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हर सफलता में उनका योगदान

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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मेरी असली प्रेरणा मेरे पिता जी हैं। मैंने उन्हीं की छात्र-छाया में आज अपनी मंजिल पायी है। आप ही वो वटवृक्ष हो, जिसकी छाया में मन प्रफुल्लित होता है। सदा मन कहता है कि आपके मतानुसार चलती रहूँ। आप ही जीवन हो, आप ही शक्ति हो, आप ही ताकत हो, आप ही सम्मान हो। आपके स्नेह से पल्लवित छाया हो, आपके ही कंधों का सहारा हो, आप ही प्रेरणा के स्रोत हो। आपके ‘सादा जीवन उच्च विचार’ को मन में सदा बसाए हूँ, ये मूल-भूत सिद्धान्त हैं। मेरे पिता जज थे, इसलिए नियम कानून के पक्के थे। मैं भी अन्याय आज भी बर्दाश्त नहीं कर पाती हूँ।
मैं जब जाती थी माँ के घर, तो बाबू जी बरामदे में बैठे रहते थे। मुझे देखते ही पहला शब्द बोलते थे- “नीलम आई है, जल्दी चाय बनाओ।”
पर आज जब जाती हूँ तो चारों तरफ सूना-सूना लगता है। बहुत तकलीफ होती है।
पिताजी, आपका प्यार, त्याग और आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मेरे जीवन में आपके द्वारा दिए संस्कार मुझे हर पल हर परिस्थिति में सिर ऊँचा रख कर जीना सिखाते हैं। जीवन की हर सफलता में उनका योगदान है। यह अनमोल रिश्ता है जो बिना कुछ कहे हमारी हर जरूरत और हर दर्द को समझ लेते हैं। उनके त्याग, प्रेम और आशीर्वाद के लिए जितना धन्यवाद करूँ, उतना कम ही होगा। पिता जीवन को दिशा, संरक्षण और उत्तम संस्कार भी देते रहे।
  संघर्ष का ही दूसरा नाम पिता जी ही होता है। जीवन की हर मुसीबत को दूर करने का काम पिता ही करते हैं। जीवन में अपने सपनों को सच करना है, तो पिता ही हर समय सलाह देते रहते हैं। किसी भी चीज की अच्छाई या बुराई का पिता ही ज्ञान कराते और सही राह बतलाते हैं। अपने सारे सपनों को छोड़ कर अपने बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए एड़ी-चोटी एक कर देते थे। ऊपर से वे सख्त दिखते, लेकिन अन्दर-ही-अंदर आँसू पीतेहैं, क्योंकि बहुत मुश्किल डगर पर चलते हैं। वे हर पल चिन्तन करते रहते हैं कि कैसे बच्चों की नींव मजबूत हो, जिससे मनपसंद मंजिल मिले और उनका भविष्य सफल हो।
    मेरे पिता मेरे आदर्श हैं। मैं उन पर बहुत गर्व करती हूँ, क्योंकि वे प्रेरणा बन कर ही मेरे सपनों में आते और तरह-तरह से उत्साहित कर हौसला बढ़ाते थे। हम सभी भाई-बहन पिता का ऋण कभी नहीं चुका पाएँगे।
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