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किसे कहूँ सुंदरता

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
गाँव खेत या शहर के तन को,
फल -फूल या कारखानों के मन को।

क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
मंत्री नेता या सामान्य जन को,
मिस्त्री,कुली या वैज्ञानिक फन को।

क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
कुआं-तालाब या नदी के जल को,
घर विद्यालय या मंदिर के थल को।

क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
बंजर पड़े हुए रेगिस्तानों को,
या हरे-भरे खेत खलिहानों को।

क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
सामान्य सी रुखी-सूखी रोटी को,
या दूध-दही सह छप्पन भोग को।

क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
बुढ़ापा,जवानी या बचपन को,
या अपने सुन्दर सलौने तन को।

क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
बोले गए सुन्दरतम कथन को,
या शवों पर चढ़ाए गए कफन को।

क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
संगीत-नृत्य आदि के कद्रदानों को,
या ईश्वर भक्ति में डूबे दीवानों को।

क्या पता किसे कहूँ सुन्दरता!
अभावों में हँसते मस्तानों को,
या सम्पन्नता में जीते महान को।

‘राजू’ कहे समझो सुन्दरता का मर्म,
यह है सबका अपना सही परिश्रम…
यह है मानव का अपना सत्कर्म।

‘राजू’ कहे समझो सुन्दरता का मर्म,
इसमें ना कोई मजहब ना ही धर्म…
इसमें अमन शान्ति प्रगति का कर्म।

‘राजू’ कहे समझो सुन्दरता का मर्म,
इसमें छिपा है बस एक ही ध्यान…
हो जिससे मानव का ही कल्याण।

‘राजू’ कहे समझो सुन्दरता का मर्म,
जिस मन में हो बस ऐसे ही बात।
वही है सुन्दरता साक्षात,
वही है सुन्दरता साक्षात॥

परिचय–साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव- लोहापिटटी में हैl जन्मतारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद हैl भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन(डिप्लोमा)की शिक्षा प्राप्त की हैl साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी(विद्यालय में शिक्षक) हैl सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैंl लेखन विधा-कविता एवं लेख हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना हैl पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैंl विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।