ललित गर्ग
दिल्ली
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‘विश्व इच्छा दिवस’ (२९ अप्रैल) विशेष….
हर वर्ष २९ अप्रैल को मनाया जाने ‘विश्व इच्छा दिवस’ मानवता के उन कोमल स्पंदनों को अभिव्यक्त करता है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं। यह संवेदनशीलता, करुणा और आशा का वैश्विक अभियान है। इस दिन का मूल उद्देश्य उन बच्चों के जीवन में खुशी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है, जो गंभीर और जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे हैं। यह दिन हमें यह याद दिलाता है, कि जीवन की वास्तविक सुंदरता दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में निहित है। इस प्रेरणादायी दिवस का संबंध विश्वविख्यात संस्था मेक-ए-विश फाउंडेशन से है, जो दशकों से बीमार बच्चों की इच्छाओं को साकार कर उन्हें जीवन का नया अर्थ दे रही है। यह संस्था न केवल इच्छाओं को पूरा करती है, बल्कि उन बच्चों के भीतर जीने की आशा, साहस और मानसिक शक्ति का संचार भी करती है।
इस दिन का इतिहास अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक है। वर्ष १९८० में ७ वर्षीय क्रिस ग्रेसियस जो ल्यूकेमिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, उनकी अंतिम इच्छा एक पुलिस अधिकारी बनने की थी। जब यह बात स्थानीय पुलिस तक पहुंची, तो उन्होंने न केवल उसकी इच्छा को समझा, बल्कि उसे पूरा करने का संकल्प भी लिया। २९ अप्रैल १९८० को क्रिस को १ दिन के लिए पुलिस अधिकारी बनाया गया, उन्हें वर्दी पहनाई गई और पूरे सम्मान के साथ यह अनुभव दिया गया। उस दिन क्रिस के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह केवल एक बच्चे की खुशी नहीं थी, बल्कि मानवता की संवेदनशीलता का जीवंत प्रमाण थी। दुर्भाग्यवश, कुछ ही दिनों बाद उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी यह छोटी-सी इच्छा एक वैश्विक आंदोलन की नींव बन गई। इसी घटना से प्रेरित होकर मेक-ए-विश फाउंडेशन की स्थापना हुई, जिसने समय के साथ एक विशाल रूप ले लिया। आज यह संस्था विश्व के अनेक देशों में सक्रिय है और लाखों बच्चों की इच्छाओं को पूरा कर चुकी है। यह संस्था यह सिद्ध करती है, कि एक छोटी-सी पहल भी दुनिया में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।
आधुनिक युग में, जब जीवन की गति अत्यंत तेज हो गई है और व्यक्ति अपने स्वार्थों एवं महत्वाकांक्षाओं में उलझा हुआ है, ऐसे में यह दिवस एक चेतना का संदेश लेकर आता है। यह हमें सोचने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हमारी इच्छाएं केवल हमारे लिए हैं, या हम दूसरों के जीवन में भी कुछ रोशनी ला सकते हैं। आज समाज में संवेदनाओं का क्षरण हो रहा है, लोग एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं, और मानवीय संबंधों में औपचारिकता बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में ‘विश्व इच्छा दिवस’ मानवीय मूल्यों के पुनर्जागरण का अवसर प्रदान करता है। इच्छाएं मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग हैं। वे केवल आकांक्षाएं नहीं, बल्कि जीवन की दिशा और ऊर्जा का स्रोत हैं। जब इच्छाएं सकारात्मक होती हैं, तो वे व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं, उसके भीतर आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास करती हैं।
प्रसिद्ध विचारक एंथोनी स्टे. मारटीन का कथन है कि “यदि मनुष्य अपनी सबसे बड़ी इच्छाओं को साकार करने की क्षमता नहीं रखता, तो वह उन्हें सोच भी नहीं सकता।” यह विचार इस बात को स्पष्ट करता है कि इच्छाएं हमारे भीतर की संभावनाओं का प्रतिबिंब होती हैं।
दिवस इस सत्य को भी उजागर करता है कि इच्छाएं केवल व्यक्तिगत नहीं होतीं, वे सामाजिक भी होती हैं। एक व्यक्ति की सकारात्मक इच्छा पूरे समाज में परिवर्तन ला सकती है। जब हम किसी बीमार बच्चे की इच्छा पूरी करते हैं, तो हम केवल उसकी खुशी का कारण नहीं बनते, बल्कि उसके परिवार और समाज के लिए भी आशा का स्रोत बन जाते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें देने वाला और पाने वाला दोनों ही समृद्ध होते हैं। वर्तमान समय में यह और भी आवश्यक हो गया है कि हम अपनी इच्छाओं को सकारात्मक दिशा दें। नकारात्मक इच्छाएं जहां व्यक्ति को तनाव और असंतोष की ओर ले जाती हैं, वहीं सकारात्मक इच्छाएं उसे संतुलन, शांति और संतोष प्रदान करती हैं। यही कारण है, कि दिवस केवल इच्छाओं की पूर्ति का उत्सव नहीं है, बल्कि यह सकारात्मक सोच और जीवन दृष्टि का भी उत्सव है।
यह हमें यह सिखाता है कि हम अपने छोटे-छोटे प्रयासों से भी किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। एक मुस्कान, एक सहयोग, या एक संवेदनशील कदम किसी के लिए जीवन बदल देने वाला अनुभव बन सकता है। इस दिवस का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि यह हमें सामाजिक भागीदारी के लिए प्रेरित करता है। हम अपने स्तर पर इस अभियान का हिस्सा बन स कते हैं-चाहे वह आर्थिक सहयोग के माध्यम से हो, स्वयंसेवा द्वारा हो, या किसी जरूरतमंद बच्चे की पहचान कर उसकी सहायता करने के रूप में हो। आज डिजिटल युग में सोशल मीडिया भी एक सशक्त माध्यम बन गया है, जिसके द्वारा हम इस संदेश को व्यापक स्तर पर फैला सकते हैं।
निश्चित तौर पर ‘विश्व इच्छा दिवस” हमें यह सिखाता है कि जीवन का वास्तविक अर्थ केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीने में है। जब हम किसी के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, तो हम स्वयं भी भीतर से प्रसन्न होते हैं। यही सच्चा आनंद है, यही सच्ची संतुष्टि है। आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही है, चाहे वह मानसिक तनाव हो, सामाजिक विघटन हो या मानवीय संवेदनाओं का ह्रास-ऐसे समय में यह दिवस आशा की एक किरण बनकर सामने आता है। यह हमें विश्वास दिलाता है कि यदि हम चाहें, तो अपने छोटे-छोटे प्रयासों से भी दुनिया को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं। इसलिए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम केवल अपनी इच्छाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दूसरों की इच्छाओं को भी अपना मानेंगे। हम अपने भीतर करुणा, सहानुभूति और सहयोग की भावना को विकसित करेंगे और मानवता के इस सुंदर अभियान का हिस्सा बनेंगे।