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नारी दशा-दिशा

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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नारी अद्भुत अवतार है,
संसार का संगीतमय श्रंगार है
जन्नत की नूर यहां,
सभ्य सलोना संस्कार है।

प्राचीन काल का इतिहास,
बतलाती है
सभ्यता संस्कृति की बात,
बतलाती है।

प्रेरणादाई शस्त्र यहां,
जीवन में उद्गार है
नारी उत्थान और पतन में,
सर्वत्र स्वीकार्य है।

उज्जवल गाथा रहीं सदैव,
उन्नयन रहीं व्यवहार है
घर-घर में लक्ष्मी कहलाती,
सरस्वती रूप अपरम्पार है।

इतिहास गवाह है यहां इधर,
सुन्दर प्रस्तुति उपहार है
जन-जन तक समां बिखेरती,
दिखती पवित्र संसार है।

वर्तमान संस्करण है,
उन्नत उज्जवल और प्रखर
वैश्विक संकेतों से दिखती,
खूब संजीव सलिल शिखर।

भारतीयता की शिखर बनकर,
आज़ ऊंचाइयों में है सफ़र
घर-घर में खुशहाली लाती,
उन्नत खोज बनी सबकी है।
रखवाली करती दिखती शक्ति,
कभी नहीं लगे इसको नज़र॥

परिचय-पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

 

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