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भयावह गुलाम मानव

सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)….

देश की खातिर मिटने वाले,
वीर सपूत, अमर दुलारे
एक दिन क्या, नित नित मनाएं,
आजादी दिवस, जश्न मनाएं।

क्या खोया क्या पाया जिन्होंने,
वतन की खातिर, समर्पण जिन्होंने
हे जन! जीवन जिया न जिन्होंने,
मातृभूमि का मान बढ़ाया जिन्होंने।

आजादी दिलाई, क्या आज आजाद,
लत लगाए, वेदना विषाद
मानसिक दुर्बलता, स्वयं बर्बाद,
अवगुण अपनाए, जिल्लत अवसाद।

मोबाईल, लत अवसाद सदा,
अपने-अपनों, अनजान सदा
बेरहम, स्वार्थ अपनाए सदा,
दया, ममता, फ़िक्र अनजान सदा।

अमूल्य वक्त, पूंजी गंवाए,
अनमोल जीवन, अपनत्व गंवाए
डिजिटल मीडिया, महानाश लाए,
नशा पसार, मुल्क संकट छाए।

भूख-प्यास-नींद, सब भूला मानव,
गिरफ्त में मासूम ; यौवन मानव
बिना मोबाईल, बावला मानव,
भेड़ चाल, अंधत्व, मूढ़ मानव।

भयावह गुलाम, आजाद कहाँ मानव,
कुछ मजबूर, कुछ नासमझ मानव।
पथ प्रदर्शक, महान जो मानव,
अपनाए गुण, न हो विवश मानव॥

परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।