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कटुवचन

श्रीमती पुष्पा शर्मा ‘कुसुम’
अजमेर(राजस्थान)
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मानव को मिला
वाणी का वरदान।
सधते उसी से
संसार के व्यवहार।
ज्ञान विज्ञान
मनोरंजन,
सभी तो जुड़े हैं
वाणी के सूक्ष्म तंतु से।
मानव मन पर
करती राज्य,
संतों की अमृतमय वाणी।
हरती दुःख-क्लेश
देती शाश्वत शान्ति।
ठीक उलटा,
कटुवचन प्रभाव
पल में भरता
मन में द्वेष-भाव,
पनपता
संघर्ष।
बिगाड़ता संबंध
बढ़ती वाग्वाणों की बौछार,
देती गहरे घाव
जिसका
नहीं कोई मरहम,
फिर परिणाम टकराव।
पनपती महाभारत
होता सृष्टि विध्वंस।
अगर विचारेंगे,
पायेंगे सतत चलते
युद्धों की जड़ों का रहस्य,
पोषित अंबु में बसा गरल
जिसका उदगम
कटु वचन।
ध्यान रहे,
वाणी के मदांध
गज की गति पर,
विवेक की सोच का
अंकुश रहे॥

परिचय  : श्रीमती पुष्पा शर्मा का साहित्यिक उपनाम-कुसुम और जन्मतिथि-२४ जुलाई १९४५ है। राजस्थान राज्य के कुचामन(जिला-नागौर)शहर में जन्मीं श्रीमती शर्मा वर्तमान में हरीभाऊ उपाध्याय नगर-अजमेर(राजस्थान) में निवासरत हैं। आपकी शिक्षा-एम.ए.और बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में आप राजस्थान के शिक्षा विभाग से सेवानिवृत व्याख्याता(हिन्दी विषय)हैं।सामाजिक गतिविधि में वृद्धाश्रमों की यथासंभव सेवा कार्य सेवा समूह के माध्यम से करती हैं,तो अन्ध विद्यालय और बधिर विद्यालय आदि से भी जुड़कर कार्यरत हैं। लेखन में दोहे,मुक्त पद और सामान्य गद्य के साथ ही आप चौपाई,घनाक्षरी,रोला आदि छंदबद्ध एवं छंदमुक्त,अतुकांत, गीत आदि और गद्य में संस्मरण, लघुकथा,समालोचना एवं साक्षात्कार आदि रचती हैं। सोशल मीडिया के तहत चुनिंदा साहित्यिक समूहों के माध्यम से भी काव्य सृजन करती हैं। आपकी रचनाओं का प्रकाशन वेब पोर्टल के साथ ही कुछ साहित्यिक ई-पत्रिका व अन्य में भी हो चुका है। संस्थाओं द्वारा विभिन्न लेखन व प्रतियोगिता पर आपको सम्मानित किया गया है। आपकी लेखनशीलता का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है।