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आदमी क्या कर रहा है ?

संजीव एस. आहिरे
नाशिक (महाराष्ट्र)
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अमलतास के लटकते झुम्बरों के बीच कुछ सोनचिरैया छिप-छिपकर रस चूस रही है। स्वर्णिम गजरों की घनी पंखुरियों में आपस में लुका-छिपी खेलते कुछ गाती कुछ रस पीती, चहकती हुई मस्तियाँ कर रही है। भली सुबह भंवरों का आया एक झुंड अमलतास के फूलों से रसपान कर अभी कुछ देर पहले ही लौटा है। भंवरों ने अपनी गुंजार से अमलतास का दिल बहुत बहलाया। आपस में मस्ती करते, गुंजार करते हुए समां में उन्होंने जैसे संगीत भर दिया था। मंत्रमुग्ध होकर देर तक उस गुनगुनाहट को मैं सुनता ही रहा था। तेजी से लौटकर अब वे सारे  जाने कहाँ विलुप्त हो गए हैं।
   पड़ोस में खिली चम्पा की महक अमलतास के गजरों में गुत्थम-गुत्था होकर बह रही है और गजरों से सुगंधी बयारें उठ रही हैं। सामने की इमलियों ने अभी-अभी लिबास बदले हैं और नवपर्णों से नखशिखान्त होकर कलियों एवं फूलों से लदती जा रही है। बड़ी खूबसूरत लगने लगी है इमली। अगले ही कुछ दिनों में इमलियों से फूलों की वर्षा होने लगेगी और फूलों की बारातों का बड़ा लुभावन दृश्य यहाँ उपस्थित  होगा। दोपहरिया होने को है और चिलचिलाती धूप और तेज होती जा रही है। मैं अचंभित हूँ कि इतनी गर्माहट में भी अमलतास, चम्पा और इमली के चेहरे पर जरा शिकन तो छोड़ो, वे तो और तरोताजा दिखने लगे हैं। 
     नदिया के तट पर खड़े जामुन की देह चक्राकार फूलों से भर आयी है, तथा झरते फूलों की जगह छोटे- छोटे जामुन आने लगे हैं।
मेरी कनखियों में मोगरे का एक पौधा है, जो महीनों से लगातार बहरों पे बहरे लुटा रहा है। मोगरे के फूलों की खुशबू हर हवा के झोंके से वातायन में घुलकर भवताल सुगंधित किए जा रही है। मोगरे की गंध से मन प्रसन्न हुआ जा रहा है। मन ही मन मैं सोंच रहा हूँ कि जाने कहाँ से ये मोगरा इतनी सुगंध लाता होगा।
        बायीं ओर एक कलेर का पेड़ है, जो इस तेज और चढ़ती धूप में खिलखिला उठा है। कमाल है इस कलेर की पर्णों का! नामो-निशान नहीं और उलझी हुई घनी शाखाओं पर गुलाबी फूलों की बाढ़ आ गयी है। विलक्षण खूबसूरत फूलों के गजरे निष्पर्ण शाखाओं पर उमड़ पड़े हैं। इन फूलों के हँसने और खिलखिलाने के अंदाज भी कितने प्यारे हैं। बिल्कुल बेफिक्र, बिंदास और मस्त-मौला खिलखिलाते फूल, ना धूप की परवाह-ना गर्मी का मलाल। वाह! क्या फूल है! प्रकृति तुम्हारी लीला गजब है!
   भारी गर्मी के चलते एक घने बादाम के पेड़ की पनाह मैंने ली तो और बादाम का सौंदर्य देख भौंचक्का रह गया। बादाम की हरी और घनी पत्तियों का विशाल साम्राज्य और टहनियों से झरते बादाम बीच-बीच में मेरे बदन पर टपकने लगे। बादाम के पत्तों का झरना हमेशा से ही मुझे आकर्षित तो करते आया है, पर र उसमें ये फलों का टपकना…।
   वाकई ये पेड़, पौधे, लताएं इस धरातल को कितना समृद्ध बना रहे हैं। हर पेड़-पौधा अपनी-अपनी हैसियत से पृथ्वी को खुशबूमय बना रहा है। प्रकृति के लिए अपना योगदान दे रहा है और आदमी ?आदमी क्या कर रहा है ?

परिचय-संजीव शंकरराव आहिरे का जन्म १५ फरवरी (१९६७) को मांजरे तहसील (मालेगांव, जिला-नाशिक) में हुआ है। महाराष्ट्र राज्य के नाशिक के गोपाल नगर में आपका वर्तमान और स्थाई बसेरा है। हिंदी, मराठी, अंग्रेजी व अहिराणी भाषा जानते हुए एम.एस-सी. (रसायनशास्त्र) एवं एम.बी.ए. (मानव संसाधन) तक शिक्षित हैं। कार्यक्षेत्र में जनसंपर्क अधिकारी (नाशिक) होकर सामाजिक गतिविधि में सिद्धी विनायक मानव कल्याण मिशन में मार्गदर्शक, संस्कार भारती में सदस्य, कुटुंब प्रबोधन गतिविधि में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ विविध विषयों पर सामाजिक व्याख्यान भी देते हैं। इनकी लेखन विधा-हिंदी और मराठी में कविता, गीत व लेख है। विभिन्न रचनाओं का समाचार पत्रों में प्रकाशन होने के साथ ही ‘वनिताओं की फरियादें’ (हिंदी पर्यावरण काव्य संग्रह), ‘सांजवात’ (मराठी काव्य संग्रह), पंचवटी के राम’ (गद्य-पद्य पुस्तक), ‘हृदयांजली ही गोदेसाठी’ (काव्य संग्रह) तथा ‘पल्लवित हुए अरमान’ (काव्य संग्रह) भी आपके नाम हैं। संजीव आहिरे को प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में अभा निबंध स्पर्धा में प्रथम और द्वितीय पुरस्कार, ‘सांजवात’ हेतु राज्य स्तरीय पुरुषोत्तम पुरस्कार, राष्ट्रीय मेदिनी पुरस्कार (पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार), राष्ट्रीय छत्रपति संभाजी साहित्य गौरव पुरस्कार (मराठी साहित्य परिषद), राष्ट्रीय शब्द सम्मान पुरस्कार (केंद्रीय सचिवालय हिंदी साहित्य परिषद), केमिकल रत्न पुरस्कार (औद्योगिक क्षेत्र) व श्रेष्ठ रचनाकार पुरस्कार (राजश्री साहित्य अकादमी) मिले हैं। आपकी विशेष उपलब्धि राष्ट्रीय मेदिनी पुरस्कार, केंद्र सरकार द्वारा विशेष सम्मान, ‘राम दर्शन’ (हिंदी महाकाव्य प्रस्तुति) के लिए महाराष्ट्र सरकार (पर्यटन मंत्रालय) द्वारा विशेष सम्मान तथा रेडियो (तरंग सांगली) पर ‘रामदर्शन’ प्रसारित होना है। प्रकृति के प्रति समाज व नयी पीढ़ी का आत्मीय भाव जगाना, पर्यावरण के प्रति जागरूक करना, हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु लेखन-व्याख्यानों से जागृति लाना, भारतीय नदियों से जनमानस का भाव पुनर्स्थापित करना, राष्ट्रीयता की मुख्य धारा बनाना और ‘रामदर्शन’ से परिवार एवं समाज को रिश्तों के प्रति जागरूक बनाना इनकी लेखनी का उद्देश्य है। पसंदीदा हिंदी लेखक प्रेमचंद जी, धर्मवीर भारती हैं तो प्रेरणापुंज स्वप्रेरणा है। श्री आहिरे का जीवन लक्ष्य हिंदी साहित्यकार के रूप में स्थापित होना, ‘रामदर्शन’ का जीवनपर्यंत लेखन तथा शिवाजी महाराज पर हिंदी महाकाव्य का निर्माण करना है।