भोपाल (मप्र)।
‘मुट्ठी भी मिट्टी’ अति आधुनिक युग की कहानी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आधुनिक व्यवस्था में मनुष्य की भावनाएं मरती जा रही हैं। महानगरों में जीवन सिमट गया है। आधुनिक समाज व्यवस्था में यदि आपके पास पैसे नहीं हैं तो पीने का पानी भी नहीं मिलेगा। इस कहानी में प्रकृति का सुन्दर चित्रण है। कहानी की भाषा शैली सटीक है, जो कहानी के परिवेश के अनुकूल है। ये कहानी बताती है कि आधुनिक समाज में इतने साधन पाकर भी हम कितने खोखले हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. ज्योति गजभिये ने डॉ. नीरज कुमार वर्मा की कहानी ‘मुट्ठी भी मिट्टी’ की समीक्षा करते हुए यह बात कही। अवसर था अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा कहानी संवाद कार्यक्रम का, जो मंगलवार को आभासी रूप से आयोजित किया गया। अध्यक्षता कर रही मंच की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कहानी संवाद में पढ़ी गई दोनों कहानियों पर समीक्षात्मक टिप्पणी देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में पढ़ी जाने वाली कहानियाँ और कहानियों के बहाने मनुष्य के जीवन मूल्यों पर की जाने वाली चर्चा कहानी संवाद को गंभीर बनाती है। हम कहानीकारों को चाहिए कि हम अपनी कहानी के स्वयं ही आलोचक बनें। हमें अपनी कहानियां स्वयं दस बार पढ़नी चाहिए। उन शब्दों और उन वाक्यों को हटा देना चाहिए, जो बोझिल लगते हों। रचनाकार की अनुभूति और दृष्टिकोण ही कहानी में जान डालता है। आज के दौर में हमें सचेत रहने की आवश्यकता है कि कहानीकार मूल कथा से कहीं भटक न जाए।
विशिष्ट अतिथि अनामिका सिंह ने कर्नल डॉ. गिरजेश सक्सेना की कहानी ‘त्रिशंकु’ की विवेचना कथा तत्वों के आधार पर करते हुए कहा कि कहानी का कथानक बाल मनोविज्ञान पर आधारित है। यह केवल पति-पत्नी की तलाक की कहानी नहीं है, बल्कि तलाक के उपरांत परिवार में उपजी समस्याओं को रेखंकित करती है। यदि पति-पत्नी आपसी अनबन के कारण तलाक लेते भी हैं तो उन्हें बच्चों की परवरिश का संयुक्त दायित्व उठाना चाहिए। गिरजेश जी की कहानी, कथा के तत्वों पर खरी उतरती है।
कुछ श्रोताओं ने भी अपने विचार व्यक्त कि, जिनमें वरिष्ठ उपन्यासकार राज बोहरे, कहानीकार मीनाक्षी दुबे, वरिष्ठ कहानीकार रानी मोटवानी, संपादक जया केतकी शर्मा व वरिष्ठ कहानीकार डॉ. प्रमिला वर्मा रहीं।
मंच की मुम्बई इकाई की निदेशक सत्यवती मौर्य ने अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश इकाई के महासचिव मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने किया। महाराष्ट्र मंच की अध्यक्ष साहित्यकार मृदुला मिश्रा ने आत्मीय आभार प्रकट किया।