नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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दिल एक खिलौना है,
सच ही कहा है तुमने
इस संसार के खेल में,
दिल को ही अपना मानते।
संसार की माया के बीच में,
दिल अनेक रंग दिखाता
काम क्रोध लोभ मोह,
हर पल इसे बहकाते।
ममता और अहंकार अपना घर बनाते,
हर मानव के दिल में ये संसार बसे
दिल तो मेरा है दिया तुम विश्वास में,
अपनी सारी भावनाओं को सौंपा मन से।
मैं चाहती सिर्फ सुकून,
मुझे मिली सिर्फ दिल में बेचैनी
और बेकरारी सिर्फ दिल में,
शांति और सुकून के लिए निकला था मैं
हर पल उलझन ही उलझन मिले।
दिल हर पल खेलना चाहे,
कभी खट्टा-कभी मीठा व्यवहार करे
कभी किसी को मौन, कभी किसी को दूर करे,
जीवन का खेल खेलता रहे।
सच में जीवन एक खिलौना है,
जिससे हम जीवन भर खेला करते।
पर अब इसे खेलने नहीं दूंगी,
शांति अपने दिल में रखूंगी॥