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कलम,कागज,और कल्पना

कविता जयेश पनोत
ठाणे(महाराष्ट्र)
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मेरे अधरों की मुस्कान बन गई हो तुम,
काली,लाल,हो या नीली
दिल के कागज पर जब चलती हो,
हर एहसास को छू कर रूह में उतरती हो।
न जाने किस जन्म के रिश्ते हैं,
जो बचपन से संग हम बँधे हैं
अब तो मेरी पहचान,
बन गई हो तुम।
कैसे जताऊँ,कैसे बताऊँ ख़याल दिल,
क्या हो तुम इस ज़िन्दगी में मेरे लिए
अँधेरो में चरागों सी तुम,
मौन में संगीत-सी,
कोलाहल में सुकूँ-सी।
क्या लिखूँ समझ नहीं आता,
कोई तो हो शब्द बाँध सकूँ तुम्हें
ऐसा कोई शब्द नजर नही आता।
बस कह सकती हूँ,
मेरी श्वांस में समाकर
रूह में बस गई हो।
जन्म-जन्मान्तर का,
साथ बन गई हो तुम॥

परिचयकविता जयेश पनोत का बसेरा महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई स्थित खारकर अली रोड पर है। १ फरवरी १९८४ को क्षिप्रा (देवास-मप्र)में जन्मीं कविता का स्थाई निवास मुम्बई ही है। आपको हिन्दी,इंग्लिश, गुजराती सहित मालवी भाषा का ज्ञान भी है। जिला-ठाणे वासी कविता पनोत ने बीएससी (नर्सिंग-इंदौर,म.प्र.)की शिक्षा हासिल की है। आपका कार्य क्षेत्र-नर्स एवं नर्सिंग प्राध्यापक का रहा,जबकि वर्तमान में गृहिणी हैं। लेखन विधा-कविता एवं किसी भी विषय पर आलेखन है। १९९७ से लेखन में रत कविता पनोत की रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। फिलहाल स्वयं की किताब पर काम जारी है। श्रीमती पनोत के लेखन का उद्देश्य-इस रास्ते अपने-आपसे जुड़े रहना व हिन्दी साहित्य की सेवा करना है। इनकी दृष्टि में पसंदीदा हिन्दी लेखक,कोई एक नहीं, सब अपनी अलग विशेषता रखते हैं। लेखन से जन जागरूकता की पक्षधर कविता पनोत के देश और हिन्दी भाषा के प्रति विचार-
‘मैं भारत देश की बेटी हूँ,
हिन्दी मेरी राष्ट्र भाषा
हिन्दी मेरी मातृ भाषा,
हिन्द प्रचारक बन चलो,
कुछ सहयोग हम भी बाँटें।

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