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देश की शान ‘चौकीदार’

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’
बरेली(उत्तर प्रदेश)
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पलक न झपकूँ में पलछिन वतन के वास्ते जागूँ रात और दिन
झींगुर,मच्छर करते भिन-भिन,
भिन-भिन का संगीत प्रिय है,गाने का अंदाज प्रिय है
कुत्ता है वफादार साथी,सो न जाऊँ मैं कहीं भौंक-भौंक कर जगाते हैं।

नींद नहीं आँखों में,रात बिताऊँ तारे गिन-गिन
चोरों की में वाट लगाऊँ,हवालात की सैर कराऊँ,
घर में घुस जो उत्पात मचाये,नजर से मेरी बच न पाए
झुंड में जब वो आएं,सबको करूँ मैं छिन-भिन।

सुरक्षा कर्म है मेरा,कर्म ही धर्म है मेरा
जन-जन की आवाज हूँ,हाँ मैं चौकीदार हूँ,
देश की शान हूँ, काम की पहचान हूँ
देश का मैं चौकीदार जनसत्ता का प्रहरी हूँ।

सावधान पहरुओं,घर में भेदी रहता है,
‘घर का भेदी लंका ढाए’ चौकीदार ये कहता है,
निकालो इनको घर से ढूंढ-ढूंढ कर गिन-गिन…
पलक न झपकूँ पलछिन॥

परिचय-गीतांजली वार्ष्णेय का साहित्यिक उपनाम `गीतू` है। जन्म तारीख २९ अक्तूबर १९७३ और जन्म स्थान-हाथरस है। वर्तमान में आपका बसेरा बरेली(उत्तर प्रदेश) में स्थाई रूप से है। हिन्दी-अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाली गीतांजली वार्ष्णेय ने एम.ए.,बी.एड. सहित विशेष बी.टी.सी. की शिक्षा हासिल की है। कार्यक्षेत्र में अध्यापन से जुड़ी होकर सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत महिला संगठन समूह का सहयोग करती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,लेख,कहानी तथा गीत है। ‘नर्मदा के रत्न’ एवं ‘साया’ सहित कईं सांझा संकलन में आपकी रचनाएँ आ चुकी हैं। इस क्षेत्र में आपको ५ सम्मान और पुरस्कार मिले हैं। गीतू की उपलब्धि-शहीद रत्न प्राप्ति है। लेखनी का उद्देश्य-साहित्यिक रुचि है। इनके पसंदीदा हिंदी लेखक-महादेवी वर्मा,जयशंकर प्रसाद,कबीर, तथा मैथिलीशरण गुप्त हैं। लेखन में प्रेरणापुंज-पापा हैं। विशेषज्ञता-कविता(मुक्त) है। हिंदी के लिए विचार-“हिंदी भाषा हमारी पहचान है,हमें हिंदी बोलने पर गर्व होना चाहिए,किन्तु आज हम अपने बच्चों को हिंदी के बजाय इंग्लिश बोलने पर जोर देते हैं।”