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अंदाज बदल गए

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`
दिल्ली
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मित्रता और जीवन…

‘मित्र’ शब्द में मित्रता नहीं,
स्वार्थ समाने लगा है
कृष्ण-सुदामा से इतर,
दुर्योधन नजर आने लगा है
किसी पर यकीन,
किया जाए तो कैसे ?
बन्द आँखों विश्वास किया,
पीठ पर वार करते हैं वे ही।

काम पड़ने पे बड़ा प्यार दिखाते जो,
काम निकलते ही
नजर फेर लिया करते हैं,
आज हम मित्र कहें तो
किसे, कैसे कहें ?
अब तो मित्रों की परिभाषा,
नई-नई मिल रही है दुनिया में।

इंसान की तुलना में दौलत है बड़ी,
मित्र की तुलना में उनके अपने हैं
किसे दोस्त, किसे दुश्मन कहें,
अब तो दोनों ने ही
अपनी पहचान छिपा रखी है।

किया विश्वास वे उसे तोड़ चले,
कहा अपना जिसे, वे मुख मोड़ चले
कहा था किसी ने कभी
सच निकला, दोस्त ऐसा कि
दुश्मन की जरूरत ही नहीं।

अब जमाने के कई,
अंदाज बदल से हैं गए
मित्र की परिभाषा बदल गई,
मित्रता निभाने का चलन छूट गया।
कृष्ण-सुदामा से मित्र अब हैं कहाँ,
कर्ण सम दोस्ती निभाने का चलन छूट गया॥

परिचय-आप वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापिका (हिन्दी) के तौर पर राजकीय उच्च मा.विद्यालय दिल्ली में कार्यरत हैं। डॉ.सरला सिंह का जन्म सुल्तानपुर (उ.प्र.) में ४अप्रैल को हुआ है पर कर्मस्थान दिल्ली स्थित मयूर विहार है। इलाहबाद बोर्ड से मैट्रिक और इंटर मीडिएट करने के बाद आपने बीए.,एमए.(हिन्दी-इलाहाबाद विवि), बीएड (पूर्वांचल विवि, उ.प्र.) और पीएचडी भी की है। २२ वर्ष से शिक्षण कार्य करने वाली डॉ. सिंह लेखन कार्य में लगभग १ वर्ष से ही हैं,पर २ पुस्तकें प्रकाशित हो गई हैं। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। कविता (छन्द मुक्त ),कहानी,संस्मरण लेख आदि विधा में सक्रिय होने से देशभर के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख व कहानियां प्रकाशित होती हैं। काव्य संग्रह (जीवन-पथ),२ सांझा काव्य संग्रह(काव्य-कलश एवं नव काव्यांजलि) आदि प्रकाशित है।महिला गौरव सम्मान,समाज गौरव सम्मान,काव्य सागर सम्मान,नए पल्लव रत्न सम्मान,साहित्य तुलसी सम्मान सहित अनुराधा प्रकाशन(दिल्ली) द्वारा भी आप ‘साहित्य सम्मान’ से सम्मानित की जा चुकी हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-समाज की विसंगतियों को दूर करना है।