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नवीन कृति ‘पर छवि कहाँ समाय’ व ‘लालित्यं शरणं व्रज’ विमोचित

इंदौर (मप्र)।

वामा साहित्य मंच के तत्वावधान में इंदौर प्रेस क्लब में साहित्यिक समारोह किया गया। इसमें लेखिका डॉ. गरिमा संजय दुबे के नवीन कहानी संग्रह ‘पर छवि कहाँ समाय’ एवं ललित निबंध संग्रह ‘लालित्यं शरणं व्रज’ का विमोचन किया गया। इन पर चर्चा भी की गई।
      मंच की प्रचार सचिव सपना साहू ‘स्वप्निल’ ने बताया कि शुभारंभ इशिता जोशी द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। मंच की अध्यक्ष ज्योति जैन ने स्वागत उद्बोधन से सुधीजनों का अभिनंदन किया और लेखिका के लेखन को अक्षय तृतीया जैसा अद्भुत बताया।
   ​लेखिका डॉ. दुबे ने सफलता का श्रेय माता-पिता, सास-ससुर और संयुक्त परिवार के सहयोग को दिया। पारिवारिक भावनाओं को साझा करते हुए मनीष व्यास और डॉ. दीपा व्यास ने परिवार की ओर से विचार रखे। उन्होंने लेखिका की पारिवारिक श्रेष्ठता और लेखकीय गुणों की प्रशंसा की।

​   वरिष्ठ साहित्यकार पंकज सुबीर ने कहानी संग्रह पर चर्चा के दौरान कहा कि लेखक को समाज एवं राष्ट्र के प्रति त्रिआयामी दृष्टि रखनी चाहिए। उन्होंने कृति की सराहना करते हुए उसे उच्च स्तरीय बताया। श्री सुबीर ने जोर दिया कि लेखक को किसी विचारधारा के बजाय सदैव विचार के साथ विपक्ष में खड़ा होना चाहिए।
​    वरिष्ठ कला मनीषी संजय पटेल ने निबंध संग्रह की समीक्षा करते हुए इसे समकालीन साहित्य की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। श्री पटेल ने ‘दुर्वा’ निबंध को संवेदनाओं एवं जज्बातों का सुंदर संगम बताया।
​   वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने कृतियों पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जब मन के भीतर बादलों की तरह उमड़ने वाले भाव अभिव्यक्ति में इंद्रधनुष बनते हैं, तभी सृजन सार्थक होता है। डॉ. दुबे साहित्य में परिक्रमा नहीं, बल्कि यात्रा कर रही हैं।
  ​अतिथियों का स्वागत मदन लाल दुबे, पद्मा राजेंद्र और डॉ. राकेश शर्मा द्वारा किया गया।