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लम्हा-लम्हा गुज़र जाएगी

तेरी हँसती-खेलती जिंदगी,
लम्हा-लम्हा गुज़र जाएगी
स्वप्न अक्सर सच नहीं होते,
खुली आँख सच बताएगी।

क्या खोया क्या पाया जग में,
यादें सब यहीं रह जाएगी
नेक कर्म ही जाएंगे साथ में,
झूठ का भरम मिटाएगी।

किस पर इतना गुमान करें,
माया यहीं धरी रह जाएगी
तेरी-मेरी की उधेड़बुन में,
तेरी उम्र भी गुजर जाएगी।

किस बात का दंभ भरे नर,
सुंदर काया पिघल जाएगी
क्यों बेच रहा ईमान अपना,
नियति ही मातम मनाएगी।

पुण्य कर्म अब करता चल,
तेरी पीढ़ियाँ सुख पाएगी।
वर्ना तो जीवन की घड़ियाँ,
लम्हा-लम्हा गुज़र जाएगी॥
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