शीला बड़ोदिया ‘शीलू’
इंदौर (मध्यप्रदेश )
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ऑफिस में लंच का समय हो गया, रक्षा २ साल से इस जगह काम कर रहीं है। “अरे! सब जल्दी आओ, जोर से भूख लग रहीं है”, अश्विन ने कहा। रक्षा, सावि,अश्विन और नील सभी दोस्त एकसाथ बातें करते हुए खाना खा रहे हैं, तभी अश्विन पूछता है “रक्षा तुम आज बहुत बहुत चुप हो ?”
रक्षा फीकी हँसी हँसते हुए “नहीं तो, बहुत काम है ना, बस थोड़ा थक गयी।” पर अश्विन ने जैसे उसकी आँखें जैसे पढ़ ली, “कोई बात नहीं, छुट्टी लेकर आराम कर लो।”
“ना बाबा ना, बॉस सैलरी काट लेंगे। चलो सब, अपने अपने काम में लग जाओ।” काम करते हुए रक्षा की नजर घड़ी पर पड़ी, “अरे ६ बजने वाले हैं, मुझे तो घर जल्दी जाना है। लेट पहुंची, तो फिर घर में
क्या कहूँगी ?”
अश्विन,- “रक्षा चिंता क्यों करती हो, मैं छोड़ देता हूँ।”
“नहीं-नहीं, मैं चली जाऊँगी।” रक्षा हड़बड़ाहट में अपना सामान, बेग उठाने लगती है। अश्विन, रक्षा का हाथ पकड़ लेता है, “बताओ, क्या परेशानी है, रक्षा ?”
“नहीं, कुछ भी तो नहीं” घबराते हुए रक्षा बोली।
अश्विन बोला,”मेरी तरफ देखो, हम अच्छे दोस्त हैं ना, तुम मुझे अपनी प्रॉब्लम बता सकती हो।” रक्षा की आँखों से आँसू बह निकले,”वो जतिन आज जल्दी घर आने वाले हैं” कहती हुई घर के लिए निकल गयी।
अश्विन उसकी आँखें पहले ही पढ़ चुका था, आँसुओं ने बस उसे और पक्का कर दिया।
परिचय-शीला बड़ोदिया का साहित्यिक उपनाम ‘शीलू’ और निवास इंदौर (मप्र) में है। संसार में १ सितम्बर को आई शीला बड़ोदिया का जन्म स्थान इंदौर ही है। वर्तमान में स्थाई रूप से खंडवा रोड पर ही बसी हुई शीलू को हिन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत भाषा का ज्ञान है, जबकि बी.एस-सी., एम.ए., डी.एड. और बी.एड. शिक्षित हैं। शिक्षक के रूप में कार्यरत होकर आप सामाजिक गतिविधि में बालिका शिक्षा, नशा मुक्ति, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी को समझाओ अभियान, पेड़ बचाओ अभियान एवं रोजगार उन्मुख कार्यक्रम में सक्रिय हैं। इनकी लेखन विधा-कविता, कहानी, लघुकथा, लेख, संस्मरण, गीत और जीवनी है। प्रकाशन के रूप में काव्य संग्रह (मेरी इक्यावन कविता) तथा १५ साझा संकलन में रचनाएँ हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी लेखनी को स्थान मिला है। इनको मिले सम्मान व पुरस्कार में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड सम्मान (साझा संकलन), विश्व संवाद केंद्र मालवा (मध्य प्रदेश) द्वारा सम्मान, कला स्तम्भ मध्य प्रदेश द्वारा सम्मान, भारत श्रीलंका सम्मिलित साहित्य सम्मान और अखिल भारतीय हिन्दी सेवा समिति द्वारा प्रदत्त सम्मान आदि हैं। शीलू की विशेष उपलब्धि गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में रचना का शामिल होना है। आपकी लेखनी का उद्देश्य साहित्य में उत्कृष्ट लेखन का प्रयास है। मुन्शी प्रेमचंद, निराला, तुलसीदास, सूरदास, अमृता प्रीतम इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणापुंज गुरु हैं। इनका जीवन लक्ष्य-हिन्दी साहित्य में कार्य व समाजसेवा है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“हिन्दी हमारी रग-रग में बसी है।”