अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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स्वतंत्रता दिवस विशेष….
हर साल १५ अगस्त केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का दिन नहीं है। यह वह अवसर है, जब एक राष्ट्र अपने वर्तमान को देखता है-यानी कहाँ जाना है, अपनी कमियों पर विचार करता है-यानी क्या गलती हुई है, और भविष्य की दिशा तय करता है-अर्थात आगे क्या दिशा रखनी है। देश की आजादी हमें केवल अधिकार नहीं देती, वह जिम्मेदारियाँ भी सौंपती है। इसलिए ‘स्वतंत्रता दिवस’ का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हम उस भारत को बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था ? जिसके लिए जान दी, घर छोड़ा और हर सपना बलिदान कर दिया।
भारत ने बीते वर्षों में अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। सड़क, रेल, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष, आधारभूत ढांचे और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है, लेकिन विकास का अर्थ केवल ऊँची इमारतें, तेज सड़कें और तकनीकी उपलब्धियां नहीं है। विकास तब सार्थक होगा, जब देश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा, हर युवा को सम्मानजनक रोजगार, हर परिवार को बेहतर स्वास्थ्य और हर नागरिक को सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण जीवन मिले।
सबसे बड़ा सवाल रोजगार का है। हमारी युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन यही शक्ति तभी राष्ट्रनिर्माण में बदल सकती है, जब युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर मिलें। केवल सरकारी नौकरियां रोजगार का समाधान नहीं हो सकतीं। हमें उद्योग, स्टार्ट-अप, कृषि आधारित रोजगार, छोटे व्यवसाय, कौशल विकास और नए क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवसर पैदा करने होंगे। शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करनी होगी। डिग्री के साथ कौशल और कौशल के साथ अवसर—यही नए भारत की वास्तविक जरूरत है।
शिक्षा किसी भी सुनहरे भविष्य की नींव है। इसलिए हमें ऐसी शिक्षा चाहिए, जो केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं सिखाए, बल्कि सोचने, सवाल पूछने, निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता विकसित करे। गाँव और शहर, गरीब और संपन्न—हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अवसर मिले, यह हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में रटने से अधिक समझ, प्रमाण-पत्र से अधिक क्षमता और अंकों से अधिक प्रतिभा को महत्व देना होगा।
सवाल केवल सरकार से नहीं हैं। सवाल यह भी है कि नागरिक के रूप में हमारी जिम्मेदारी क्या है ? क्या हम सार्वजनिक संपत्ति को अपना समझकर उसकी रक्षा करते हैं ? क्या हम कानून का पालन करते हैं? क्या हम स्वच्छता, पर्यावरण, यातायात अनुशासन और सामाजिक सद्भाव के प्रति ईमानदार हैं ? क्या हम अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी उतनी ही गंभीरता से स्वीकार करते हैं ?
दरअसल, लोकतंत्र केवल सरकार चुनने का नाम नहीं है; लोकतंत्र जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिकों से मजबूत होता है।
ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी भी उतनी ही स्पष्ट है। योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है। जब प्रशासन पारदर्शी हो, भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण हो, न्याय समय पर मिले और सरकारी संस्थाओं में नागरिक का विश्वास मजबूत हो—तब ही यह सुशासन की कसौटी है। राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए, जिसे आज बढ़ाने की आवश्यकता है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, कृषि, महिला सुरक्षा, युवाओं के अवसर और गरीबों के सम्मान को राजनीतिक प्राथमिकताओं के केंद्र में रखना होगा।
हमें यह भी तय करना होगा कि तरक्की की हमारी परिभाषा क्या है। क्या आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण की रक्षा हो रही है ? क्या शहरों के साथ गाँव भी आगे बढ़ रहे हैं ? क्या तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है ? क्या आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक संवेदनशीलता भी बढ़ रही है ? यदि इन सवालों के जवाब सकारात्मक हैं, तभी विकास को वास्तविक विकास कहा जा सकता है।
हर नागरिक बनाम आम आदमी को समझना होगा कि भारत का भविष्य केवल सरकारों के हाथ में नहीं है। यह शिक्षक के हाथ में है, जो एक बच्चे को सही दिशा देता है; किसान के हाथ में है, जो देश का पेट भरता है; उस युवा के हाथ में है, जो नए विचारों को जन्म देता है; उस उद्यमी के हाथ में है, जो रोजगार पैदा करता है; और उस सामान्य नागरिक के हाथ में भी है, जो ईमानदारी से अपना काम करता है, कर भरता है एवं देश हित का ख्याल करता है।
इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें केवल अतीत पर गर्व नहीं, भविष्य के प्रति संकल्प भी करना होगा। हमें ऐसा भारत बनाना है, जो आर्थिक रूप से मजबूत हो, वैज्ञानिक रूप से सक्षम हो, सामाजिक रूप से संवेदनशील हो और अवसरों के मामले में न्यायपूर्ण हो। ऐसा भारत, जहां किसी युवा की प्रतिभा अवसर के अभाव में न रुके, किसी बच्चे की शिक्षा गरीबी के कारण न छूटे और किसी नागरिक को अपने अधिकार के लिए वर्षों संघर्ष न करना पड़े।
देश की आजादी की असली सफलता तभी होगी, जब भारत का हर नागरिक यह महसूस कर सके कि देश की प्रगति में उसका भी हिस्सा है और देश के भविष्य के निर्माण में उसकी भी भूमिका है।
यही स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ है—सिर्फ आजाद भारत नहीं, बल्कि सक्षम, शिक्षित, रोजगारयुक्त, आत्मनिर्भर और न्यायपूर्ण भारत। यही हमारा संकल्प हो, यही हमारे तिरंगे के प्रति सच्ची भावना, सम्मान एवं ऊँ अनगिनत सेनानियों के लिए असली श्रद्धांजलि होगी, जिनके मन में केवल देश था। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं संपादक हैं।)