तेरे मीठे बोल ही याद आएंगें
एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* चार दिन की जिन्दगी फिर अंधेरा पाख है,फिर खत्म कहानी और बचेगा धुंआ राख है।अच्छे कर्मों से ही यादों में रहता है आदमी-तेरे अच्छे बोल व्यवहार से ही बनती साख है॥ कब किससे कैसे बोलना,यह मानना बहुत जरूरी है,इस बुद्धि-कौशल कला को,जानना बहुत जरूरी है।शब्द तीर हैं कमान हैं,देते हैं घाव गहरा … Read more