विवशता

वन्दना पुणताम्बेकर
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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आज भी वह चौराहे पर लाचार-सा खड़ा था। छोड़ आया था वह अपना घर आँगन,वो नीम की निबोरी,वो चूल्हा,वह बूढ़ी माँ,सारा परिवार। न जाने कितने दिनों से यहीं खड़ा था। विवश,लाचार रोजगार की तलाश में वह गाँव से शहर आया था। बाल विवाह की जिम्मेदारियों का वह पेड़ युवा होते ही घना हो गया था।
गाँव मे खेत-खलिहान गिरवी पड़े थे। अब कोई चारा नहीं था। वह शहर की राह पर चल पड़ा। आज भी कोई काम नहीं मिला। आया था सपनों का सौदागर बनकर,मगर सिर्फ भूख-प्यास,तड़प औऱ इंतजार,बस विवश………।                          तभी किसी ने आवाज दी,-“ऐ,तुम क्या काम करते हो ?”
     “साब जो बोलो कर लूंगा।”
     “चलोगे मेरे साथ…?”
    “हाँ साब चलूँगा।”
“कहां रहते हो..?”
“यहीं सौ मील दूर गाँव से आया हूँ साब,घर-परिवार है। तीन दिन से कोई काम नहीं मिला,आप जो बोलोगे कर लूंगा साब..।”
चल पड़ा वह उम्मीद की आस में उस आदमी के पीछे-पीछे मन के अनकहे दर्द को सहते-सहते। अचानक आज उनके पैरों में पंख आ गए थे। तेज रफ्तार के साथ दौड़-सा पड़ा वह। भूखा-प्यासा था, पर उम्मीद की एक आस थी।
एक बड़े बंगले में जाकर देखा,तो बाहर मखमल के कालीन पर एक कुत्ता सोया था।
   “साब क्या काम करना है ?”
चीखकर…..”अरे देखता नहीं,मेरा कुत्ता मर गया है। इसे ले जाकर दूर जंगल में गाड़ना है। करेगा ये काम..?”
विवशता से….”जी साब हो जाएगा।”
एक हाथ में फावड़ा सिर पर कालीन में लिपटी कुत्ते की लाश को उठाकर वह चल पड़ा।
मन रो रहा था। वापस लौटकर उसे साब को फावड़ा लौटाना था। भूख से आंतें सुकड़ रही थी। वजनी कुत्ते की लाश उठाकर वह थक चुका था।
“ये ले सौ का नोट”,उसे गेट के बाहर जाने को कहा।
“साब ये तो बहुत कम है,गाँव जाना है साब,कुत्ता वज़नी था। साब…..”
“पागल हो गया है क्या..? ये बहुत है,मैं  छोटे लोगों के ज्यादा मुँह नहीं लगता, भाग यहाँ से।”
 इंसान की कीमत उस कुत्ते से भी कम थी। उसके स्वाभिमान ने उसे भीख मांगने से इंकार कर दिया। वह विवश हो सौ का नोट मुट्ठी में बांधकर नए रोजगार की तलाश में चल पड़ा। गाँव में रुपए  भेजने थे। इतने कम से कैसे होगा! यही सोच अपनी विवशता पर रो पड़ा…।
परिचय:वन्दना पुणतांबेकर का स्थाई निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। इनका जन्म स्थान ग्वालियर(म.प्र.)और जन्म तारीख ५ सितम्बर १९७० है। इंदौर जिला निवासी वंदना जी की शिक्षा-एम.ए.(समाज शास्त्र),फैशन डिजाईनिंग और आई म्यूज-सितार है। आप कार्यक्षेत्र में गृहिणी हैं। सामाजिक गतिविधियों के निमित्त आप सेवाभारती से जुड़ी हैं। लेखन विधा-कहानी,हायकु तथा कविता है। अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं,जिसमें बड़ी कहानियां सहित लघुकथाएं भी शामिल हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-रचनात्मक लेखन कार्य में रुचि एवं भावनात्मक कहानियों से महिला मन की व्यथा को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास है। प्रेरणा पुंज के रुप में मुंशी प्रेमचंद जी ओर महादेवी वर्मा हैं। इनकी अभिरुचि-गायन व लेखन में है।

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