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क्या भरोसा जिंदगी का

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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क्या भरोसा है इस जिंदगी का,
साथ देती नहीं यह किसी का।
दम निकल जाएगा आदमी का,
क्या भरोसा है इस जिंदगी का…॥

हम रहें ना रहें,मोहब्बत रहेगी,
दास्तां अपनी दुनिया कहेगी।
फर्ज पूरा करो बन्दगी का,
क्या भरोसा है जिंदगी का…॥

जिंदगी है यह हकीकत पुरानी,
चल के रुकना है इसकी रवानी।
नाम रह जाएगा बस आदमी का,
क्या भरोसा है इस जिंदगी का…॥

हक अदा होगा कैसे जहां में,
आदमी बन के आया यहां मैं।
गीत गाता चलूं मैं श्रीहरि का,
क्या भरोसा है इस जिंदगी का…॥

श्वांस रुक जाएगी चलते-चलते,
शमा बुझ जाएगी जलते-जलते।
क्या भरोसा इस जिंदगी का,
साथ देती नहीं यह किसी का…॥

परिचय-श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है।

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