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सब कुछ दांव पर, हिंदी में न्याय के लिए संघर्षरत एक अधिवक्ता

पटना उच्च न्यायालय, जहां संविधान के अनुच्छेद ३४८ (२) के उपबंध के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की सहमति से हिंदी को मान्यता प्राप्त है; वहाँ भी किस प्रकार हिंदी में याचिका और बहस करने के परिणामस्वरुप एक अधिवक्ता को प्रताड़ित किया जा रहा है, उसे सरकारी वकील पद से गैर कानूनी ढंग से हटा दिया गया है। उसके बाद बार काउंसिल के माध्यम से भी गैर कानूनी ढंग से लाइसेंस निलंबित किया गया और निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद भी उनके काम करने में बाधा डाली जा रही है, लेकिन अपना सब कुछ गंवा कर भी अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद सभी मोर्चों पर हिंदी विरोधी शक्तियों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
 सभी को, विशेषकर देश के अधिवक्ताओं और हिंदी प्रेमियों और जनभाषा में न्याय के समर्थकों को उनका सहयोग indradeoprasad1967@gmail.com) करने और उनका हौसला बढ़ाने की आवश्यकता है।

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)