बरसात…अभी आओ ना

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** भरी बरसात का मौसम है,अभी जाओ ना,यही तो प्यार का मौसम है,अभी जाओ ना। जला रही है ये बूँदें सुनो अंतस मेरा,मुझे यूँ छोड़ अकेले तो अभी जाओ ना। घटाएं छा रही ये बिजलियाँ डराती हैं,न जाओ छोड़ के यूँ,लौट के आ जाओ ना। बिना तुम्हारे ये सावन मैं गुजारूँ कैसे,जान … Read more

पिता आप भगवान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************** आनंदित कुल पूत पिता पा,किया समर्पित जान सदा है।पिता त्याग सुख शान्ति जिंदगी,पूरण सुत अरमान लगा है। लौकिक झंझावात सहनकर,पिता सदा चुपचाप सहा है।धूप वृष्टि या शीत विषमता,यायावर संताप सहा है। पूत चढ़े सोपान लक्ष्य पथ,पिता सतत अपमान सहा है।कर्ता-भर्ता जनक तनय बन,स्नेह सलिल सन्तति सींचा है। संवाहक परिवार … Read more

लड़ता है खुद जंग हमेशा

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** अंदर ही अंदर घुटता है,पर ख्वाहिशें पूरा करता हैदिखता ऊपर से कठोर,पर अंदर नरम दिल होता हैऐसा एक पिता हो सकता है। कितना वो संघर्ष है करता,पर उफ किसी से नहीं करतालड़ता है खुद जंग हमेशा,पर शामिल किसी को नहीं करताजीत पर खुश सबको करता है,पर हार किसी से साझा न करताऐसा … Read more

भारत भू के कर्णधार

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* सरहद प्रहरी सैनिक कुमार,मेरे उपवन की नव बहार,भारत माता के शांति दूत,हे भारत भू के कर्णधार। उत्थान-पतन से दूर रहो,भौतिक सुख की ना चाह रखो,तुम सैनिक सदा जटिल पथ के,हरदम दुगना उत्साह रखो।टिक सके न सम्मुख कोई भी,तुम रण सज्जित हो बार-बार,हे भारत भू के कर्णधार…॥ क्या चिंता कुपित दृष्टि की … Read more

योग का कोई विकल्प नहीं

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ********************************************** विश्व योग दिवस विशेष ‘तन-मन को जो स्वस्थ कर,दे चोखे आयाम।योग प्रबल इक शक्ति है,देती नव परिणाम॥’सामान्य भाव में योग का अर्थ है जुड़ना,यानी दो तत्वों का मिलन योग कहलाता है। आत्मा का परमात्मा से जुड़ना यहां अभीष्ट है। योग की पूर्णता इसी में है कि जीव भाव में पड़ा … Read more

कुरीति:सब मिल करें प्रतिज्ञा

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** सारे मानव एक जगत के,विश्व एक परिवार है।चाहे-अनचाहे,सुख-दुःख में,हम सब साझेदार हैं॥ जितनी बड़ी सृष्टि यह सारी,उतनी बड़ी समस्याएं।रीति-रिवाजों में घुस बैठीं,रुढ़िवादी परम्पराएं॥ इस दहेज ने जला दिया है,कितनी क्यारी,फुलवारी ?करवट बदल-बदल कर जागीं,कितनी आशा,सुकुमारी॥ कहीं-कहीं तो महिलाओं को,केवल भोग्य बना दिया।बच्चे जनने की मशीन है,ऐसा लेवल लगा दिया॥ बुर्के के पीछे … Read more

हरीतिमा हर दिशा

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ********************************** रचनाशिल्प:मात्राभार -२८(१६/१२),यति-२२ वर्षा आई रिमझिम-रिमझिम,ले आई हरियाली।सावन के स्वागत में देखो,झुकी फलों से डाली॥ घटा घनन-घन घिर-घिर आए,चम-चम चपला चमके।झम-झम झरती झर-झर वर्षा,दामिनी दम-दम दमके।हरीतिमा हर दिशा सुहाई,बहता जल नद-नाली।सावन के स्वागत में देखो,झुकी फलों से डाली॥ शैल सुहाने सुंदर शिखरों,से झर-झरने झरते।मधुर मनोहर मोहक मंगल,मधुबन मधुरस भरते।बनी वाटिका विमल बिरंगी,मधु … Read more

तुम प्रतिध्वनि उठाते हो

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. अगर मैं गीत गाती हूँ,तो तुम प्रतिध्वनि उठाते होतुम्हारी याद के गायन,तुम्हीं मुझको सुनाते हो। मुझे लगता कि तुमको भी,मेरी यादें सताती हैंइसी से गीत की कड़ियाँ,लौट हर बार आती हैं।सदा तुम गीत को मेरे,गीत अपना बनाते हो। मैं गा-गाकर बुलाती हूँ,नहीं तुम पास में आतेतुम्हारे ये अपरिचित … Read more

पल्लवित रिश्ते

सुखमिला अग्रवाल ‘भूमिजा’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************* विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. हो अपनेपन की मिठास,पल्लवित होते हैं रिश्ते,मधुर सौम्य वातावरण में ही,खिलते हैं प्यारे रिश्ते। जहां मधुर हो संबंधों का ताना-बाना,उन परिवारों में रहता है समय सदा सुहाना। आपस में सौहार्द पूर्ण रहते हैं जहां हिल-मिलकर,वो बगिया खिली-खिली,खुशियां रहती है मण-मण भर। खुशी का टॉनिक पाकर रिश्ते भी … Read more

चलो प्रेम-सौहार्द बढ़ाएं

मनोरमा जोशी ‘मनु’ इंदौर(मध्यप्रदेश)  ***************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. चलो प्रेम सौहार्द बढ़ाएं,सबको अपना बनाकरनए जगत में नई कल्पना,आओ हम साकार बनाएं।हृदय-हृदय प्रेम दीप जलें,अंतर का अज्ञान मिटा देंनयन-नयन में प्रेम-सौहार्द,की जोत जला दें।सबको दें विश्वास लक्ष्य का,और सतत चलने का साहसज्योति ऐसी भरें जीवन में,कभी न आए गहन अमावस।जड़ चेतन करें मूक में,वाणी भर … Read more