हिय की हर पीर हरूँ मैं
सुदामा दुबे सीहोर(मध्यप्रदेश) ******************************************* नित नूतन नव शब्दों का श्रृंगार करूँ मैं,स्वर के सुरीले रागों का आधार धरूँ मैं।विधि की बनी हुई सृष्टि की छवियों में,भाँति-भाँति के सुंदर से नित रंग भरूँ मैं॥ रंक भूप में भेद नहीं कोई करता हूँ,समदर्शी-सा एक नजर से देखे रहूँ मैं।दीन-हीन की सदियों से मैं आवाज रहा,लिख कर उनके हिय … Read more