मीत मेरे

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** करवा चौथ विशेष…. मीत मेरे,सिंदूर सुहाग,साथ तेरा,मेरा सौभाग। चाँद तुम तुम्हीं करवा चौथ,सजन तुम मेरे,धन है भाग। रातरानी संग पारिजात,महकती गीत की मधुर राग। बाबुल तुझे दे मेरा हाथ,बांध एक की पीली ताग। रेशमी स्वनिल घर-संसार,प्रेम के जलते रहते आग। पुण्य प्रारब्ध मिलन यह मान,मिले हम-तुम गये भाग्य जाग। धवल नवल सदा रहे … Read more

कुछ कह तो सही

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** सुनेगा जमाना कुछ कह तो सही,अकड़ छोड़ खामोश रह तो सही। ख्यालात जर्जर अभी छोड़ कर,नये सोच के कर जिरह तो सही। यहाँ ऐब किसमें नहीं है बता,करो आज पहले सुलह तो सही। पटक सर रहे लोग दीवार पर,इमारत गयी जीर्ण ढह तो सही। हिमायत करे क्यों अधिक झूठ को,अकेले सही चीज बह … Read more

मेघ तड़पाते मुझे

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** अपलक निहारूँ साजना मैं मोहिनी सूरत मगन,तेरी नजर मुझ पर पड़े मुखड़े छुपा देखूं सपन। कर साज कंगन मेंहदी श्रृंगार सब तेरे लिये,मैं लाज भारी पलक ढक हिय झलक में देखूं सजन। सुन तीज सावन में करूं शिव जी मनाती साजना,गजरे लगा वेणी सजा दे धार काजल की नयन। झूले लगा कर प्रेम … Read more

जी लें एक ज़िन्दगी नई

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ आओ आज,करें कोई बात नई।छोड़ो पुराने गिले-शिक़वे,छेड़ो कोई ग़ज़ल नई। गर्म हवाओं से,जिस्म थकने लगा है।दे इसको एक,ठंडक नई। ज़िन्दगी की तल्ख़ियों ने,आज ख़ुद को भुलाया है।दें अपने अस्तित्व को,आज एक पहचान नई। परिवार का सुख याद रहा,ख़ुद का सुख भूल गए।आओ एक पल को सही,जी लें एक ज़िन्दगी नई। गुज़रते वक़्त से … Read more

तुम बनी हो प्रेयसी

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* तुम बनी हो प्रेयसी मैं,बन चुका हूँ गीत हूँ,मैं तुम्हारी कल्पना में,बस गया हूँ मीत हूँ। द्वार पर घर आँगने में,रच रही हो अल्पना,अल्पना में बस कर रहा,मैं तुम्हारी कल्पना। सब्ज रंगों में ढला मैं,ही बना मनमीत हूँ,तुम बनी हो प्रेयसी मैं,ढल चुका हूँ गीत हूँ। क्यारियों को सींचने से,छा गई हरियालियां,अब … Read more

घर-आँगन प्रेम बरखा

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** रचना शिल्प:मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२,पदांत-रहे;सामंत-आते छाए मेघा प्रेम की विश्वास गहराते रहे,पात चमकीली बहारा बूंद ठहराते रहे। क्यारियों दिल बीच एहसास के पौधे लगा,सींच शीतल बोलियाँ फौहार बिखराते रहे। नयन नौका पाल खोलो आंधियां अनुराग की,ज्वार आये प्यार सागर और लहराते रहे। पिंजरे पर नेह दाने हो भरे इतने सदा,छोड़ उड़ने मन … Read more

दिल में यही मलाल

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** दिल में जाने उठ रहे कैसे हैं ये सवाल,हैं दिल के जो धनवान बनाया उन्हें कंगाल। दौलत से नवाज़ा उन्हें दिल‌ क्यों नहीं दिया,कैसा ये तेरा न्याय है दिल में यही मलाल। ये बेशुमार खाना जो सड़कों पे फेंकते,उसके लिए होता है ग़रीबों में फिर बवाल। मैं देखता हूँ रोज ही … Read more

प्रार्थना सुन लो प्रभो

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचना शिल्प:मात्रा भार १६/१२ संसार के करतार भगवन,प्रार्थना सुन लो प्रभो।कष्ट अब मिट जाए सभी के,शोक हर लो हे विभो॥ रोते बिलखते लोग दिखते,आज विपदा आ पड़ी।ऐसा भयंकर रोग आया,दुःख की है ये घड़ी॥ पकड़े हुए यह रोग सबको,बच न कोई पा रहा।छोटा बड़ा निर्धन धनी होसर्व जन को खा रहा॥ … Read more

हलधर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ****************************************** जान लड़ा जो अन्न उगाता,कृषक कहाता है,सकल देश को धन्य कराता,कृषक कहाता है। आँधी,तूफाँ,गरमी,वर्षा,हर मौसम जो श्रम करता,कर्मठता का नीर नहाता,कृषक कहाता है। धरती माँ का सच्चा बेटा बनकर जो रहता,पानी जैसा स्वेद बहाता,कृषक कहाता है। शहरों से जो दूर रहे,पर सबकी ख़ातिर,माटी से नित प्यार जताता,कृषक कहाता है। पीर,दर्द,ग़म,तकलीफ़ों … Read more

प्रीत पुरानी होली की

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… कोरोना के भय में भटकी रीत सुहानी होली की।दिल्ली के धरनों ने सटकी प्रीत पुरानी होली की॥ केसर घाटी सुलग रही थी पिछले सत्तर सालों से।हटी तीन सौ सत्तर धारा नयी कहानी होली की॥ माथे का सिंदूर मिट गया जाने कितनी बहनों का।मजहब का उन्माद … Read more