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डिजिटल मीडिया ने पत्रकारिता को सुदृढ़ किया

पत्रकारिता अध्ययनशाला में `डिजिटल मीडिया और हिन्दी:संभावनाएं एवं चुनौतियां` पर संगोष्ठी के समापन में कहा मध्यप्रदेश के जनसंपर्क आयुक्त पी. नरहरि ने

इंदौर।

पत्रकारिता के भी दो पहलू होते हैं,एक सकारात्मक दूसरा नकारात्मक और वर्तमान समय में डिजिटल मीडिया ने पत्रकारिता को सुदृढ़ किया है। वर्तमान युग सोशल मिडिया का युग है। आज की पत्रकारिता को भी वास्तविकता,विश्वसनीयता और सकारात्मकता का निर्माण करने पर कार्य करना चाहिए। हम कह सकते हैं कि आज वह व्यक्ति जिसके हाथ में मोबाइल है,पत्रकार है।

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम और दूसरे दिन २९ मार्च को बतौर मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क आयुक्त पी. नरहरि ने यह बात कही। श्री नरहरि ने कहा कि,पत्रकारिता में हमारा नजरिया पुस्तक का नहीं,बल्कि व्यावहारिक होना चाहिए। आपके अनुसार डिजिटल मीडिया व मोबाइल मीडिया ने प्रत्येक व्यक्ति को पत्रकार बना दिया है। प्रिंट मीडिया के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने आधिपत्य किया था,लेकिन अब डिजिटल मीडिया इन दोनों पर अधिपत्य करने के लिए तैयार हो गया है। श्री नरहरि ने कहा कि मीडिया में आधुनिकता के साथ सकारात्मकता लाने की बहुत ज्यादा आवश्यकता है।

संगोष्ठी में इंग्लैंड से आए मार्क लिंडले द्वारा शोध प्रस्तुत करके बताया गया कि,८००० लोगों पर एक सर्वे किया गया। शोध के जरिये उन्होंने जर्मन राजनीति में पत्रकारिता की भागीदारी को समझाते हुए बताया कि,पत्रकारिता को सोशल मीडिया के जरिये पूरे विश्व में पुनर्स्थापित किया गया है।

केन्या के शोधार्थी जोशुआ(भारत में रहकर संस्कृति को जान रहे) ने बताया कि,सोशल मीडिया को सीखने की जरूरत नहीं होतीं। फेसबुक,ट्विटर और व्हाट्सएप जैसी एप्प को हम खुद चलाना सीखते हैं। ३ व्हाट्सएप एवं ३ फेसबुक खाते संचालित करने वाले जोशुआ ने बताया कि,सोशल मीडिया और इंटरनेट ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया है। डिजिटल सदी में हम सभी सोशल मीडिया को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना चुके है।

बेंगलुरु के शेषाद्रिपुरम महाविद्यालय की हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.उर्मिला पोरवाल व संपादक मनोज कुमार भी बतौर अतिथि उपस्थित थे।

संगोष्ठी की समन्वयक और विभागाध्यक्ष डॉ.सोनाली नरगुंदे ने सभी का धन्यवाद मानते हुए कहा कि हिंदी का घटता हुआ प्रभाव निश्चित रूप से चिंतनीय है। इस संगोष्ठी में हुआ चिंतन-मनन हिंदी भाषा को अपना गौरव दिलवाने में सार्थक साबित होगा। संचालन कुलदीप पंवार और अदिति मोटे ने किया।

७० से ज्यादा शोध-पत्र प्राप्त

२ दिन की इस संगोष्ठी में ३२ शोधार्थियों द्वारा अपने शोध-पत्र का वाचन किया गया,जबकि ७० से ज्यादा शोध-पत्र प्राप्त हुए। इनमें सोशल मीडिया में हिंदी का बढ़ता हुआ प्रभाव:एक अध्ययन, न्यू मीडिया के दौर में हिंदी समाचार पत्रों के समक्ष चुनौतियों का अध्ययन और राजनीतिक लेखन में हिंदी भाषा में सोशल मीडिया की उपयोगिता जैसे अन्य विषय भी रहे।

किया शोध-पत्रों का विश्लेषण

-शोध-पत्र का विश्लेषण करते हुए माखनलाल विश्वविद्यालय(भोपाल)के पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.श्रीकांत सिंह ने कहा कि,सूचना एक शक्ति है और जिसके पास शक्ति होगी,वही विश्व प्रशासन करेगा। आज की स्थिति से आगे बढ़ने के लिए पांच बातें अति आवश्यक है-टेक्नोलॉजी संपन्न होना,नए विचार,भाषा,प्रस्तुतिकरण एवं सामग्री।

-औरंगाबाद के एमजीएम पत्रकारिता महाविद्यालय की प्राचार्या रेखा शेल्के ने अपने विश्लेषण में कहा कि,हिदी हमारी राष्ट्रभाषा है और उसे आगे बढ़ाना हमारा दायित्व है। यह मीडिया बढ़ रहा है,लेकिन फेक न्यूज़ भी बढ़ रही है,उन्हें रोकना बड़ी चुनौती है। डिजिटल मीडिया के इस दौर में हमें हमारी कार्यकुशलता एवं योजना मोबाइल आधारित ही बनाना होगी।

-इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (अमरकंटक)के डॉ.राघवेंद्र मिश्रा ने विश्लेषण में बोलते हुए कहा कि,अब लड़ाई युद्ध के मैदान में नहीं दूसरे माध्यम से होगी। यूएसए का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जीडीपी में तीसरा बड़ा योगदान पत्रकारिता एवं मनोरंजन का है। डिजिटल मीडिया पर चर्चा करते हुए कहा कि डिजिटल मीडिया में बहुत बड़ी संभावना है अभी भी। २०२१ तक डिजिटल मीडिया में क्षेत्रीय भाषाएं हावी होगी और उसमें सबसे बड़ा सबसे बड़ा हिस्सा हिंदी का होगा।

-चतुर्थ तकनीकी सत्र में विश्लेषक के रूप में मुम्बई विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.सुंदर राजदीप ने अपने विश्लेषण में बताया कि मैं मुंबई से हूँ और हमने काम करते समय हिंदी को चुनौती नहीं माना।

-शाहिद शेख ने बताया कि,जो शिक्षित है उनमें से जानकारी पाने की जिज्ञासा कितने लोगों में है और उनमें से कितने लोग उपयोग कर रहे हैं,यह महत्वपूर्ण है।

केवल साहित्य की भाषा ही नहीं हिंदी-डॉ.गुप्ता

समापन अवसर पर अतिथि डॉ.एम.एल.गुप्ता (निदेशक-हिंदी वैश्विक मंच,मुंबई)ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम हिंदी भाषियों ने हिंदी को साहित्य भाषा बना रखा है। जब तक हम हिंदी को ज्ञान,विज्ञान,तकनीक, व्यापार और व्यवहार की भाषा नहीं बनाएंगे,तब तक हिंदी की साख ऐसे ही दिन- प्रतिदिन काम होती जाएगी।