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नव वर्ष

छगन लाल गर्ग “विज्ञ”
आबू रोड (राजस्थान)
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(रचना शिल्प:विधान-३० मात्रा, १६, १४ पर यति। कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत। अंत में वर्णिक भार २,२,२)
बीत रही तिमिर घिरी रैना,नव वर्ष प्रभा फैली है।
द्वार उदयगिरि रोशन आभा,खिली रश्मि अलबेली है।
विगत दिनों की भूल चूक को,अरुणोदय में देखा है।
तम से मिली मूढ़ता गलती,लेना उसका लेखा है॥

वस्तु पुरातन सृष्टि त्यागती,नवल शक्ति भर लेती है।
नहीं रूकते चरण समय के,प्रकृति मृदुल रस देती है।
सत्य खोज में बढ़े कदम जो,खुशहाली ले आते हैं।
नव सपनों को नवल प्रभा में,हार नया पहनाते हैं॥

नये वर्ष में घड़ी सुबह की,डरना मत बाधाओं में।
तमस भागता रुक मत जाना,परम्परा शाखाओं में।
दीप जलाना अंधकार में,नया समय जब आता है।
ज्ञात हुआ फिर और जानना,नये वर्ष में भाता है॥

हिंदू मुस्लिम सिक्ख ईसाई,धर्म-कर्म की राहें हैं।
गिरजा गुरुद्वारा ज्ञात सभी,शाश्वत ईश्वर चाहें हैं।
सागर नद चाँद और तारे,दूर घने पर प्यारे हैं।
नये वर्ष की बोध दृष्टि में,अंतकरण में सारे हैं॥

आओ हम सब भय को त्यागे,सदगुरु सच्चा पायेंगे।
चाँद पूर्णिमा का खिल जाये,ऐसी किरणें लायेंगे।
भाग रही अहंकार रजनी,नवल वर्ष की बेला है।
अंतस्तल में मधुर रश्मि का,नवल स्वप्न का मेला है॥

परिचय–छगनलाल गर्ग का साहित्यिक उपनाम `विज्ञ` हैl १३ अप्रैल १९५४ को गाँव-जीरावल(सिरोही,राजस्थान)में जन्मे होकर वर्तमान में राजस्थान स्थित आबू रोड पर रहते हैं, जबकि स्थाई पता-गाँव-जीरावल हैl आपको भाषा ज्ञान-हिन्दी, अंग्रेजी और गुजराती का हैl स्नातकोत्तर तक शिक्षित श्री गर्ग का कार्यक्षेत्र-प्रधानाचार्य(राजस्थान) का रहा हैl सामाजिक गतिविधि में आप दलित बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत हैंl इनकी लेखन विधा-छंद,कहानी,कविता,लेख हैl काव्य संग्रह-मदांध मन,रंजन रस,क्षणबोध और तथाता (छंद काव्य संग्रह) सहित लगभग २० प्रकाशित हैं,तो अनेक पत्र-पत्रिकाओं में भी रचनाएं प्रकाशित हुई हैंl बात करें प्राप्त सम्मान -पुरस्कार की तो-काव्य रत्न सम्मान,हिंदी रत्न सम्मान,विद्या वाचस्पति(मानद उपाधि) व राष्ट्रीय स्तर की कई साहित्य संस्थानों से १०० से अधिक सम्मान मिले हैंl ब्लॉग पर भी आप लिखते हैंl विशेष उपलब्धि-साहित्यिक सम्मान ही हैंl इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का प्रसार-प्रचार करना,नई पीढ़ी में शास्त्रीय छंदों में अभिरुचि उत्पन्न करना,आलेखों व कथाओं के माध्यम से सामयिक परिस्थितियों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास करना हैl पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद व कवि जयशंकर प्रसाद हैंl छगनलाल गर्ग `विज्ञ` के लिए प्रेरणा पुंज- प्राध्यापक मथुरेशनंदन कुलश्रेष्ठ(सिरोही,राजस्थान)हैl