नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
****************************************
तू मेरे दिल के आँगन में आया कैसे प्रियतम,
मेरे सपनों को साकार किया कैसे प्रियतम
तू तो चंचल है, सागर-सा स्थिर हुआ कैसे प्रियतम ?
मेरे आँखों के घड़ों में समाया कैसे प्रियतम ?
आना कभी मेरे पास, बताऊँ तुमको विरह का समय,
मैंने बिताया कैसे मेरे प्रियतम
अब तो जीना मेरा दुश्वार हुआ हर क्षण,
मन मचलता तेरे पास आने को
मेरे प्रियतम।
दुनिया से अब क्या लेना-देना मेरे प्रियतम,
दुनिया नहीं छोड़ती मुझको मेरे प्रियतम
तुम निष्ठुर थे, छलिया थे, झूठ
में माहिर हो,
तेरे झूठ में भी सच आया कैसे मेरे प्रियतम ?
कान्हा आप तो अन्तर्यामी हो, किसको क्या देना,
आप ही तो सबके स्वामी हो।
आपकी नज़रों में रहूँ, मुझे एक ही वर दो मेरे प्रियतम,
तेरे सुमिरन, सत्संग, मेरे झोली में भर दो मेरे प्रियतम॥