कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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मन कुछ कहता है… (‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)…
मन कुछ कहता है…
खामोशियों में भी एक शोर रहता है
इच्छाओं के दीप जलते हैं भीतर,
हर सपना आँखों में चोर रहता है।
कभी उड़ना चाहता हूँ आसमान तक,
कभी धरती से जुड़कर ठहर जाता हूँ
मन के कोनों में अनगिनत ख्वाहिशें,
हर रोज़ नई राह पर बिखर जाता हूँ।
इच्छाएँ ही तो जीवन का रंग हैं,
इनसे ही हर पल महकता है
जो दिल में छुपा एक छोटा सा अरमान,
वही जीने का अर्थ समझाता है।
मन कहता है — मत डर तू गिरने से,
हर ठोकर एक नई सीख बनेगी।
जो चाहत दिल में सच्ची हो,
वो एक दिन हकीकत बनेगी।
विश्व इच्छा दिवस ये सिखाता है,
कि सपनों को पंख लगाना सीखो।
मन की आवाज़ को सुनकर,
अपने रास्ते खुद बनाना सीखो॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।