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कल्पकथा की ‘संवाद यात्रा’ ने गोरखपुर में जगाई साहित्यिक राष्ट्र चेतना

सोनीपत (हरियाणा)।

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की बहुआयामी ‘संवाद यात्रा’ का भव्य आयोजन गोरखपुर की पावन धरती पर रामा कृष्णा गेस्ट हाउस (राम जानकी नगर, गोरखनाथ) में गरिमामय वातावरण के मध्य हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्याम बिहारी मिश्र के संयोजन में इस त्रिदिवसीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्रा का शुभारम्भ गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं माँ सरस्वती के अभिनंदन के साथ हुआ।
   परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि आयोजन के प्रथम चरण में अतिथियों के अभिनंदन उपरान्त ‘नवाचार से परिपूर्ण हिन्दी भाषा में आधुनिक शैली की काव्य रचनाएँ’ विषय पर भौतिक एवं आभासी माध्यम से विशेष काव्य गोष्ठी हुई। पं. अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, विजय रघुनाथराव डांगे, रमापति मौर्य, प्रेमलता कुमारी ‘पुष्पेश’, मेघा अग्रवाल सहित संस्थापक राधाश्री शर्मा, वंदना सूर्यवंशी ‘डफली वाली’, अभय श्रीवास्तव ‘ज्योति जिज्ञासु’, अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’, अर्चित सावर्णि, अधिवक्ता एवं पत्रकार कुमुद रंजन सिंह, गीता कौर तथा पवनेश मिश्र ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से उपस्थित साहित्यप्रेमियों को भावविभोर कर दिया।
यात्रा के द्वितीय चरण में ‘समाज को जोड़ने में साहित्य की भूमिका’ विषय पर प्रेरक परिचर्चा हुई। इस वैचारिक सत्र में डॉ. श्याम मिश्र, अमित पण्डा, अर्चित सावर्णि, कुमुद रंजन सिंह, गीता कौर, सुरेश उपाध्याय, भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’, राधाश्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने साहित्य को सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना एवं राष्ट्रीय एकता का प्रभावी माध्यम बताते हुए अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किए।
तृतीय चरण में उपसचिव अर्चित सावर्णि के नेतृत्व में कार्यकारिणी दल ने गोरक्षनाथ धाम, गीता प्रेस गोरखपुर आदि प्रेरणापुंज स्थलों का दर्शन लाभ किया।
   यात्रा के अंतिम दिन चतुर्थ चरण में कल्पकथा कार्यकारिणी की विशेष बैठक एवं अलंकरण समारोह हुआ। कार्यक्रम में विद्वान साहित्य मनीषियों को सम्मानित किए जाने से पूर्व कार्यकारिणी द्वारा संस्था के पूर्व प्रयासों की सफलता पर सहयोगी संगठनों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए भविष्य में प्रस्तावित कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।  
     संस्थापक राधाश्री शर्मा ने सबके प्रति विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए संवाद यात्रा को साहित्य का प्रेरणास्पद उत्सव बताया।