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चुनावों में युवाओं की महती भूमिका

शम्भूप्रसाद भट्ट `स्नेहिल’
पौड़ी(उत्तराखंड)

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युवा देश का स्वर्णिम भविष्य होता है। सबसे बड़ी प्रसन्नता इस बात की है कि हाल में लिए गये आंकड़ों के अनुसार भारत विश्वभर में युवाओं की दृष्टि से सबसे समृद्ध देश है। युवाओं का प्रभाव तथा उनकी देश में बाहुल्यता समृद्ध भविष्य की ओर संकेत है,लेकिन यह युवाओं के संस्कार विचार व सोच तथा कार्य के प्रति निष्ठा पर भी निर्भर करता है कि वे देश को स्वर्णिम बनाते या पीछे धकेलते हैं। फिर भी हम आशावादी हैं। युवाओं पर देश की दशा-दिशा सुनिर्धारित होती है। स्व.राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में २१ वर्ष से १८ वर्ष के युवाओं को चुनाव देने का अधिकार प्रदान किया गया है। इस प्रकार १८ से २१ वर्ष के मध्य आयुवर्ग के युवा मतदाताओं की बहुत वृद्धि हुई है। निश्चित ही यह कदम बहुत ही अच्छा रहा,क्योंकि इससे देश की सरकारों के लिए होने वाले चुनावों में युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित हो सका है।
देश का युवा सरकार से क्या अपेक्षा रखता है ? यह उनकी अपनी भविष्य की सुख-समृद्धि तथा आशाओं व इच्छाओं पर निर्धारित करता है। युवा की सबसे पहली अपेक्षा होती है,उसे वह शिक्षा सुविधा मुहैया कराई जाए, जिससे उसका भविष्य व जीवन स्वावलंबी हो। युवाओं की रोजगार प्राप्ति की इच्छा इस कारण सबसे अधिक होतीं है,ताकि उन्हें उनकी आवश्यकतानुसार आय का स्त्रोत सुनिश्चित हो सके। उनकी इन्हीं इच्छाओं की पूर्ति जो राजनीतिक दल करे,वे उसका ही सबसे अधिक समर्थन करते हैं।
युवाओं की सोच उनके पारिवारिक व सामाजिक परिवेश पर भी आधारित होती है,वे जिस वातावरण में पले-बढ़े हों,निश्चित ही वह सोच उनके संस्कारों से जुड़ जाती है। इसलिए,यह भी नहीं कहा जा सकता कि सभी युवा अपनी पसंद से मात्र रोजगारपरक राजनीतिक दल को ही अपना मत देंगे,उनका देश के विकास की सोच,सामाजिक उत्थान आदि विचार भी हो सकते हैं,जिससे वे मात्र रोजगार की राजनीति करने वाले दल को ही मतदान नहीं करेंगे,बल्कि वे उसे अधिक समर्थन देंगे,जो दल देश की सुरक्षा,सम्मान व समृद्धि के लिए अधिक सजग हो।
निश्चित ही युवाओं की अनेक प्रकार की अपेक्षाएँ होती हैं,परंतु इतना तो निश्चित ही तय है कि भारतीय युवा मतदाता उनकी संख्या बल को देखते हुए किसी राजनीतिक दल को चुनाव में भारी मतों से विजयी बनाकर नई सरकार के गठन में सबसे भूमिका अदा करते हैं।
मानते हैं कि युवाओं की अपनी व्यक्तिगत कई समस्याएँ होंगी,लेकिन देश व समाज हित में युवाओं को ऐसे सशक्त दल को ही समर्थन व सहयोग करना चाहिए,जो उन्हें उनकी अपेक्षाओं की पूर्ति में सहयोग तो करे ही, साथ ही समाज व देशहित में अधिक से अधिक कार्य करे।
आज युवाओं में वह शक्ति है,वह चाहें तो अपने मतदान की ताकत से देश को एक ऐसी सशक्त सरकार प्रदान कर सकते हैं,जो विश्व में देश का सम्मान बढ़ाये और इसे महाशक्ति बनाकर देश की सुरक्षा निश्चित कर सके। यही युवा शक्ति की राजनीतिक जागरूकता की सच्ची जीत होगी।

परिचय-शम्भूप्रसाद भट्ट का साहित्यिक उपनाम-स्नेहिल हैl जन्मतिथि-२१आषाढ़ विक्रम संवत २०१८(४ जुलाई १९६१) और जन्मस्थान ग्राम भट्टवाड़ी (रूद्रप्रयाग,उत्तराखण्ड) हैl आप वर्तमान में उफल्डा(श्रीनगर पौड़ी,उत्तराखंड) में रहते हैं,जबकि स्थाई निवास ग्राम-पोस्ट-भट्टवाड़ी (जिला रूद्रप्रयाग) हैl उत्तराखण्ड राज्य से नाता रखने वाले श्री भट्ट कला एवं विधि विषय में स्नातक होने के सात ही प्रशिक्षु कर्मकाण्ड ज्योतिषी हैंl आप राजकीय सेवा से स्वैच्छिक रुप से सेवानिवृत्त हैंl  सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत विविध साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं में प्रतिभागिता-सहयोगात्मक मदद करते हैंl शम्भूप्रसाद भट्ट की लेखन विधा-पद्यात्मकता तथा गद्यात्मकता के तहत सम-सामयिक लेख,समीक्षात्मक एवं शोध आलेख आदि हैl ३ पुस्तकें प्रकाशित होने के साथ ही तथा देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हुआ हैl आपको साहित्यिक-सामाजिक कार्योंं हेतु स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ४० से अधिक उत्कृष्टतम सम्मान-पुरस्कार प्राप्त हुए हैंl साथ ही अलंकरणों से भी विभूषित हो चुके हैंl इनकी दृष्टि में विशेष उपलब्धि-सन्तुष्टिपूर्ण जीवन और साहित्यिक पहचान ही हैl श्री भट्ट की लेखनी का उद्देश्य-धर्म एवं आध्यात्म,वन एवं पर्यावरणीय,सम-सामयिक व्यवस्था तथा राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ ही मातृभाषा हिंदी का बेहतर प्रचार-प्रसार करना हैl