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मैं और हम

उषा शर्मा ‘मन’
जयपुर (राजस्थान)
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मैं और हम में बस इतना फर्क है…
मैं अहम को अपनाता है और हम अहम को धिक्कारता है।

मैं और हम में बस इतना फर्क है…
मैं अपनेपन में जीवन चाहता है और हम अपनापन में जीवन देखता है।

मैं और हम में बस इतना फर्क है…
मैं संकीर्णता में सोचता है और हम व्यापकता की ओर बढ़ता है।

मैं और हम में बस इतना फर्क है…
मैं स्वयं के लिए जीना चाहता है और हम अपनों के लिए जीवन मांगता है।

मैं और हम में बस इतना फर्क है…
मैं को जानने वाला कोई नहीं रहता और हम में पूरा जगत् समा सकता है।

मैं और हम में बस इतना फर्क है…
मैं स्वयं से बंधे रहना चाहता है और हम सबके संग बसना चाहता है॥

परिचय-उषा शर्मा का साहित्यिक उपनाम ‘मन’ है। जन्म तारीख २२ जुलाई १९९७ एवं स्थान-मानपूर नांगल्या(जयपुर) है। राजस्थान निवासी उषा शर्मा ‘मन’ का वर्तमान निवास बाड़ा पदमपुरा( जयपुर)में ही है। इनको राष्ट्रभाषा हिंदी सहित स्थानीय भाषा का भी ज्ञान है। ‘मन’ की पूर्ण शिक्षा-बी.एड.एवं एम. ए.(हिंदी साहित्य)है। कार्यक्षेत्र में फिलहाल अध्ययन जारी है। आपकी लेखन विधा-लेख कविता,संस्मरण व कहानी है। पसंदीदा हिंदी लेखक जयशंकर प्रसाद को मानने वाली उषा शर्मा ‘मन के देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-
“हिंदी भारत देश के लिए
गौरवमयी भाषा है,
देश की माला का स्वरूप,
भारत माँ का मान है हिंदी।
साहित्य की मन आत्मा का,
जन्मों-जन्मों का साथ है हिंदी।
कवि लेखकों की शान ही हिंदी,
हिंदुस्तान के नाम में है हिंदी॥”

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