जीवन का सत्य
राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** जब मैं दुनिया में आया,हुआ हताश खूब रोयाफिर किया मैंने सवाल,कहाँ-कहाँ आया कहाँ। सवालों की चिंता छोड़,सभी मना रहे थे खुशीसब ही कर रहे थे दौड़,मुख में लिए हुए हँसी। सबको देख मैं भी भूला,संसारिक रंग मुझमें घुलाकहाँ से मैं क्यों कर आया,उद्देश्य पीछे छूटता गया। पुनः कुछ दिन के … Read more