सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…
जग के सपने साकार करते,
दिन-रात करके दौड़ा करते
छैनी-हथोड़ा-फावड़ा थामते,
इतर, उज्जवल रस भरते।
पत्थर तोड़ते राह बनाते,
मेहनत करके पसीना बहाते
मेहनतकश, वतन सजाते,
फिर भी जग से उपेक्षित रहते।
सुबह सवेरे खेत जोतते,
भूख-प्यास अनायास त्यागते
जग की खातिर अनाज उगाते,
मेहनत फल, अंश मात्र पाते।
जन्म मजदूर गेह, रीत निभाता,
छाले सहलाऊं क्यों, प्रीत निभाता
आलीशान गैरों की खातिर,
महल बनाता, गर्वित होता।
ऊँची-ऊँची मीनार बनाते,
कंकड़-पत्थर, ईंट सीमेंट रेत
हाथ छिलाते… उफ़ न करते,
अंततः जग श्रमिक कहलाते।
रईस निर्दयी, कठोर हिय धरते,
संवेदना मरती, लताड़ धरते।
जज़्बात, कद्र तौहीन करते
पर अभिलाषित चाल चलते।
बिन श्रमिक विकास न होता,
चाहे आधुनिक युग उन्नत होता
सुख चैन नित श्रमिक बेचता,
जग-जगमग स्वर्ग बनाता।
आदर भाव सद्भाव ही चाहता,
अपने हिस्से का सम्मान चाहता।
‘हीरो’ सही मायने, संघर्ष समझें,
‘धन्य वह मानव’ सत्कार कर लें॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।