आन बसे क्यों नदी किनारे ?

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************** मिट्टी का घर कांप रहा है,पानी ढो-ढो थके पनारे।तीखी वर्षा के हमलों से,रोते पाये छान उसारे॥ दुश्मन दिखती तेज हवाएं,बरखा अब दहशत फैलाये,धरती पर पानी ही पानी,डूबे गाँव गली चौबारे॥ नदी क्षेत्र में गाँव हमारा,नीची बस्ती तरफ किनारा,रूह कांपती देख देख कर ,नदिया खड़े हिलोरे मारे। आले-खिड़की सब गीले हैं,गद्दे बिस्तर … Read more

माँ ही चारों धाम

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** रचना शिल्प:१६-११ पर यति, पदांत २,१….. माँ से कोई बड़ा न जग में,चरणन करूँ प्रनाम।माता जग में सुंदर मूरत,माँ ही चारों धाम॥ माँ ही सबसे पहली गुरु है,ममता देती प्यार।दया प्रेम ममता है माता,माँ ही शिशु संसार॥माता ही दौड़े आती है,दु:ख में छोड़े काम।माता जग में सुंदर मूरत,माँ ही चारों धाम॥ … Read more

काजल

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)*************************************** सुंदरता की चाह में,काजल आँजे नैन।हिरनी जैसी देखती,कुछ नहिँ बोले बैन॥कुछ नहिँ बोले बैन,आँख से सब कुछ कहती।दिल में हरदम प्यार,सजाकर वो ही रहती॥कहे ‘विनायक राज’,देख मन मेरा भरता।नारी रूप निहार,लगे कितनी सुंदरता॥

मेरे प्रभु राम

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* मेरे शुभचिंतक प्रभु राम हैं,मेरे पूज्य पिता श्रीराम हैंपूजन करुँगी राम का,भजन करुँ राम काचरण धूली सिर,पर मैं रखूँगीहाथ जोड़विनतीकरुँमैं।‌ ‌जल्दी सिंहासन पर बैठो राम,होगा पूरण सबका काममझधार में पड़ी है अब,नइया हे प्रभु हमारीआप मेरी नैया का,खेवनहारा होकरा दो आप,भवसागरपार हे,राम। मन बेचैन है श्रीराम के दर्शन को,कब जन-जन की … Read more

संसदःपक्ष और विपक्ष का अतिवाद

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* संसद का यह वर्षाकालीन सत्र अत्यधिक महत्वपूर्ण होना था लेकिन वह प्रतिदिन निरर्थकता की ओर बढ़ता चला जा रहा है। कोरोना महामारी, बेरोजगारी,अफगान-संकट,भारत-चीन विवाद,जातिय जनगणना आदि कई मुद्दों पर सार्थक संसदीय बहस की उम्मीद थी लेकिन पेगासस जासूसी कांड इस सत्र को ही लील गया है। लगभग २ सप्ताह से दोनों सदनों … Read more

याद करो उन जाँबाजों को

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* याद करो उन जाँबाजों को,भारत माँ की संतानों कोराष्ट्र के उन जलते शोलों को,बगिया के सुंदर फूलों कोजो खिल न सके उजड़ गए,दूर अपनों से बिछड़ गएजाते-जाते देखा न पलट कर,विदा हुए तिरंगे में लिपटकरवो लौटकर कभी न आएंगे,आज हम गीत उन्हीं के गाएंगे…। उम्र में भी वो थे कितने … Read more

वास्तव में अत्यंत निंदनीय

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)****************************************** मुद्दा-ऑक्सीजन की कमी कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि,महाभारत काल बहुत विकसित रहा। कारण संजय ने अपने राजा को युद्ध की सब घटनाएं नित्य प्रति सुनाई और राजा को लग रहा था कि में स्वयं मैदान में रहकर साक्षात् युद्ध देख रहा हूँ। इसके अलावा धृतराष्ट्र को पूरे राज्य के घटनाक्रम … Read more

अच्छे विद्यालय,अच्छे गुरु और अच्छा स्नेह मिला

सविता धरनदिया(पश्चिम बंगाल)**************************** मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष….. ‘विद्यार्थी’ २ शब्दों के मेल से बना है-विद्या व अर्थी। विद्या का अर्थ हुआ ज्ञान और अर्थी माने चाहने वाला। देश का एक अच्छा नागरिक हम तभी हो सकते हैं,जब हम अपने अध्ययनकाल में अच्छे विद्यार्थी होंगे। ऐसे ही मेरा विद्यार्थी जीवन बहुत अच्छा था। बचपन से … Read more

कब आओगे साजन

नरेंद्र श्रीवास्तवगाडरवारा( मध्यप्रदेश)**************************************** घर,आँगन,गलियाँ,चौराहे,सूने-सूने लगते हैं।वापस कब आओगे साजन,राह तुम्हारी तकते हैं॥ चिड़ियाँ फुदकें आँगन में आ,पहले जैसी बात नहीं।खिलें फूल खुशबू भी देते,उसमें वैसी रास नहीं।पवन झकोरे मद्धिम-मद्धिम,बेमन-बेमन बहते हैं,घर,आँगन,गलियाँ,…॥ सूरज रहता है दिनभर पर,ना बोले,ना बतियाये।हाल रात का भी ऐसा है,लगे,अश्क़ अब झलकाये।चाँद,सितारे गुमसुम बैठे,खोये-खोये रहते हैं,घर,आँगन,गलियाँ,…॥ चारों तरफ उदासी पसरी,दूर-दूर तक तनहाई।हूक … Read more

यहीं कहीं कैलाश में

संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** यही कहीं कैलाश मेंआत्म चहक रही मेरी,सावन की बरसात में-मिट्टी महक रही मेरी। प्रीत में शीत नहींजीवन में जीत नहीं,हार जाऊं बन हार मैं-लिपट गले महकूं तेरे। स्पर्श पवन पा रहीतरंग उर समा रही,त्वरित मिलन को देह-नित बहका रही मेरी। महेश हो,मधमहेश होतांडव कारी परमेश हो,त्राहिमाम पापों की-आत्म मांग रही मेरी। आषुतोष,शशांक … Read more