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‘केमाशिबो’ कर रहा राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन, याचिका

सेवा में,
संयुक्त सचिव,
राजभाषा विभाग
गृह मंत्रालय, भारत सरकार,
नई दिल्ली।

विषय:-केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (केमाशिबो) द्वारा राजभाषा अधिनियम की धारा ३(३) तथा राजभाषा नियम, १९७६ के नियम ११ के निरंतर उल्लंघन और अंग्रेजी थोपने के विरोध में याचिका।

महोदय,
   इस अभ्यावेदन के माध्यम से मैं आपका ध्यान केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (केमाशिबो) द्वारा किए जा रहे भाषाई भेदभाव और राजभाषा नीतियों के खुले उल्लंघन की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।केमाशिबो जैसा प्रतिष्ठित बोर्ड, संसद द्वारा पारित राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए छात्रों और अभिभावकों पर बलपूर्वक अंग्रेजी थोप रहा है।
   बोर्ड के सभी विद्यार्थियों या उनके माता-पिता का अंग्रेजी में पारंगत होने का कोई प्रामाणिक आधार नहीं है, फिर भी उनके साथ यह अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। भारत में अंग्रेजी को अवांछित बढ़ावा देने और हिन्दी सहित अन्य भारतीय भाषाओं को दोयम दर्जे पर धकेलने में इस बोर्ड ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है और हिन्दी माध्यम के विद्यालयों को बंद करवाने में भी।
  द्विभाषी’ का स्पष्ट वैधानिक अर्थ यह है कि राजभाषा अधिनियम १९६३ की धारा ३(३) के अंतर्गत आने वाले १४ दस्तावेज एकसाथ एक ही समय में दोनों भाषाओं में द्विभाषी (अर्थात डिगलॉट स्वरूप में) तैयार करने होंगे अर्थात् एक ही दस्तावेज में दोनों भाषाओं का प्रयोग अनिवार्य है। जिन दस्तावेजों को राजभाषा अधिनियम की धारा ३(३)के तहत द्विभाषी होना अनिवार्य है, यदि वे केवल अंग्रेजी में जारी किए जाते हैं, तो वे विधिक दृष्टि से पूर्णतः ‘अवैध’ और ‘शून्य’ हैं। ऐसे प्रपत्रों की कोई वैधानिक मान्यता नहीं होती। ऐसे दस्तावेजों की वैधता को न्यायालय में बड़ी आसानी से चुनौती दी जा सकती है क्योंकि अधिनियम में कोई छूट नहीं दी गई है कि पहले अंग्रेजी वाला जारी कर दो और बाद में उसका अनुवाद करके फाइल में लगा दिया जाए। चूँकि, भारत की राजभाषा हिन्दी है इसलिए दस्तावेज मूल रूप से हिन्दी में ही तैयार होना चाहिए परंतु स्वतंत्रता के ७५ वर्ष बाद भी ऐसा नहीं किया जा रहा है और हिन्दी को अनुवाद की भाषा बना दिया गया है। कम से कम इतना तो कीजिए, कि जब तक हिन्दी अनुवाद तैयार न हो जाए, कोई भी दस्तावेज जारी न किया जा सके, यह मैं नहीं कह रही हूँ बल्कि संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कानून में लिखा है।
नियम ११ के अनुसार प्रपत्र, प्रमाण-पत्र या आवेदन-पत्र, स्टेशनरी की मदें, पोस्टर, बैनर, ई-फार्म, डिजिटल फॉर्म, वेब फार्म में भी एक साथ हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार करना अनिवार्य है। केवल अंग्रेजी में तैयार, छापे गए ऐसे प्रारूप, फार्म, आवेदन अवैध हैं।
   धारा ३(३) के अनुसार संकल्प, सामान्य आदेश, परिपत्र, सार्वजनिक सूचनाएँ और प्रेस विज्ञप्तियां अनिवार्य रूप से द्विभाषी (हिन्दी और अंग्रेजी) रूप में जारी की जानी चाहिए, परंतु स्थिति की गंभीरता इस बात से प्रमाणित होती है कि मात्र जून २०२६ के प्रथम ६ दिनों में बोर्ड द्वारा सभी अनिवार्य परिपत्र व विज्ञप्तियाँ केवल अंग्रेजी में जारी की गई हैं। केवल अंग्रेजी दस्तावेजों की नवीनतम सूची इस प्रकार हैं:

🔹

०६/०६/२०२६: कक्षा १२ के परिणाम घोषित होने के बाद की सुविधाओं के लिए समय सीमा का विस्तार (३१२ केबी)

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०५/०६/२०२६: प्रेस प्रकाशनी : केमाशिबो ने परिणाम घोषणा पोर्टल पर समन्वित साइबर हमलों के संबंध में दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है (२२८ केबी)

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०४/०६/२०२६: अतिरिक्त प्रश्नों के हल करने पर अंकों के योग के संबंध में स्पष्टीकरण (५५१ केबी)

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०३/०६/२०२६: प्रेरणा कार्यक्रम, वडनगर, गुजरात हेतु निदेशक एवं मार्गदर्शकों की नियुक्ति के लिए नामांकन आमंत्रण (३.१४ एमबी)

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०२/०६/२०२६: प्रेस प्रकाशनी : उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों में पाई गई कमियों के सत्यापन और उत्तरों के पुनर्मूल्यांकन के संबंध में (३७६ केबी)

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०२/०६/२०२६: देखी गई समस्याओं के सत्यापन और प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने हेतु पोर्टल का प्रारंभ (१.४९ एमबी)। आधार (२८९ केबी)

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२४/०५/२०२६: कक्षा १२ बोर्ड परीक्षा २०२६ की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुई प्रतियां प्राप्त करने की तिथि में विस्तार (३९९ केबी)

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२२/०५/२०२६: कक्षा १२ की बोर्ड परीक्षा २०२६ की स्कैन की हुई उत्तरपुस्तिका प्राप्त करने की समय सीमा में विस्तार के संबंध में (५५० केबी)
   उपरोक्त सभी प्रपत्रों का केवल एक विदेशी भाषा में जारी होना राजभाषा के नाम पर चल रहे ढोंग को उजागर करता है और यह एक दंडनीय प्रशासनिक लापरवाही है। वर्ष २०१६ में ६ जून २०२६ तक केमाशिबो ने एक भी दस्तावेज द्विभाषी में जारी नहीं किया है, प्रमाण के रूप में २०२६ के परीक्षा संबंधी परिपत्रों की सूची संलग्न है जो सभी अंग्रेजी में जारी किए और एक भी द्विभाषी नहीं। इतने सारे परिपत्रों में २ परिपत्रों का अनुवाद कई सप्ताह बाद अपलोड किया गया।
  अतः, आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस विषय का संज्ञान लेते हुए केमाशिबो के संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई करें तथा उन्हें तत्काल प्रभाव से यह निर्देशित करें कि भविष्य में सभी परिपत्र, प्रेस प्रकाशनी एवं सूचनाएं अनिवार्य रूप से हिन्दी में भी जारी की जाएँ।
सधन्यवाद।

भवदीय
अभिषेक कुमार,मप्र

(सौजन्य:वैश्विक हिन्दी सम्मेलन, मुम्बई)