यह शहर है
डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** यह शहर है,यह शहर है कोलाहल का संसार,हरपल-हरदम है यहां हाहाकार।सड़कों पर दिखती अपार भीड़,सब हैं दिखते जैसे एक कर्मवीर।भाग-दौड़ है इसकी पहचान,नहीं दिखते जैसे हों इन्सान।यह शहर है…! नहीं है रिश्तों में यहां मिठास,अपनेपन का नहीं होता अहसास।माता-पिता का यहां ठौर नहीं,एकल परिवार का शौर्य यही।अपनापन है बेमानी दिखती,सबसे सब अनजानी दिखती।यह शहर … Read more