दोस्ती से ही हर खुशी

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* दोस्त है जिंदगी में तो आँख नम नहीं है,दोस्त साथ तो हर खुशी,कोई गम नहीं है।बारिश में भी जान लेते आँख के आँसू-यह वो पूँजी,जो किसी से कहीं कम नहीं है॥ एक सच्चा दोस्त सौ रिश्तों समान है,मुसीबत में मानो दोस्त,कोई भगवान है।मित्रता तो मानो कोई,वरदान हो ईश्वर का-दोस्त ही काम आता,होता … Read more

साजन विरह नैन मैं भी बरसूँ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *************************************** इन बारिश की बूंदों में भीगूं,तन मन प्रीति हृदय गुलज़ार बनूँ।पलकों में छिपा मृगनैन नशा प्रिय,मुस्कान चपल अधर इज़हार करूँ। दूज चन्द्रकला सम मधु प्रीति नवल,घनश्याम मेघ सजन को तड़पाऊं।रजनीकांत प्रभा खिल व्योम हृदय,रजनीगंधा सजनी बन महकाऊं। रिमझिम फूहार अभिसारिका मदन,भीग गात्र चारु यौवन इठलाऊं।रति ताप पयोधर मदमत्त युगल,बिन … Read more

दोस्ती

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* दोस्ती से बड़ा अब तराना नहीं।हाल जैसा भी हो तुम भुलाना नहीं। जिंदगी कब तलक बीत जाये यहाँ,याद रखना चलेगा बहाना नहीं। तुम सुदामा भले मित्र हो कृष्ण-सा,दुश्मनों की तरह तुम निभाना नहीं। ये जमाना कभी साथ देते कहाँ,दोस्ती इसलिए भूल जाना नहीं। यार यारी निभाना ‘विनायक’ यहाँ,मायने दोस्ती का … Read more

भारत माँ के लाल

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** पग-पग पर कांटे पड़े,चलना तुमको पड़ेगाभारत के अंग कश्मीर को,तिरंगे में समाना होगाऔर मंजिल से भटके हुए,लोगों को समझाना होगा।और मिलकर भारत की,एकता को दिखलाना पड़ेगा॥ घायल और लहूलुहान हुए सीने,उसका हमें कोई गम नहीं हैकैसे कराएं कश्मीर को,आतंकवादियों से हम मुक्तलिया ये संकल्प अब हमने,चाहे जाएं इसमें प्राण हमारे।पर कदमों को … Read more

वक्त

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** वक्त को जो मिला हमसे कभी,रखता नहीं है,हाल जो भी बना करते हमें,देता वही है। रहगुज़र में बने हालात जो,सब हैं इसी के,सुख कहाँ,दु:ख कहाँ देना करे निर्णय सही है। साथ कोई न रहता इस तरह,साँसों का बन के,जिन्दगी तो गुजर जाती मगर,रहता यही है। हर घड़ी खुद को … Read more

प्रेमचंद की रचनाओं के केन्द्र में स्वराज,स्वदेशी, स्वशासन-प्रो. शुक्ल

वर्धा (महाराष्ट्र)। प्रेमचंद अपने वैचारिक लेखन में स्वराज,स्वदेशी,स्वशासन, स्वाधीनता की बात करते हैं। राष्ट्र और समाज की स्वतंत्रता के सिपाही के रूप में अभी प्रेमचंद को विस्तार से देखा जाना जरूरी है। प्रेमचंद का नवजागरण भारतीय दृष्टि से ओतप्रोत है। कलम बंद नहीं होगी,नाम बदल होगी प्रेमचंद का यह संकल्प राजनीतिक और मानसिक पराधीनता से … Read more

जाने-अनजाने रिश्ते

तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** बहुत मुश्किल से,बनते हैं येपाक-पवित्र रिश्ते,बहुत अहमियतरखते हैंजीवन में,कभी-कभी येकुछ जाने-अनजाने रिश्ते। खून के नहीं,अपनेपन के होते हैंतन के नहीं,मन के होते हैंये अनमोल रिश्ते,बिना जोड़े हीजुड़ जाते हैं ये,कुछ जाने-अनजाने रिश्ते। कुछ नाम,नहीं होताइन रिश्तों का,अनाम येरिश्ते होते हैं,जीवन में देते हैंखुशियां की दस्तक,कुछ जाने-अनजाने रिश्ते। ख़ुदा की,रहमत समझो यापुण्य कर्मों … Read more

शब्दों का संसार

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* शब्दों का संसार सदियों से,विभिन्न रूप में है जन्माबड़ी भव्य बेला वो होगी,जब काव्य शब्द मनु बोले। शब्दों का संसार अनुपम,जोडे़ हृदय से हृदय स्नेहभावों की बहती ये गंगा,अमृत-सा अधर जब बोले। शब्दों का संसार विष सा,जो क्रोधाग्नि में मन तोडे़चुभन दे तीरों-सी,घाव,अति बैर जो बेहाल हो ले। शब्दों का … Read more

आहट

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)**************************************** जरा-सी आहट से चौंक जाती हूँ,लगता है तुम होगे आस-पासपर जब देखती हूँ,तुम क्या तुम्हारीपरछाई भी नहीं मेरे पास।याद आते हैं वह लम्हे,जो गुजारे थे तुमने और मैंनेयाद आते हैं वह पल,जब चूम लेते थे मेरी पलकों को।याद आता है वह हाथों का स्पर्श,जब सहलाते थे मेरे गालों कोमैं हो जाती थी … Read more

आज़ादी के परवानों का सम्मान करो…

क्रिश बिस्वालनवी मुंबई(महाराष्ट्र)******************************** युग बदल गया और फ़िर चरखे का चक्र चला,फ़िर काला शासन ढकने चला श्वेत खादी।खूंखार शासकों की खूनी तलवारों से,बापू ने हँस कर मांगी अपनी आजादी।जो चरण चल पड़े आजादी की राहों पर,वो रुके न क्षणभर,धूप,धुआं,अंगारों सेउठ गया तिरंगा एक बार जिसके कर में,वो झुका न तिल भर गोली की बौछारों से।इसीलिए … Read more