुम सुबह की किरन बन के,और मध्यम पवन बन केतोड़ सीमा आज आओ,शीत में इस अगन बन के। पुंज प्रकाशित शिखर लौ,दिव्य मेरे मुख चमक तुमदीप की ये ज्योति अनुपम,शब्द तुम मै बयन बन के। हंस तुम आकाश उड़ते,पांख मैं तुझमें लगी सीपार नभ के उड़ चले हम,साथ मेरे … Read more