कविता से सम्मान

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कविता में कवि प्राण है,कविता में ही जान है। कविता से सम्मान है,कविता से पहचान है। कविता मेरी आत्मा है,कविता ही परमात्मा है। कविता ही मेरी तरंग है,इसके बिना कवि बे-रंग है। जहां न दिखे कहीं कुछ,कवि को दिखे सब-कुछ। कविता में ही समाधान है,कल्पनाओं की उड़ान है। हृदय में उठता तूफान … Read more

हँसते-हँसते फाँसी को गले लगाया

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ‘शहीद दिवस विशेष’ (२३ मार्च)… ‘२३ मार्च’ इस दिन भारत के ३ सपूतों शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश के लिए हँसते-हँसते फाँसी की सजा को गले लगा लिया था। उनकी शहादत को देश का हर नागरिक सच्चे दिल से नमन करता है।भारत में शहीदों के सम्मान और देश के … Read more

नमन करे देश

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘शहीद दिवस विशेष’ (२३ मार्च)… नमन करे देश,उन सपूतों कोजिन्होंनेजीवन का बलिदान किया,त्याग-तपस्या से अपना जीवनमातृभूमि को अर्पण किया। नमन करे देश,उन सपूतों कोजिन्होंनेस्वतंत्रता के लिए,हर अंधेरे पल को सहाऔर घोर यातनाएँ भी झेलीं। नमन करे देश,उन सपूतों कोजिन्होंनेअंधेरी दिशाओं मेंदीप जलाए,और अपनी शौर्य गाथा सेसारे जहाँ को जगमगाया,जग में स्वतंत्रता … Read more

आज़ादी की अलख जगाई

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** ‘शहीद दिवस विशेष’ (२३ मार्च)… २३ मार्च शहीदों की यादें थी ताजा करती,आज़ादी के महासमर में देशप्रेम थी भरतीभगत, सुखदेव, राजगुरु, फांसी के विरुद्ध भीड़ उमड़ती,काश! वकील साथ तो देते, अंग्रेजों को तमाचा पड़ती। शहीद भगत सिंह-लाहौर से पंजाब तक की पूरी पढ़ाई,देशप्रेम से ओत-प्रोत हो क्रांति ज्योत जलाईब्रिटिश … Read more

अक्ल बड़ी या भैंस ?

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हमारे शरीर की समस्त चेष्टाओं का संचालन मस्तिष्क द्वारा होता है, जिनमें अग्रणी है बुद्धि बल। इस बल के आगे सभी बल फीके पड़ जाते हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहाँ शारीरिक बल पर बुद्धि ने विजय पाई। बुद्धिमान लोगों ने अपने बुद्धि बल से साम्राज्यों के उत्थान पतन में बहुत बड़ी … Read more

कौन देखता आइना यहाँ पर ?

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ जनभाषा में न्याय… हर कोई दोस्ती करना चाहता है,हर कोई दिवानगी में आगे आना चाहता है। फोन में तरह तरह के एप हैं, खिल जाते हैं मन यहाँ,फोन फ्रेंड बनते हैं, फिर फोन से खत्म भी हो जाते हैं। कौन देखता आइना यहाँ पर,अब तो खूबबसूरत-सी परी देखते हैं यहाँ। टूट कर … Read more

प्रताड़ित अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद का सर्वोच्च न्यायालय तक संघर्ष जारी

मुम्बई (महाराष्ट्र) | पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद (जो पटना उच्च न्यायालय की भाषा हिंदी में ही वकालत करने के लिए जाने जाते हैं और इसी के लिए प्रताड़ित होते रहे हैं) ने बताया कि उन पर पटना उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता द्वारा हिंदी में वकालत न करने का दबाव लगातार बनाया गया। … Read more

‘कृत्रिम मेधा’ और मानवीय रिश्ते

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** समय की संध्या और सुबह के संगम पर खड़ा आधुनिक मनुष्य एक ऐसे युग का साक्षी है, जहाँ संवाद की सरिता अब शब्दों से अधिक संकेतों, स्पर्शों से अधिक पर्दे (स्क्रीन) और संवेदनाओं से अधिक सॉफ्टवेयर के सहारे बह रही है। ‘कृत्रिम मेधा’ ने न केवल कार्य और व्यापार की दुनिया … Read more

भारत की शान, भारत की पहचान

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* भारत की शान,भारत की पहचान-मृदुल, मृदुल व्यवहार,व्यक्ति-व्यक्ति की मददगारहर अतिथि का स्वागत,मधुर-मधुर मुस्कान लिएदोनों कर जोड़कर,मुस्कान लिए होंठों परमीठी-मीठी बोली,शहद घोलकर-नमस्कार, नमस्कार। यही भारत की शान,यही भारत की पहचान…। कोई दुश्मन भी अगर,आ जाए भारत की शरणसरलता से, प्रेम सहित,सही-सही समझाकरउसकी विवेक को जागृत कर दे,मधुर-मधुर मुस्कान लिए,दोस्ती का हाथ बढ़ाए। … Read more

हे जगत जननी

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** हे, जगत जननी!चंद्रघंटा, माँ कुष्मांडा,जगत की पालनहारीसंसार में तेरा ही बाजे डंका। हे अम्बे!, हे दुर्गे!जपे है नाम तुम्हारा,चारों ओर फैले, पापियों कानाश कर, तुमने संहारा। हे माँ, कालरात्रि, चामुंडा!चंड-मुंड संहारने वाली,निर्बलों की रक्षक, राक्षसों की भक्षकसिंह पे बैठ, हुंकार भरो। हे माँ, नवदुर्गे!अवगुण का नाश करो,नवघट स्थापना से,प्रकृति में … Read more