जल है तो कल है

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** जल ही जीवन है,जल है तो कल है,जल सबका ही हल,जल कल बल है। जल से सरिता बहै,जल के बादल है,जल के कुंए-ताल,जल का नल है। जल की गंगा-यमुना,गोमती चंबल है,गोदावरी-घाघरा,बह रही छलाछल है। गहरा प्रतीक होता मान का जल है,पानी उतर जाना इज्जत का जल है। सवाल स्वाभिमान का बताता … Read more

साहित्यिक संस्था द्वारा २१ पौधे भेंट

इंदौर (मप्र)। प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए अपने कर्त्तव्यों का पालन करने की दिशा में साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ‘नई क़लम’ द्वारा श्री गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज सांस्कृतिक संगठन इंदौर द्वारा संरक्षित महर्षि गौतम उद्यान को २१ पौधे भेंट किए गए। संस्था की ओर से कवि जितेन्द्र राज,कवि विनोद सोनगीर व ग़ज़लकार आतिश … Read more

स्वर्ग धरती आ रहा है

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************** लोक में परलोक का नक्शा उतारा जा रहा है।देवता भयभीत हैं कि स्वर्ग धरती आ रहा है॥ अब हवाएं मौन होंगी,नीड़ निगलेगी न आँधी,यातनाएं गौण होंगी,खून बेचेगी न खादी।गीत जन गण देवता के खुद हिमालय गा रहा है,लोक में परलोक का नक्शा उतारा जा रहा है…॥ भूख से होंगी न मौतें,शांति … Read more

पायल

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************** पायल की झनकार से,दिल होता बेचैन।आँखों में सपने सजे,चैन नहीं दिन रैन॥चैन नहीं दिन रैन,सताती उसकी यादें।आती उसकी याद,किये जो उसने वादे॥कहे ‘विनायक राज’,प्रीत से होते घायल।छम-छम की आवाज,पाँव में बजती पायल॥

बासंती बयार

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* हे मलयज बासंती बयार,सच बता कहां से आई है ?प्रियतम की गली से आई है,या प्रिय को छूकर आई है। बतियाते थे जब हम दोनों,तू संगीत मधुर बजाती थी।चलती थी हे पवन सनन सन,मानो प्रणय गीत गाती थी॥ फिर आज वही संगीत सुना,मौसम ने ली अंगड़ाई है।प्रियतम की गली से आई है,या … Read more

विश्व-संस्था में भारत को नया मौका

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ऐसी संस्था है, जो सबसे शक्तिशाली है। इसके ५ सदस्य स्थायी हैं-अमेरिका,ब्रिटेन,फ्रांस,रूस और चीन। इन पांचों सदस्यों को ‘वीटो’ का अधिकार है। अर्थात यदि इनमें से १ भी किसी प्रस्ताव का विरोध कर दे तो वह पारित नहीं हो सकता। इन ५ के अलावा १० साधारण … Read more

सबके दाता राम

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** यदि आपकी सर्वशक्तिमान प्रभु के प्रति अटूट आस्था है और आप समर्पित हैं तो आप यह मान कर चलें कि आपको मनोवांछित फल वे अवश्यमेव प्रदान करेंगे। इस तरह की अनेक सत्य घटनाओं से इतिहास भरा पड़ा है। मैं स्वयं इसका साक्षी हूँ। इसी कड़ी में परमश्रद्धेय स्वामीजी श्री रामसुखदासजी महाराज … Read more

जातिगत आरक्षण का खेल घातक

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** आज जहां देश को ‘सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास’ वाली राजनीतिक व्यवस्था की महती आवश्यकता है,एवं जाति,पंथ,मजहब आधारित चली आ रही पद्धति के खात्मे की जरूरत है,वहीं जातिगत आरक्षण का खेल निश्चित ही देश के लिए घातक है। ऐसी स्थिति में पिछड़ा वर्ग को इसकी गंभीरता को समझना होगा। ये संख्या,ज्ञान,बुद्धि,धन,देशभक्ति,बाहुबल … Read more

सोच समय की

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’बूंदी (राजस्थान)************************************************** ऐ मन…,सोच फिर ऐसीक्यों सोचे,जो संभावनाओं से परे है।सोच कर ही जिसको,न जाने क्यों…?हर मन,मन ही मन डरे है।सुख के आँचल में,दु:ख की प्रतिछाया काही सारा कारण है।ऐसी सोच से,तेरी बेचैनी भी तोबिना कोई,सही कारण है।कुत्सित संभावनाओंको हमेशा कुरेदना,कहाँ अच्छा होता है ?सुख के आँचल मेंही तो मुँह ढक … Read more

खत…इंतजार

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** क्या होते थे उस समय के,खत हमारे और तुम्हारे लिएपर समय परिवर्तन ने किया,कुछ इस तरह का खेलबंद होने लगा पत्रों को,लिखने का वो दौरक्योंकि आ गए हैं अब,संचार के नए उपकरणजिसके कारण स्नेह-प्रेमभाव,और आत्मीयता मिट रही है। क्या दौर हुआ करता था,जब दिल की बातें कहनेसुख-दु:ख और बातें बताने के लिए,हाथ … Read more