भारी बस्ता

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** खुद से भारी बस्ता ढोकर, गिर जाते हैं बेसुध होकर। आज दिवस छुट्टी का आया, हम बच्चों के मन को भाया। बस्ते को अब कर के टाटा, खूब करेंगे सैर सपाटा। चलो आज करने मनमानी, मस्ती में डूबी शैतानी॥ परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म … Read more

मैंने जिसको कहा पराया है

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** मैंने जिसको कहा पराया है, पहले दुख में वही तो आया है। हर किसी शय में दिख रहा है वो, जैसे आँखों में ही समाया है। फिर नुमायाँ है दिल के आँगन में, रोज़ मैंने जिसे भुलाया है। मुझको नादान कह रहा है वो, मैंने चलना जिसे सिखाया है। … Read more

उन बच्चों का जीवन भी तो जीवन है

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** विश्व बाल दिवस स्पर्धा विशेष……….. जिनके हैं माँ-बाप नहीं,बस क्रंदन है, उन बच्चों का जीवन भी तो जीवन हैl भूखे प्यासे सड़कों पर दिख जाते हैं, रोटी कम,ठोकर ही ज्यादा खाते हैं मजदूरी करते रोजाना दिन-दिन भर, लेकिन खोटे सिक्के ही बस पाते हैंl ऊपर से मालिक का कितना … Read more

मेंढक और कछुआ

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** बादल पर जा बैठे, उछलकर मेंढक राजाl मस्ती इतनी आई, लगे बजाने बाजाl पानी इतना बरसा, बादल हो गया खालीl गिर गये मेंढक राजा, कछुए ने बजाई तालीll परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान … Read more

रोटी और मकान नहीं है

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** रोटी और मकान नहीं है, जीवन यह आसान नहीं है। खुद की बदहाली पर सोचो, रोता कौन किसान नहीं है। फुटपाथों पर सोने वाला, बोलो क्या इंसान नहीं है ? रोजी-रोटी ढूँढ रहा जो, वह कोई नादान नहीं है। चूल्हे में है आग भले पर, चावल और पिसान नहीं … Read more

नून रोटी रोज़ खाते रह गए

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** नून-रोटी रोज़ खाते रह गये। पर कलम यूँ ही चलाते रह गये। इससे अच्छा हम चलाते फावड़ा, गीत ग़ज़लें ही बनाते रह गये। तालियों से भूख मिटती है नहीं, मुफ़्त में कविता सुनाते रह गये। सो गये बच्चे बिना खाये मगर, काफ़िया हम तो मिलाते रह गये। चिटकुलों का … Read more

एकता कायम रहे

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** अपनों से जो लड़ोगे बिखर जाओगे सुनो, जलने लगेंगे गाँव किधर जाओगे सुनो। लड़ना कभी न भाइयों आपस में है कसम- मिल-जुल के तुम रहोगे निखर जाओगे सुनो॥ माना कि धर्म-बोलियाँ अनेक साथियों, लेकिन हमारा देश तो है एक साथियों। होली व ईद को सभी मिलते हैं हम गले- … Read more

जनता मालिक है मगर…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** नेताओं की बात पर,मत करना मतभेद। लोकतंत्र की नाव में,ये करते हैं छेद॥ कुछ नेता गूंगे यहाँ,कुछ इतने वाचाल। एवरेस्ट के शीर्ष को,कहते हैं पाताल॥ सेवक देखो देश के,रहते मालामाल। जनता मालिक है मगर,नौकर सा है हाल॥ जनता जब बीमार हो,काटे हाय कलेश। सर्दी भी होती अगर,नेता चले विदेश॥ … Read more

मुझे बज़्म में तुम…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** मुझे बज़्म में तुम बुलाते हो साहबl मगर नाम भी भूल जाते हो साहब। जो तोड़ा है रिश्ता मुझे भूल जाओ, मेरा नाम क्यों गुनगुनाते हो साहब ? तुझे चाँद जबसे कहा है तभी से, मुझे दिन में तारे दिखाते हो साहब। सितम ही किया तुमने इतना ज़ियादा, मुझे … Read more

मंज़र नहीं देखा…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** भीतर की हलचलों का वो मंज़र नहीं देखाl सबने मुझे देखा,मेरे अंदर नहीं देखाl सब लोग मानते रहे हैं कोयला मुझे, हीरे को जौहरी ने भी छूकर नहीं देखाl हँसते हुए ही तो मुझे देखा है रात-दिन, अश्कों का मेरे तूने समंदर नहीं देखाl घायल जो मैं हुआ हूँ … Read more