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हम दोनों का प्यार

भुवनेश दशोत्तर,
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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काव्य संग्रह हम और तुम से………..


हम दोनों का प्यार,
देह से पार का प्यार है।
यह ईश्वर का वरदान,
अंतरतम में निर्झर-सा बहता है।
यह आत्मा का सौंदर्य,
सतत ज्योति-सा जगता है।
यह पुष्पों की सुरभि-सा,
हवाओं में तैरता है।
यह पंछी बन,
आसमान में उड़ता है।
यह अनकहा-सा ख्वाब,
चाँद के पास मुस्कराता है।
इसे थामने,रोकने की कोशिशें व्यर्थ हैं,
यह है तो जीवन का अर्थ है।
जिनको लिखना है,
वे नफरतों की इबारतें लिखेंगे।
हम और तुम तो प्यार की बौछार करते रहेंगे,
उनके तंग दिल की तंग गलियाँ रोकती रहें
हमारे हैं आसमां,हम उनमें उड़ते रहेंगे।
फ़तवे,फ़रमान तो चलते रहेंगे,
हम और तुम प्यार के राही।
काँटों भरी ही सही,
प्यार की राह पर चलते रहेंगे॥

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