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उजियारे की पहचान ‘पिता’

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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मेरी असली प्रेरणा…

दिखाते रहे जीवन-पथ पर उजियारे की पहचान पिता,
भरते रहे हर कठिन घड़ी में साहस का वरदान पिता।

संवारते रहे सपनों को अपने श्रम और त्याग से,
सिखाते रहे आगे बढ़ना सच्चाई और अनुराग से।

बनते रहे धूप में छाया, दु:ख में स्नेहिल आधार,
रखते रहे हर पल मुझ पर विश्वास अपार।

थामते रहे गिरने पर भी मेरे डगमगाते पाँव,
जगाते रहे मन में आशा के सुंदर भाव।

देते रहे संस्कारों का अमृत निर्मल, पावन, शुद्ध,
प्रेरित करते रहे चुनने को सदाचार का पथ बुद्ध।

रचते रहे मेरे जीवन में सफलता के नए अध्याय,
सँजोते रहे मन में मेरे सुखद भविष्य की छाय।

सहते रहे स्वयं कष्ट अनेक, पर मुख पर मुस्कान रही,
लुटाते रहे मुझ पर ममता, जिनकी कोई थाह नहीं।

बनकर रहे मेरे जीवन की सबसे सच्ची पहचान,
देकर गए संघर्षों से लड़ने का अनुपम ज्ञान।

करते हैं आज भी प्रेरित ऊँचे लक्ष्य बनाने को,
झुकता है मन बार-बार उनके चरणों में जाने को।

स्वीकारते हुए उनका ऋण, करता हूँ शत-शत प्रणाम,
मानता हूँ अपनी असली प्रेरणा केवल अपने पिता का नाम॥

परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।