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खरी-खरी

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’
मुंबई(महाराष्ट्र)
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जिन्हें वतन के आदर्शों का,दर्प दिखाना था जन को,
सत्य और सुचिता के पथ पर,जिन्हें चलाना था मन को।
जिन कंधों को संस्कार का,भार उठाया जाना था,
जिनको अपनी नीति नियत का,प्रहरी हमने माना था।
भले-बुरे का भेद बताकर,सत्य उगलना था जिनको,
नेह स्नेह के हिम शिखरों-सा,नित्य पिघलना था जिनको।
भटक गए थे जो राहों से,राह दिखानी थी उनको,
टूट चुकी आशाओं में भी,प्यास जगानी थी उनको।
जय जवान के नारों का भी,घोष लगाना था जिनको,
जय किसान के माथे पर भी,तिलक लगाना था जिनको।
सत्ता के सूरज से सचमुच,आँख मिलानी थी जिनको,
अहंकार के पर्वत को भी,जमीं दिखानी थी जिनको।
धन का बल हो बाहुबली हो,जेब में सत्ता जिनके हो,
हर बाजी की तुरुप का इक्का,पास में पत्ता जिनके हो।
उनकी भी तो अकल ठिकाने,खूब लगानी थी तुमको,
और देश में नेह स्नेह की,दूब उगानी थी तुमको।
लेकिन ये क्या खुद ही तुम तो,खुद राहों से भटक गए,
रंग-बिरंगे नोटों में ही,तुम तो खुद ही अटक गए।
रक्षक जिनको माना था वे, चोरों के सरदार हुए,
टूट गई गाँधी की लाठी,कुर्ते भी कलदार हुए।
महल अटारी बंगला गाड़ी,अब इनके पैमाने हैं,
दीन-हीन या दलित पतित को,बोलो कब पहचाने हैं।
कहाँ रेडियो टीवी प्रेस,स्तंभ बताए जाते थे,
संस्कार के शीर्ष शिखर पर,ये ही हरदम आते थे।
नाम मिले फिर दाम मिले फिर,अंतहीन जिज्ञासा का,
कत्ल किया है संदर्भों का,भारत की परिभाषा का॥

परिचय-ओमप्रकाश अग्रवाल का साहित्यिक उपनाम ‘बबुआ’ है।आप लगभग सभी विधाओं (गीत, ग़ज़ल, दोहा, चौपाई, छंद आदि) में लिखते हैं,परन्तु काव्य सृजन के साहित्यिक व्याकरण की न कभी औपचारिक शिक्षा ली,न ही मात्रा विधान आदि का तकनीकी ज्ञान है।आप वर्तमान में मुंबई में स्थाई रूप से सपरिवार निवासरत हैं ,पर बैंगलोर  में भी  निवास है। आप संस्कार,परम्परा और मानवीय मूल्यों के प्रति सजग व आस्थावान तथा देश-धरा से अपने प्राणों से ज्यादा प्यार है। आपका मूल तो राजस्थान का झूंझनू जिला और मारवाड़ी वैश्य है,परन्तु लगभग ७० वर्ष पूर्व परिवार उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में आकर बस गया था। आपका जन्म १ जुलाई को १९६२ में प्रतापगढ़ में और शिक्षा दीक्षा-बी.कॉम.भी वहीं हुई है। आप ४० वर्ष से सतत लिख रहे हैं।काव्य आपका शौक है,पेशा नहीं,इसलिए यदा-कदा ही कवि मित्रों के विशेष अनुरोध पर मंचों पर जाते हैं। लगभग २००० से अधिक रचनाएं आपने लिखी होंगी,जिसमें से लगभग ७०० का शीघ्र ही पाँच खण्डों मे प्रकाशन होगा। स्थानीय स्तर पर आप कई बार सम्मानित और पुरस्कृत होते रहे हैं। आप आजीविका की दृष्टि से बैंगलोर की निजी बड़ी कम्पनी में विपणन प्रबंधक (वरिष्ठ) के पद पर कार्यरत हैं। कर्नाटक राज्य के बैंगलोर निवासी श्री  अग्रवाल की रचनाएं प्रायः पत्र-पत्रिकाओं और काव्य पुस्तकों में  प्रकाशित होती रहती हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-जनचेतना है।