हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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मेरा पर्यावरण, मेरी जान (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)…
करुण पुकार सुनो,
पेड़ आज आँसू बहा रहे हैं
लोगों को समझाते-समझाते थक गए,
फिर भी क्यों काटे जा रहे हरे-भरे पेड़ ?
कब ‘जागोगे’ नींद में सोने वालों,
पर्यावरण को ‘बचाओ’ नहीं तो कुछ भी नहीं रहेगा
जीवन का पर्याय हरियाली, पेड़-पौधे हैं,
फिर क्यों ‘काटे’ जा रहे हरे-भरे पेड़ ?
हमने देखा था, जब ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटकते थे,
वह दिन ‘कोरोना’ के क्यों भूल गए
फिर भी पेड़-पौधों का महत्व नहीं समझ रहे हो!
आखिर क्यों काटे जा रहे हैं हरे-भरे पेड़ ?