डॉ. कुमारी कुन्दन
पटना(बिहार)
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हमारा भविष्य, ताकत और प्रेरणा (विश्व माता-पिता दिवस विशेष)…
जीवन की शुरुआत है होती,
कहते जिसे प्यारा सा परिवार
माता-पिता का साथ है मिलता,
समझो है ये ईश्वर का उपहार।
जन्म से ही वो परवाह करते
कुछ अनहोनी ना हो, डरते
बच्चों की खुशी की खातिर,
अपनी खुशी त्याग भी देते।
नि:स्वार्थ और बिना शर्त का,
दिल का सच्चा प्यार लुटाते
अनुभव खजाना हमें बांटते,
शिक्षा और संस्कार भी देते।
डग-मग जब भी पाँव हो,
थाम के उंगली हमें चलाते
मुँह से निकले तोतली बोली,
प्यार से मीठे बोल सिखाते।
माँ होती है घर की रौनक,
पिता से मान, पहचान मिले
वक्त का पहिया चलता रहता,
हम पलते, प्यार की छाँव तले।
पिता दिनभर मेहनत करते,
सबकी जरुरत पूरी होती
माँ दिनभर चाकरी करती,
घर और बच्चे संभालती रहती।
माता-पिता ही प्रेरणा होते,
सम्बल और सहारे भी होते
भविष्य सुनहरा बच्चों का हो,
हर सम्भव प्रयास ये करते।
नि:स्वार्थ प्रेम और त्याग,
ही महिमा इनकी बढ़ाता है
जीवन का बलिदान समर्पण,
यही फरिश्ता इन्हें बनाता है।
सच्चा प्रेम और त्याग समर्पण
किसी रिश्ते में नहीं मिलते हैं।
मातृ देवो भव:,पितृ देवो भव:,
इसलिए वेद-पुराण भी कहते हैं॥