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कोरोना-रिश्तों का अहसास

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

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इस कोरोना काल में,सभी हुए पाबंद।
दुनिया भी रुक सी गई,चाल हो गई मंदll

सन्नाटा पसरा हुआ,लोग हुए बेकार।
कुछ न किसी को सूझता,क्या अब करें विचारll

कोरोना से हो गया,रिश्तों का अहसास।
सभी हो गए आम अब,रहा न कोई खासll

अहंकार जो था कभी,अब है कोसों दूर।
मानव भी अब हो गया,कुदरत से मजबूरll

रिश्तों में है दूरियां,इस कोरोना काल।
सर्वशक्ति के सामने,सब बेबस बेहालll

सीख बड़ी दे जायगा,यह कोरोना काल।
कुदरत से खेलो नहीं,रहें सदा खुशहालll

तन-मन में हो स्वच्छता,रखें सदा सुविचार।
करें नियम की पालना,करे न कुदरत मारll

धरा वायु जल को रखें,सभी प्रदूषण मुक्त।
तन-मन सबके स्वस्थ हों,यही मार्ग उपयुक्तll

भौतिकता को त्याग कर,रहें प्रकृति के संग।
चित्त शांतअरु शुद्ध हो,सब कुदरत के अंगll

हिम्मत से सब काम लें,करें ईश विश्वास।
कोरोना भी जायगा,होगा सुख का वासll

परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा)डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बांदीकुई (राजस्थान) में जन्मे डॉ.सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी., साहित्याचार्य,शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ व्याख्यात्मक पुस्तक प्रकाशित हैं। कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। आपका साहित्यिक उपनाम ‘नवनीत’ है। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो 
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’

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