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धैर्य धर, आएगा सावन

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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बरस के चला गया था सावन,
फिर से आएगा सावन, घूम के
गर्मी को दूर, भगा देगा सावन,
जल वर्षाएगा ओ, झूम-झूम के।

पावन वसुन्धरा मुस्कुराएगी,
खेतों में हरियाली, छा जाएगी
पनघट पर गोरी, शरमा जाएगी,
जब हरी चुनरिया भीग जाएगी।

इन्तजार करो, आ रहा है सावन,
बरसात से खिल उठेगा मधुबन
देखना रिमझिम, होगी बरसात,
गर्मी से शीतल, होगी दिन-रात।

जल से रथ, सजा रहा है सावन,
थोड़ा धैर्य धर, आ रहा है सावन।
राहों में भी दिखने लगेगी छतरी,
नारी की सर से, छलकेगी गगरी॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है

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