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दे दो गणेश जी को चंदा

सौदामिनी खरे दामिनी
रायसेन(मध्यप्रदेश)

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दे दो गणेशजी को चंदा,हाँ हमें गणपति बिठाने,
गणपति बिठाने,गणपति बिठाने
दे दो गणेशजी को चंदा…

सौ-सौ रुपैया की मूरत ले आये,
ढोल-नगाड़े से गणपति बिठाये।
पंडा को देने है दक्षिणा,
हाँ हमें गणपति बिठाने।
दे दो गणेशजी को चंदा…

दूर्वा सिन्दूर बप्पा तुम्हें चढ़ाये,
ककड़ी केला के भोग लगाए।
मोदक से माने मेरे बप्पा,
हाँ हमें गणपति बिठाने।
दे दो गणेशजी को चंदा…

गणपति जी की झाँकी सजाए,
लाइट सर्किट को पैसा मंगाए।
लंबो सो तंबू लगवाने,
हाँ हमें गणपति बिठाने।
दे दो गणेशजी को चंदा…

ऋद्धि और सिद्धि के दाता कहाते,
नाम सुमिरि सब देव मनाते।
बप्पा दे दो हमें भी सदबुद्धि,
हाँ हमें गणपति बिठाने।
दे दो गणेशजी को चंदा…ll

परिचय-सौदामिनी खरे का साहित्यिक उपनाम-दामिनी हैl जन्म-२५ अगस्त १९६३ में रायसेन में हुआ हैl वर्तमान में जिला रायसेन(मप्र)में निवासरत सौदामिनी खरे ने स्नातक और डी.एड. की शिक्षा हासिल की हैl व्यवसाय-कार्यक्षेत्र में शासकीय शिक्षक(सहायक अध्यापक) हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,दोहा, ग़ज़ल,सवैया और कहानी है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय दामिनी की लेखनी का उद्देश्य-लेखन कार्य में नाम कमाना है।इनके लिए प्रेरणापुन्ज-श्री प्रभुदयाल खरे(गज्जे भैया,कवि और मामाजी)हैंl भाषा ज्ञान-हिन्दी का है,तो रुचि-संगीत में है।

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