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कुल्हड़ वाली चाय निराली

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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कुल्हड़ वाली चाय निराली,
सोंधी-सोंधी ख़ुशबू वाली
पी कर ताज़ा सब हो जाते,
एक गर्म चाय की प्याली।

सर्दी को यह दूर भगाती,
फुर्ती बदन में सबके लाती
चाय सभी के मन को भाती,
आपस में मित्रता बढ़ती।

कई तरह से लोग बना लें!,
कई मिनट तक इसे उबालें
कोई गर्म पानी में डाले,
पाउच को ही कोई हिला ले।

अदरक और इलाइची वाली,
होती चाय बड़ी ही निराली
खाँसी को यह दूर भगाए,
तुलसी की कुछ पत्ती डाली।

स्वाद दालचीनी का प्यारा,
लेते ज्वर में इसका सहारा।
गप-शप में यह साथी हमारी,
ठंड पड़ी तो चाय है पुकारी॥