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गांधी जी के जीवन पर डाॅ.जोशी ने रचा महाकाव्य ‘महात्मायन’

उज्जैन(मध्यप्रदेश)।

महात्मा गांधी के १५० वें जन्मशती वर्ष में उज्जैन के लेखक-सम्पादक शिक्षाविद् डाॅ. देवेन्द्र जोशी ने गांधी जी के समग्र व्यक्तित्व पर ‘महात्मायन’ शीर्षक से महाकाव्य की रचना की है। इसका लोकार्पण ४ अप्रैल को उज्जैन में होगा।
लेखक डॉ.जोशी के अनुसार इस पुस्तक में गांधी जी के जीवन को २८ प्रसंगों के माध्यम से कविता में व्यक्त किया गया है। उनके पूर्वज,बचपन,शिक्षा,विलायत प्रवास,रंगभेद संघर्ष,प्रथम श्रेणी डिब्बे से उतारने की घटना,कीमती उपहारों को लेकर पति-पत्नी की नोक-झोंक और ट्रस्ट बनाकर उपहारों का त्याग,सर्वोदय प्रस्फुटन,गोरों के हाथों गांधी जी की पिटाई,नमक आन्दोलन, चम्पारन सत्याग्रह,कांग्रेस की अध्यक्षता,दलितोद्धार तथा भारत छोड़ो आन्दोलन आदि प्रसंग प्रमुख हैं।
पुस्तक का प्रकाशन महात्मा गांधी सेवा प्रतिष्ठान(उज्जैन) ने किया है। यह पुस्तक क्रांतिकारियों पर १५ महाकाव्य लिखने वाले श्रीकृष्ण सरल को समर्पित की गई है।
उल्लेखनीय है कि हिन्दीभाषा डॉट कॉम परिवार के वरिष्ठ रचना शिल्पी और कवि डाॅ.जोशी सिंहस्थ और उज्जैन पर भी एक वृहद ग्रंथ लिख चुके हैं तो करीब आधा दर्जन से अधिक पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी है। विगत ३५ वर्षों से साहित्य साधनारत डॉ.जोशी का यह महाकाव्य नई पीढ़ी को ध्यान में रखकर सहज- सरल भाषा में चतुष्पदी में लिखा गया है। आज के डिजिटलाइजेशन (अंकरूपण) और इंटरनेट(अंतरजाल) के युग में गांधी जी से दूर होती जा रही नई पीढ़ी में महात्मा गांधी के प्रति कविताओं के जरिए रूचि जगाने की यह एक विनम्र कोशिश है।
आपने बताया कि,इस महाकाव्य को लिखने की जरूरत इसलिए महसूस हुई कि गांधी जी एक राष्ट्रनायक के साथ ही समाजदृष्टा भी थे। उनके सत्य,अहिंसा,सत्याग्रह और सदाचार के आदर्शों की आज पहले से भी कहीं अधिक आवश्यकता है।