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कभी नहीं जान पाओगे

मोनिका गौड़’मोनिका’
बीकानेर (राजस्थान )
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मैंने जो जाना लिखा
जो पहचाना लिखा,
जो ना जाना,ना पहचाना वो
महसूस कर लिखाl
जानने,लिखने और पहचानने के बीच
फिसलते रहे कुछ अनुभव,
जो सिर्फ गालों पर
उन्हें सूखे अश्कों में
लिखाl
और अपने ही हाथों से मिटा
मुस्कान में लपेट कर पेश कर दिया,
चाय के साथ
तुम कभी नहीं पढ़,लिख,समझ,
और जान पाओगेl
ये लिपि,ये भाषा
तुम्हारे सिस्टम में नहीं है,
शाम के धुंधलके
भोर के उजास का,
हौले-हौले सिसकती बूंदों के संगीत
और उनके बीच के कुछ अनकहे को डि-कोड कर पाना।

परिचय-मोनिका गौड़ का साहित्यिक उपनाम ‘मोनिका’ है। यह १२ अगस्त १९७२ को नोहर(राजस्थान)में जन्मीं हैं।वर्तमान निवास स्थल बीकानेर (राजस्थान )है। हिंदी,राजस्थानी एवं  अंग्रेज़ी का ज्ञान रखने वाली मोनिका की शिक्षा-गृह विज्ञान में स्नातक तथा बी.एड.,एम.ए.(राजस्थानी हिंदी) और ‘नेट’ है। शिक्षा विभाग में अध्यापन आपका कार्यक्षेत्र है। सामाजिक गतिविधि में सामयिक व सामाजिक कार्यों से जुड़ाव है। इनकी लेखन विधा-कविता,नज्म,समालोचना,कहानी,शोध आलेख है। प्रकाशन में आपके नाम-‘अपने आपसे अपरिचित’,’हरी-हरी खुशबू’ और ‘काली गौरैया’ हिंदी काव्य संग्रह सहित ‘हथेली में चाँद’,’अंधारै री उधारी अर रीसानो चाँद’ आदि राजस्थानी कविता संग्रह भी हैं। साथ ही रचनाओं का प्रकाशन कई पत्र-पत्रिकाओं में हुआ है। कई सम्मान भी मिले हैं।आपकी लेखनी का उद्देश्य-चेतना व विरेचन है। इनके लिए प्रेरणा पुंज-पिताजी हैं।

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