गोपाल मोहन मिश्र
दरभंगा (बिहार)
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कुत्सित सोच (संकीर्ण मानसिकता) वाले लोग समाज, रिश्तों और खुद के विकास में सबसे बड़ा बाधक होते हैं। इनकी पहचान, नकारात्मकता और इनसे बचाव के व्यावहारिक उपाय हैं-
कुत्सित सोच वाले लोगों की पहचान
दूसरों की टांग खींचना:ये लोग अपनी सफलता पर काम करने के बजाय दूसरों को नीचा दिखाने में ऊर्जा लगाते हैं।
ईर्ष्या और द्वेष:किसी की तरक्की या खुशी देखकर ये अंदर ही अंदर जलते हैं।
दोमुँहा चरित्र (नकारात्मकता) : हर अच्छी बात में भी कोई न कोई कमी या बुराई खोजना इनकी आदत होती है।
छलावा : ये सामने कुछ और, लेकिन पीठ पीछे कुछ और ही बात करते हैं।
जिम्मेवारी न लेना: अपनी गलतियों का दोष हमेशा दूसरों पर मढ़ते हैं।
ऐसे लोगों का समाज और जीवन पर प्रभाव
संबंधों में खटास: इनके संपर्क में आने से रिश्तों में अविश्वास और शक पैदा होता है।
मानसिक तनाव : ऐसे लोग न केवल खुद मानसिक तनाव में रहते हैं, बल्कि अपने आसपास के माहौल को भी विषाक्त बना देते हैं।
विकास में रुकावट : ये समाज और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव या प्रगति में सबसे बड़े बाधक होते हैं।
इनसे बचाव कैसे करें ?
सीमाएं तय करें : ऐसे नकारात्मक लोगों से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
बहस से बचें : कुत्सित सोच वाले लोगों को सही साबित करने या उनसे तर्क करने में अपनी ऊर्जा बर्बाद न करें।
उपेक्षा करें : इनकी ओछी बातों को दिल से लगाने की बजाय नजरअंदाज करना सबसे बेहतर उपाय है।
सकारात्मक संगति : अपने आसपास सकारात्मक, प्रेरणादायक और समझदार लोगों का दायरा बढ़ाएं।
साहित्य और समाज में हमेशा से यह सीख दी जाती है कि संकीर्ण या कुत्सित विचारों वाले व्यक्तियों से दूर रहना ही मानसिक शांति और व्यक्तिगत उन्नति की कुंजी है।
परिचय–गोपाल मोहन मिश्र की जन्म तारीख २८ जुलाई १९५५ व जन्म स्थान मुजफ्फरपुर (बिहार)है। वर्तमान में आप लहेरिया सराय (दरभंगा,बिहार)में निवासरत हैं,जबकि स्थाई पता-ग्राम सोती सलेमपुर(जिला समस्तीपुर-बिहार)है। हिंदी,मैथिली तथा अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले बिहारवासी श्री मिश्र की पूर्ण शिक्षा स्नातकोत्तर है। कार्यक्षेत्र में सेवानिवृत्त(बैंक प्रबंधक)हैं। आपकी लेखन विधा-कहानी, लघुकथा,लेख एवं कविता है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। ब्लॉग पर भी भावनाएँ व्यक्त करने वाले श्री मिश्र की लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक- फणीश्वरनाथ ‘रेणु’,रामधारी सिंह ‘दिनकर’, गोपाल दास ‘नीरज’, हरिवंश राय बच्चन एवं प्रेरणापुंज-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शानदार नेतृत्व में बहुमुखी विकास और दुनियाभर में पहचान बना रहा है I हिंदी,हिंदू,हिंदुस्तान की प्रबल धारा बह रही हैI”